गर्व का पल: अंतरिक्ष से सीधे समुद्र में उतरे भारत के शुभांशु शुक्ला, राकेश शर्मा की 41 साल पहले अंतरिक्ष से सीधे जमीन पर क्यों हुई थी लैंडिंग। जाने विस्तार से। Always Right or Wrong.
अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की धरती पर हुई सकुशल वापसी, कैसा रहा उनका सफर:-
भारतीय मूल के रहने वाले युवा अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला जो हाल ही में अपने पहले अंतरिक्ष मिशन से सकुशल धरती पर लोटे हैं। यह मिशन केवल भारत के लिए एक गर्व की बात है। अंतरिक्ष खोजों के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि के रूप में भी इसे देखा जा रहा है।
शुभांशु शुक्ला के जीवन का संक्षिप्त परिचय:-
शुभांशु शुक्ला मूल रूप से उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरिक्ष यात्री बनने वाले भारत के कुछ चुनिन्दा लोगों में से एक हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की। नासा व ESA यानि European Space Agency के साथ मिलकर संयुक्त मिशन के लिए चयनित भी हुए। उनका चयन सैकड़ों योग्य उम्मीदवारों में हुआ था, जिसमें उनकी शारीरिक क्षमता, मानसिक स्थिरता, विज्ञान में दक्षता और नेतृत्व क्षमता को सही से परखा गया और उसके बाद ही उन्हे इस मिशन के लिए चुना गया।
शुभांशु शुक्ला का अंतरिक्ष में जीवन का अनुभव कैसा रहा:-
शुभांशु ने अन्तरिक्ष में बिताए अपने समय को अद्भुत दृश्य, जीवन बदलने वाला कदम और वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत मूल्यवान क्षण बताया। उन्होंने बताया कि पृथ्वी को अन्तरिक्ष से देखना ही अत्यंत भावनात्मक और कुशल अनुभव देता था।
दैनिक जीवन किस प्रकार रहा:-
- वह हर दिन लगभग 8 घंटे का अनुसंधान कार्य, 2 घंटे का व्यायाम करना और शेष समय निजी गतिविधियों में बिताते थे।
- उनका भोजन पैक्ड और डीहाइड्रेटेड प्रकार का होता है, जिसे गर्म पानी मिलाकर ही खाया जा सकता है।
- वह नहाने या पानी के उपयोग की जगह वाइप्स और एयर फिल्टर का ही मुख्य रूप से उपयोग करते थे।
- शुभंशु नींद के लिए उन्हें विशेष स्लीप पॉड्स में ही सोना पड़ता है जो दीवार से चिपके प्रकार के होते हैं।
इस मिशन के वैज्ञानिक योगदान कितना सटीक रहा:-
शुभांशु और उनके साथ गए दल ने कई प्रयोग किए जिनका उद्देश्य था पृथ्वी पर स्वास्थ्य सेवाओं, संचार और जलवायु अध्ययन को बेहतर किस प्रकार बनाए। अंतरिक्ष में यह भी देखा गया कि माइक्रोग्रैविटी में कोशिकाएं कैसे पुनः उत्पन्न हो जाती हैं। इससे कैंसर व रीजनरेटिव मेडिसिन बनाने में काफी मदद मिल सकती है। उन्होंने विशेष दवाओं के क्रिस्टल को अंतरिक्ष में विकसित भी किया, जो धरती पर नहीं हो सकते है। एक AI संचालित रोबोट ने अनुसंधान कार्य में बहुत सहयोग किया, जिससे भविष्य में मानव रहित मिशनों की संभावना ओर अधिक बढ़ी है।
शुभांशु शुक्ला की सकुशल वापसी पर एक नजर:-
अंतरिक्ष में 93 दिनों के सफल मिशन के बाद शुभांशु और उनकी टीम ने SpaceX Dragon Capsule के ज़रिए अटलांटिक महासागर में बहुत शानदार लैंडिंग भी की है। इसके बाद उन्हें हेलीकॉप्टर द्वारा फ्लोरिडा शहर लाया गया था। डॉक्टर्स और नासा वैज्ञानिकों की एक टीम ने उनकी अच्छे से स्वास्थ्य जांच भी की, जो पूरी तरह से संतोषजनक रही थी।
शुभांशु शुक्ला की शानदार वापसी के बाद भारत में भी जश्न का माहौल बना हुआ था। भारत सरकार ने उन्हें गगन गौरव सम्मान देने की भी घोषणा कर दी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने शुक्ला के गांव में एक साइंस सेंटर खोलने की घोषणा कर दी है।
शुभांशु शुक्ला का अपने देश को संदेश:-
मीडिया से बातचीत में शुभांशु शुक्ला ने कहा कि “मैं अपने देश, अपने माता-पिता और विज्ञान को पूर्ण रूप से समर्पित हूं। अन्तरिक्ष ने मुझे यहीं सिखाया है कि सीमाएँ केवल मन में ही होती हैं। हर भारतीय युवा को बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए कठोर-से-कठोर परिश्रम भी करना चाहिए।”
भविष्य की योजनाओं पर एक नजर:-
शुभांशु शुक्ला अब भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि ISRO और अमेरिकी अंतरिक्ष अजेंसी NASA के साथ मिलकर एक संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेंगे। उनके द्वारा लिए गए अनुभव को अगली पीढ़ी के अन्तरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण में अच्छे से उपयोग किया जाएगा। साथ ही, वे स्कूलों में जाकर विज्ञान के प्रति बच्चों को प्रेरित करने की योजना पर भी काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि भारत के बच्चों को विज्ञान में अधिक रूचि लेनी चाहिए ताके वे भी उनकी तरह भविष्य में अंतरिक्ष की यात्रा कर सकें।
इसका निष्कर्ष:- एक नजर में
शुभांशु शुक्ला की अन्तरिक्ष यात्रा को एक व्यक्तिगत उपलब्धि मात्र नहीं कहा जा सकता, बल्कि भारत के लिए यह एक गर्व की बात भी है। यह उनके लिए एक प्रेरणा भी है कि उन लाखों युवाओं के लिए जो विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। उनकी सफलता यह दिखाती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट दिख रहा हो और मेहनत ईमानदारी से की जाये, तो कोई भी सीमा पार की जा सकती है।