किसान आंदोलन 2025 : किसान नेताओं ने केंद्र से मांग की, बैठक में पंजाब के मंत्रियों को शामिल न किया जाये, कहा नहीं मानेगे शर्ते।

Table of Contents

Toggle

किसान आंदोलन 2025 : किसान ने कहा कि पंजाब सरकार को शामिल न किया जाये।  

किसान आंदोलन 2025 का परिचय:- 

भारतीय किसान आंदोलन मुख्य रूप से वर्ष 2020-21 में केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुआ एक आंदोलन था, यह एक ऐसा जनांदोलन था जिसने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर सभी का ध्यान आकर्षित किया बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी खूब चर्चाएं बटोरी। वर्ष 2024-25 में फिर से उग्र होते किसान आंदोलनों में केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत के दौर की प्रक्रिया फिर से प्रारंभ हुई। लेकिन इस बार का महत्वपूर्ण बिन्दु यह रहा है कि इन वार्ताओं में पंजाब सरकार को शामिल नहीं किया गया। किसान नेताओं के इस निर्णय ने अनेक सवाल पंजाब सरकार के खिलाफ खड़े कर दिए हैं कि क्या यह एक राजनीतिक फैसला है? क्या यह केंद्र और पंजाब राज्य की सरकार के बीच तनाव का प्रतीक बनकर दिख रहा है? या यह बनते राजनीतिक समीकरणों का परिणाम प्रतीत हो रहा है?

किसान आंदोलन 2025
किसान आंदोलन 2025

1. किसान आंदोलन 2025 की पृष्ठभूमि: किसान आंदोलन और पंजाब की भूमिका क्या है?

पंजाब राज्य ने किसान आंदोलनों में शुरुआत से ही एक मुख्य भूमिका निभाई है। कृषि कानूनों के विरोध में, सबसे पहले और सबसे मुख्य स्वर पंजाब के किसानों का ही रहा है। दिल्ली की सीमाओं की घेरने के लिए सबसे पहले और सबसे बड़े जत्थे पंजाब राज्य से ही आए थे। पंजाब सरकार ने वर्ष 2020 में राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पास करके इन कानूनों को अस्वीकार भी कर दिया था। इससे यह बात तो स्पष्ट है कि राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी दिख रही थी।

किसान आंदोलन 2025

परंतु जब वर्ष 2024-25 में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर फिर से आंदोलन आरंभ किया और सरकार के साथ कई वार्ताएं हुईं, तो पंजाब सरकार को शुरुआत से ही वार्ता प्रक्रिया से बाहर रखा गया।

2. किसान आंदोलन 2025 : पंजाब सरकार को वार्ता से बाहर रखने के संभावित कारण पर एक नजर:- 

(क) केंद्र और राज्य सरकार के बढ़ते राजनीतिक मतभेद:- 

वर्तमान में पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ है जबकि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता में काबिज है। यह बात भी सत्य है कि दोनों दलों के बीच वैचारिक और राजनीतिक मतभेद शुरू से ही रहे हैं। वार्ता में पंजाब राज्य की सरकार की भागीदारी को हटाया जाना एक प्रकार से राजनीतिक संतुलन को अपने पक्ष में बनाए रखने या राज्य सरकार के हस्तक्षेप को सीमित बनाए रखने की रणनीति हो सकती है।

किसान आंदोलन 2025

(ख) वार्ता की जटिलता और केंद्रीकृत निर्णय प्रणाली पर एक नजर:- 

केंद्र सरकार देखा जाये तो वार्ता प्रक्रिया को अपने पक्ष में और केंद्रीकृत बनाना चाहती है ताकि कई पक्षों की बढ़ती भागीदारी से वार्ता का स्वरूप कठिन न हो जाए। राज्य सरकारों की भागीदारी मुख्य रूप से नीतिगत मतभेद और प्रशासनिक अड़चनों को बढ़ावा देती है।

(ग) विश्वास की कमी या संवादहीनता का बढ़ता स्तर:- 

पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के बीच बढ़ी हुई राजनीतिक खाई भी इस निर्णय का एक कारण हो सकता है। केंद्र सरकार को शुरुआत से ही यह आशंका हो सकती है कि राज्य सरकार की उपस्थिति वार्ता प्रक्रिया को विफल बना सकती है।

