भारत की संसदीय समिति ने आयकर विधेयक – 2025 के उन सभी प्रावधानों जिसमें कर अधिकारियों को सोशल मीडिया और निजी ईमेल तक जबरन पहुंच को बरकरार रखा है। Always Right or Wrong.
आयकर विधेयक, 2025 के मुख्य बिंदुओं, उद्देश्य, प्रक्रिया और प्रभावों का संक्षिप्त विवरण:-
1. आयकर विधेयक का प्रस्तुतिकरण और इसकी पारित प्रक्रिया:-
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह विधेयक 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में पेश किया था। इसका उद्देश्य वर्ष 1961 के आयकर अधिनियम को समाप्त कर एक नया, सरल, आधुनिक ढांचा तैयार करना था।
- भारत के कुछ विपक्षी दलों ने विधेयक का विरोध भी किया था, लेकिन वॉयस वोट द्वारा इसे लोकसभा में पारित करा लिया गया और बाद में इसे लोकसभा की प्रवर समिति यानि select committee और पार्लियामेंटरी स्टैंडिंग कमेटी ऑन फाइनेंस को भी भेजा गया था।
- आयोगित रिपोर्ट के आधार पर आयकर विधेयक को राज्यसभा में प्रस्तुत भी किया जाएगा। पारित होने के बाद ही इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून बनेगा और 1 अप्रैल 2026 से इसे लागू माना जाएगा।
2. आयकर विधेयक के प्रमुख उद्देश्य: एक नजर में
- वर्ष 1961 के अधिनियम में समय-समय पर कई प्रावधान जोड़े गए, जिसमे अनेक क्लॉज़, उप-धाराएँ, पैरों और विशिष्ट संदर्भ आदि शामिल थे, जिन्हें हटाकर पुनर्गठित करके लेखनी सरल एवं काफी हद तक स्पष्ट भी की गई है।
- आयकर विधेयक से विवादस्पद और अस्पष्ट प्रावधानों को हटाकर स्पष्टता लाई गई है ताकि करदाताओं की स्वैच्छिक अनुपालन की आदत को ओर भी अच्छे से बढ़ावा मिल सके।
- डिजिटल आस्तियों; जैसे: ईमेल, सोशल मीडिया, ट्रेडिंग/बैंकिंग खातों आदि की पहुंच कर अधिकारियों को भी प्रदान की गई है, जिसे विधेयक में वरचुअल डिजिटल स्पेस के रूप में भी सही से परिभाषित किया गया है ।
- वैश्विक श्रेष्ठ प्रथाओं जैसे Austria, UK आदि को देखते हुए ओर सही प्रकार से सरलीकरण लागू किया गया है।
3. आयकर विधेयक का संरचनात्मक परिवर्तन
- इन सभी के स्थान पर केवल कर वर्ष की अवधारणा को सही प्रकार से लागू किया गया है, जो सामान्य वित्तीय वर्ष यानि 1 अप्रैल से 31 मार्च के अनुसार ही प्रस्तुत होगा।
- इस विधेयक में कर स्लैब, मानक कटौती, पूंजीगत लाभ आदि को मौलिक रूप से अपरिवर्तित रखा गया हैं। जैसे वेतनभोगियों को बढ़ी हुई मानक कटौती अब ₹75,000 मिलेगी।
4. आयकर विधेयक के प्रमुख परिवर्तन या मुख्य प्रावधान:-
आयकर विधेयक में कर अधिकारियों को डिवाइस, ईमेल, बैंक/ट्रेडिंग खातों तथा सोशल मीडिया आदि तक पहुंच देने की अध्यक्षता की गयी है, जो मौजूदा कानून में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं होती था। यह परिवर्तन विवादस्पद होने की संभावना तो रखता ही है साथ ही लोकतांत्रिक गोपनीयता हित और उपयोगिता के बीच भी संतुलन को बनाए रखना बहुत आवश्यक है।
- इस अधिनियम में टैक्स कोड की शैली को बहुत सरल भाषा, छोटी क्लॉज़, स्पष्ट मेन्यूफैक्चरिंग के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- आयकर अधिनियम में तालिकाओं और सूत्रों का उदाहरण भी कर गणना स्पष्ट और तुलनात्मक रूप से बहुत आसान हो गई है।
- अनावश्यक विवरणों का निष्कासन होगा जिसमे 1,200 प्रावधान तथा 900 स्पष्टीकरण को भी हटाया गया है, जिससे अधिनियम स्वैच्छिक और सेल्फ-एक्सप्लेंट्री भी हुआ है।
आयकर विधेयक 2025 में स्टार्टअप, डिजिटल व्यवसाय तथा नवीकरणीय ऊर्जा निवेशों के लिए विशेष छूटों और पूंजीगत लाभ प्रावधानों को संरचित रूप से प्रस्तुत किया गया है ।
- कृषि क्षेत्र से प्राप्त होने वाली आमदनी पर निर्धारित शर्तों के साथ कर-मुक्त बनाए रखा गया है।
- इस विधेयक में ऑनलाइन अनुपालन यानि e-filing, e-KYC, digital payment आदि को भी अनिवार्य कर दिया गया है।
5. आयकर विधेयक पर स्थिरता बनाम सुधार:-
- मौजूदा इन्कम टैक्स स्लैब तथा छूट सूचियाँ अपरिवर्तित ही रखी गई हैं। इसका उद्देश्य करदाताओं के बीच स्थिरता एवं पूर्वानुमान क्षमता को स्पष्ट रूप से बनाए रखा जाये, उसपर अच्छे से काम किया गया।
- इस विधेयक की स्पष्टता देश के सभी करदाताओं एवं कर सलाहकारों की भी अच्छे से सहायता करेगी, जिससे देश की कानूनी व्यवस्था पर विवाद के दबाव कम होंगे।
6. आयकर विधेयक पर विवाद और उलझते सवाल:-
- इस अधिनियम में डिजिटल असेट्स तक कर अधिकारियों की व्यापक पहुंच संवैधानिक गोपनीयता के दृष्टिकोण को भी विवादास्पद बना सकती है ।
- नई भाषाशैली का प्रयोग, तालिकाएँ, सूत्र तथा डिजिटल प्रक्रियाएं भी लागू करने में प्रशासन को काफी समय लग सकता है, विशेषकर स्थानीय स्तर पर विभागीय कार्यान्वयन में उलझकर।
- इसकी चयन समिति तथा राज्यसभा में विधेयक में संशोधन की गुंजाइश काफी कम हो जाती है।
7. आयकर विधेयक के प्रभाव:-
- इस अधिनियम से कर प्रणाली आधुनिक एवं प्लग‑एंड‑प्ले बनेगी, जिससे करदाताओं और व्यापार जगत को सरल बनाने में मदद भी मिल सकता है।
- विवाद में काफी कम होगी, जिससे कर व्यवस्ता में देश की जनता का भरोसा भी बढ़ेगा।
- देश में डिजिटलीकरण तेजी से आगे बढ़ेगा, लेकिन प्राइवेसी कानूनों तथा डेटा सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए सुधार की OECD स्वरूप की भी आवश्यकता होगी।
- वर्ष 2026–27 से लागू होने वाला कर अधिनियम में एक अलग ही पदधि तैयार हो सकेगी जो शिक्षा/प्रशिक्षण पर भी अधिक-से-अधिक बल दे सकेगी।
इसका निष्कर्ष:-
आयकर विधेयक – 2025 मूल रूप से एक कोडिफिकेशन प्रकार की पदधि है, जिसमें वर्ष 1961 के कानून का संरचनात्मक रूप से पुनर्गठन शामिल है, लेकिन कर दरों या नीति में कोई व्यापक बदलाव भी नहीं किया गया है। इसका मुख्य लक्ष्य अनुपालन में बड़ी सरलता, स्थिरता और आधुनिक समय के अनुरूप संरेखण सुनिश्चित करना भी शामिल किया गया है।
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Future men इसके कार्यान्वयन, चयन समिति की रिपोर्ट, डिजिटल डेटा सुरक्षा प्रावधानों और राज्यसभा संशोधनों से ही यह निर्णय अच्छे से हो सकेगा कि यह विधेयक भारत की कर प्रणाली में कितना सार्थक सुधार लाएगा।