एनटीपीसी को एनटीपीसी ग्रीन में 20 हजार करोड़ के निवेश को सरकार की ओर से मिली मंजूरी, इस फैसले से सौर ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा। Always Right or Wrong.
एनटीपीसी को मिली 20 हजार करोड़ के निवेश की मंजूरी:-
एनटीपीसी यानि National Thermal Power Corporation Ltd., जिसे हाल ही में कैबिनेट समिति CCEA द्वारा अक्षय ऊर्जा में भारी निवेश करने की मंजूरी दी गई है। इस मंजूरी के तहत एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड यानि NGEL और उसकी सहायक कंपनियों के माध्यम से अगले कुछ वर्षों के लिए ₹20 हजार करोड़ रूपये तक का निवेश किया जा सकेगा।
एनटीपीसी की नीति और लक्ष्य की पृष्ठभूमि–
- कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने 16 जुलाई 2025 को अपने एक फैसले में कहा कि NGEL को केवल ₹7,500 करोड़ तक का निवेश करने का अधिकार दिया जा सकता था, अब इसे ₹20,000 करोड़ तक बढ़ा दिया गया है।
- एनटीपीसी को दिया गया यह अधिकार भारत की ग्लोबल क्लाइमेट अनुस्कुलनों और एनर्जी ट्रांजिशन लक्ष्य को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
- भारत सरकार का मानना है कि इससे अक्षय ऊर्जा की सभी परियोजनाएँ अपनी पूर्ण क्षमता के साथ तेज़ी से आगे बढ़ सकेंगी और देश का non-fossil fuel क्षमता को अधिक-से-अधिक बढ़ाया जा सकेगा ।
एनटीपीसी को दिये निवेश का मुख्य उद्देश्य:-
- भारत में एनजीईएल अपने जेवी सहित अपनी कुल क्षमता 60 GW अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य वर्ष 2032 के लिए अभी से लेकर चल रहा है। वर्तमान में एनजीईएल की परिचालन क्षमता लगभग 6 GW से कुछ अधिक है और 17 GW अनुबंधित मानी जाती है।
- कैबिनेट की नई मंजूरी से भारत वित्त वर्ष 2027 तक 19 GW अक्षय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के लक्ष्य में बेहतर तरक्की कर सकेगा।
- भारत पहले से ही अपनी कुल क्षमता का लगभग आधा गैर-फॉसिल स्रोतों; जैसे सोलर, विंड, हाइड्रो, न्यूक्लियर आदि से प्राप्त कर रहा है और अब इसे सर्वाधिक क्षमता तक बढ़ाने की चाह रखता है।
एनटीपीसी की वित्तीय क्षमता और उसका पूंजी जुटाना:-
- एनटीपीसी बोर्ड ने जून 2025 में ₹18 हजार करोड़ तक NCDs/bonds जारी करने की योजना को भी तत्काल प्रभाव से मंजूरी दे दी है, जो इसके कैपेक्स और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण में बहुत काम आने वाली होगी।
- साथ ही एनजीईएल ने आईपीओ के माध्यम से ₹10 हजार करोड़ जुटाने की दिशा में भी अपना कदम आगे बढ़ा दिया है, जिसमें सेबी से भी मंजूरी मिल चुकी है।
- देखा जाये तो कुल मिलाकर, एनजीईएल के पास पर्याप्त फंडिंग चैनल्स मौजूद हैं; जैसे: सरकारी मंजूरी, बांड इश्यू एवं सार्वजनिक शेयर बाजारों से पूंजी प्राप्त करना आदि शामिल हैं।
बाजार और निवेशकों की प्रतिक्रिया
- इस निवेश निर्णय की घोषणा के बाद NGEL और एनटीपीसी के शेयर में तेजी देखी गई।
- NGEL के शेयर करीब 2 % ऊपर बंद रहे ₹112 के स्तर पर.
- एनटीपीसी शेयर भी थोड़ा ऊपर गए – ₹342.45 तक, लगभग 0.13 % की बढ़त।
- NLC इंडिया के शेयरों में भी लगभग 4 % की तेजी दिखाई दी।
- निवेशक और विश्लेषक इस फैसले को सकारात्मक लेंगे क्योंकि यह सोलर, विंड और हाइड्रोजन जैसे ग्रीन सेक्टर में विस्तार को दर्शाता है।
एनटीपीसी का पारिस्थितिक पद्धति और ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव:-
- इसकी पारंपरिक थर्मल ऊर्जा पर निर्भरता भी तेजी से घटेगी, जिससे कार्बन-डाई-ऑक्साइड उत्सर्जन भी तेजी से घटेगा।
- इसका अक्षय स्रोत अधिक वितरणीय और देश में उपलब्ध हो सकेगा, जिससे बाहरी संसाधनों पर उसकी निर्भरता भी कम होगी।
- इसके निर्माण और संचालन चरण में पर्याप्त श्रम का योगदान भी देखने को मिलेगा।
- इसके ग्रीन सेक्टर में निवेश बढ़ने से वृहद आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ भी अधिक मिलेंगे।
7. एनटीपीसी की चुनौतियाँ और उसकी सावधानियाँ:-
- ₹20 हजार करोड़ रुपए की सिर्फ लाइमिट दिखाई गयी है, इसे प्रभावी और समय पर उपयोग करना अहम हो जाता है।
- इसकी परियोजनाएं लागत, स्थिति और बिजली की कीमतों पर भी यह निर्भर करती हैं, इसे यह भी सुनिश्चित करना होगा कि रिटर्न अपेक्षित होगी या नहीं।
- एनटीपीसी में सोलर एवं विंड परियोजनाओं के लिए बैटरी स्टोरेज और योजनाबद्ध ग्रिड इंटीग्रेशन की बहुत जरूरी होगा।
- इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि और पर्यावरण मंजूरी समयबद्ध तरीके से मिले, इसके लिए यह सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है।
एनटीपीसी की व्यापक पृष्ठभूमि के साथ-साथ इसकी तुलना:-
- भारत साल 2030 तक 500 GW गैर-फॉसिल क्षमता हासिल करने पर अपना ध्यान केंद्रित किए हुए है; एनटीपीसी का यह महत्वपूर्ण कदम इसी दिशा के अनुरूप प्रतीत होता है ।
- एमजीआईए के प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं:-
- इंदौर जैसे राज्यों में एनजीईएल और अन्य सहयोगी कंपनी के माध्यम से बड़े पैमाने पर सोलर और विंड प्लांट विकसित करना भी इसका उद्देश्य है।
- मध्य प्रदेश में एक प्रस्तावित 20 GW परियोजना भी इन दिनों काफी चर्चा में है; एनटीपीसी वहां ₹1.2 ट्रिलियन रुपए तक निवेश योजनाओं पर काम तेजी से कर रहा है। यदि यह परियोजना वास्तव में आगे बढ़ती है, तो यह कदम आर्थिक एवं सामाजिक दोनों दृष्टियों से बड़ा होना तय माना जा रहा है।
इसका निष्कर्ष:-
केंद्र सरकार की अक्षय ऊर्जा नीति में सार्वजनिक ऊर्जा कंपनियों की भूमिका स्पष्ट होती जा रही है। एनटीपीसी के अक्षय ऊर्जा की निर्माण गति तेज करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है। एनजीईएल को पूंजी बाजार, बांड बाजार और सरकारी सुविधाओं के माध्यम से आर्थिक आधार भी काफी मजबूत मिल सकता है।