किसान आंदोलन 2025

(घ) किसान संगठनों की मांग और प्राथमिकता पर एक संक्षिप्त नजर:- 

यह भी हो सकता है कि किसान संगठन राज्य सरकार का हस्तक्षेप न चाहकर सीधे केंद्र सरकार से वार्ता को ही प्राथमिकता दे रहे हों, क्योंकि किसानों की ज़्यादातर मांगें जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, फसलों की खरीद की स्थिर प्रणाली, ऋण माफी आदि, सीधे-सीधे केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में हैं। इसलिए राज्य सरकार की भागीदारी होना न के समान दिख रहा है।

3. किसान आंदोलन 2025 से पंजाब सरकार को बाहर रखने के प्रभाव पर एक नजर:- 

पंजाब सरकार इस निर्णय को अपने अपमान के रूप में ले सकती है। इससे पंजाब राज्य और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है, जिसका असर सीधे तौर पर संघीय ढांचे की कार्यप्रणाली पर पड़ेगा। पंजाब के किसान भविष्य में यह महसूस कर सकते हैं कि उनकी राज्य सरकार को दरकिनार किया जाना उनके प्रतिनिधित्व को कमज़ोर भी कर सकता है। इस कारण किसानों में असंतोष बढ़ सकता है। किसानों के एक बड़े समूह में प्रतिनिधित्व की कमी वार्ता की वैधता को भी कठिन बना सकती है।

किसान आंदोलन 2025

4. किसान आंदोलन 2025 : संभावित समाधान और सुझाव पर एक नजर:- 

(क) संवाद की पुनर्स्थापना होना:- 

राज्यों और केंद्र के बीच अच्छा तालमेल होना बहुत ज़रूरी है ताकि किसी भी निर्णय तक पहुचने में समन्वय बना रहे।

(ख) राजनीति से ऊपर उठकर समस्या का समाधान करना:- 

किसानों के लिए कृषि एक संवेदनशील और जनजीवन से सीधा जुड़ा हुआ विषय समझा जाता है। इसे केवल राजनीतिक दृष्टि से देखना उचित नहीं है। सरकारों को राजनीति से ऊपर उठना चाहिए ताकि किसानों के हित में एक साथ मिलकर काम किया जा सके।

(ग) संविधान के संघीय ढांचे का सम्मान होना चाहिए:- 

केंद्र सरकार द्वारा राज्यों की भूमिका को अनदेखा करना संविधान के संघीय स्वरूप को कमजोर करता है। केंद्र को सभी राज्यों को समान अवसर देना चाहिए और राज्यों के विचारों को भी अपनी प्रक्रिया में सम्मिलित करना चाहिए।

5. किसान आंदोलन 2025 का निष्कर्ष:- 

केंद्र सरकार का पंजाब सरकार को सीधे तौर पर आंदोलन वार्ता से बाहर रखने का निर्णय केवल प्रशासनिक ही नहीं है  बल्कि बढ़ते राजनीतिक आयामों से जुड़ा हुआ भी प्रतीत हो रहा है। सरकार का यह कदम तत्कालीन वार्ता को सरल भले ही बनाए, परंतु लंबी अवधि में इससे किसानों और राज्यों में विश्वास की कमी देखने को मिलेगी।

https://www.amarujala.com/punjab/chandigarh-punjab/meeting-between-farmers-and-central-government-on-may-4-punjab-ministers-will-also-participate-2025-04-30

पंजाब हरियाणा पानी विवाद 2025 : हरियाणा को नहीं छोड़ा गया पानी, अड़ गया पंजाब; पुलिस का कड़ा पहरा; क्या है पानी विवाद? जाने विस्तार से। जानिए क्यों छिड़ा है जल विवाद

2025: अमेरिका की शुल्क नीति का भारत पर प्रभाव होगा या नहीं, साथ ही चीन की अर्थव्यवस्था खराब होगी या नहीं? आइये जाने विस्तार से,

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *