यूरोप में गर्मी का कहर

स्पेन से इटली तक 2025 की प्रचंड गर्मी से क्यों जूझ रहा यूरोप; पिछले 100 साल का रिकॉर्ड टूटा।

फ्रांस, इटली सहित पूरे यूरोप में गर्मी का भरी प्रकोप, स्पेन में 100 साल का रिकॉर्ड टूट गया है:-

वर्तमान में यूरोप एक अभूतपूर्व गर्मी की लहर से बुरी जूझ रहा है। फ्रांस, स्पेन, इटली, जर्मनी और यूनान जैसे ठंडे देशों में तापमान सामान्य से कहीं अधिक पहुंच चुका है। यूरोप के स्पेन में तो गर्मी ने 100 वर्षों का अपना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। देखा जाये तो यह स्थिति केवल एक मौसमी बदलाव मात्र नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन का एक स्पष्ट संकेत भी है जो भविष्य में गहरी चिंता पैदा करेगा।

यूरोप में गर्मी का कहर

स्पेन जैसे ठंडे देशों में टूटा 100 साल पुराना रिकॉर्ड:-

साल 2025 की गर्मियों में स्पेन के ऐसे कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर गया है। राजधानी मैड्रिड और दक्षिणी क्षेत्रों जैसे सेविल और कोर्डोबा में पारा 47 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर गया, जो पिछले 100 वर्षों में सबसे अधिक देखा गया है। स्पेन के राष्ट्रीय मौसम एजेंसी (एईएमईटी) ने बताया कि यह वर्ष देश के इतिहास में सबसे गर्म सालों में से एक माना जा रहा है।

यूरोपीय देश स्पेन में गर्मी के कारण अब तक दर्जनों लोगों की मौत भी हो चुकी है। हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और हृदय संबंधी समस्याएं लोगों में आम हो गई हैं। विशेष रूप से बुजुर्ग, बच्चे और प्रवासी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

यूरोप में गर्मी का कहर

फ्रांस में बढ़ रही भीषण गर्मी और सूखा:- 

यूरोपीय देश फ्रांस में भी हालात बिलकुल भी ठीक नहीं हैं। इस देश के दक्षिणी हिस्सों जैसे मार्सेई, टूलूस और नाइस में गर्मी से तापमान 42-44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। फ्रांस की प्रमुख नदियाँ जैसे गारोन और रोन में जलस्तर काफी नीचे जा चुका है। यूरोपीय देश के कई ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की कमी तक हो गई है।

इटली और यूनान के जंगलों में भीषण आग:- 

इटली और यूनान जैसे ठंडे देश गर्मी के कारण एक और बड़ी आपदा का सामना कर रहे हैं; जैसे: जंगलों में आग, आदि। सिसिली, कालाब्रिया और एथेन्स के आसपास के जंगलों में लगी भीषण त्रासदी वाली आग ने सैकड़ों हेक्टेयर जंगल को पूर्ण रूप से नष्ट कर दिया है। हजारों लोगों को अपने घर खाली करने पड़े और सुरक्षित स्थान पर जाना पड़ा है।

यूरोप में गर्मी का कहर

तेज गर्मी और सूखे के कारण इन आगों को बुझाना बहुत कठिन हो गया है। तेज़ हवाएँ और शुष्क वातावरण आग को और फैलाने में बहुत मदद कर रहे हैं।

इस गर्मी का स्वास्थ्य और जीवनशैली पर कितना प्रभाव ?

यूरोप के सभी अस्पतालों में हीटस्ट्रोक और पानी की कमी से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। नींद की समस्या, चिंता और श्वसन समस्याएं भी आम-तौर पर सामने आ रही हैं। गर्मी ने न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, बल्कि उत्पादकता और जनजीवन को भी बहुत हद तक बाधित किया है।

सरकार द्वारा नागरिकों को सलाह दी जा रही है कि वे अधिक पानी पिएँ, हल्के कपड़े पहनें और दोपहर के समय घर के अंदर ही रहें; बिना काम घर से बाहर न निकलें। सरकार द्वारा शहरों में कूलिंग सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं जहाँ लोग कुछ घंटों के लिए जाकर ठंडी हवा में आराम कर सकें।

यूरोप में गर्मी का कहरदुनिया में आई औद्योगिक क्रांति के बाद से ही धरती का औसत तापमान लगभग 1.2°C तक बढ़ चुका है। अगर यह वृद्धि 1.5°C से ऊपर जाती है, तो यूरोप जैसे ठंडे क्षेत्रों में भी यह गर्मी जानलेवा साबित हो सकती है।

गर्मी के कारण कृषि और खाद्य आपूर्ति पर कितना प्रभाव ?

भीषण गर्मी और सूखा यूरोपीय कृषि व्यवस्था पर गंभीर असर डाल रहा है। गेहूं, जैतून, अंगूर और सब्जियों की फसलें तेजी से बर्बाद हो रही हैं। जलस्रोत सूखने के कारण सिंचाई करना किसानों के लिए कठिन हो गया है। इससे खाद्य आपूर्ति में भारी कमी और कीमतों में तेज वृद्धि भी देखी जा रही है।

स्पेन और इटली जैसे यूरोपीय देश प्रमुख खाद्य निर्यातक हैं, इन देशों में पैदावार 30-40% तक घट गई है। इसके असर से भारत जैसे आयातक देशों में भी कीमतें तेजी से बढ़ने की संभावना है।

यूरोप में गर्मी का कहर

गर्मी से परेशान देशों में ऊर्जा और बिजली की मांग बढ़ी:- 

भीषण गर्मी के चलते एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों की मांग में काफी तेजी आई है। इससे बिजली की खपत भी लगातार बढ़ रही है। फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों में कोयले से बिजली उत्पादन अस्थायी रूप से फिर से शुरू कर दिया गया है, जिससे कार्बन उत्सर्जन ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। जिस कारण हाइड्रोपावर उत्पादन भी तेजी से गिर गया है क्योंकि नदियों और जलाशयों में पानी की भारी कमी देखने को मिल रही है।

इसका निष्कर्ष: आने वाले खतरे और उपाय पर एक नजर:- 

यूरोप में गर्मी बढ्ने की घटना एक चेतावनी है, जो यह बताती है कि जलवायु परिवर्तन अब कोई दूर की समस्या नहीं है, बल्कि वर्तमान की सच्चाई है; जिसे इंसान जानकार भी अनदेखा कर रहा है। अगर अभी कठोर कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो भविष्य में यह स्थिति और ज्यादा भयावह हो सकती है।

इनके आवश्यक कदमों में शामिल हैं:

  1. ऊर्जा नवीनीकरण का विस्तार।
  2. कार्बन उत्सर्जन में ज्यादा-से-ज्यादा कटौती करना।
  3. जल संरक्षण की नीति को अपनाना।
  4. शहरी क्षेत्रों में अधिक हरियाली बढ़ाना।
  5. जनचेतना अभियान चलाना।

यूरोप में तेजी से बढ़ती गर्मी की लहर पूरी दुनिया के लिए एक सबक है कि पृथ्वी को बचाने का समय अब आ गया है, इसे कल पर नहीं छोड़ा जा सकता।

एशिया में अमेरिका की सुरक्षा नीति क्या है ?, एशिया को लेकर चीन-अमेरिका संबंधों पर क्या प्रभाव? (2025) जाने विस्तार से।

https://www.thehindu.com/sci-tech/energy-and-environment/barcelona-records-the-hottest-june-in-over-100-years-as-heat-wave-grips-europe/article69759162.ece

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