भारत-चीन संबंधों में बढ़ती जटिलता के क्या मायने ? पड़ोसी देशों का भविष्य क्या होगा ? जाने वर्तमान से 1947 तक का पूरा इतिहास। Always Right or Wrong.
भारत-चीन संबंध किस प्रकार परिवर्तित हुए: वर्तमान से 1947 तक का इतिहास:-
भारत और China एशिया की दो प्राचीन सभ्यताएं हैं, दोनों देश भौगोलिक दृष्टि से पड़ोसी भी हैं, सांस्कृतिक, धार्मिक, व्यापारिक और राजनयिक रूप से भी हजारों वर्षों से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। हालांकि स्वतंत्रता के बाद से इन दोनों ही देशों के संबंधों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं, लेकिन द्विपक्षीय संबंधों का इतिहास काफी जटिल और विविधतापूर्ण रहा है।
प्राचीन काल में भारत-चीन सम्बन्धों पर एक नजर:-
भारत और China के संबंधों की नींव प्राचीन काल के समय में ही पड़ गई थी। इन दोनों देशों के सम्बन्धों का आरंभ एक दूसरे की सांस्कृतिक और धार्मिक आदान-प्रदान से हुआ था।
- बौद्ध धर्म का दोनों देशों में प्रचार: बौद्ध धर्म का प्रचार भारत से China में लगभग पहली शताब्दी ईस्वी में माना जाता था। भारतीय बौद्ध भिक्षु जैसे कुमारजीव, बोधिधर्म और धर्मरक्ष नामक व्यक्ति China गए थे और वहाँ बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में भी उन्होने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- चीनी तीर्थयात्रियों का भारत में आगमन: चीनी भिक्षु फा-ह्यान 5वीं सदी में और ह्वेनसांग 7वीं सदी में भारत आए थे और अपने यात्रा वृत्तांतों में भारतीय समाज, धर्म, शिक्षा और राजनीति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया था।
- दोनों देशों का सिल्क रूट: प्राचीन व्यापार मार्ग सिल्क रूट के माध्यम से भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंध लंबे समय तक कायम रहे थे। दोनों देशों में रेशमी वस्त्र, मसाले, औषधियाँ और बौद्ध ग्रंथों का आदान-प्रदान होता रहा था।
मध्यकाल में दोनों देशों के बीच संबंध:-
मुगल काल और उसके बाद तक भारत और China के बीच संबंध अपेक्षाकृत सीमित ही रहे, क्योंकि दोनों देशों के आंतरिक मसले और विदेशी आक्रमणों के कारण संपर्क में काफी हद तक कमी आई थी।
- दोनों देशों के बीच व्यापारिक स्तर पर सीमित संपर्क कायम रहा।
- दोनों देशों में बौद्ध धर्म के प्रभाव में कमी आने से सांस्कृतिक संवाद भी काफी घटा।
ब्रिटिश काल में India-China के बीच संबंध: एक नजर में
18वीं और 19वीं शताब्दी में दोनों ही देशों पर विदेशी नियंत्रण था। भारत ब्रिटिश उपनिवेश बन गया था और China में किंग राजवंश तेजी से कमजोर पड़ने लगा था।
- अफीम युद्ध: ब्रिटिशों ने China में भारत से अफीम का व्यापार शुरू कर दिया था। इससे China में अफीम की लत तेजी से बढ्ने लगी थी और अंततः वर्ष 1839-42 व वर्ष 1856-60 में अफीम युद्ध बड़े स्तर पर हुआ। China को इसमें अपमानजनक समझौतों पर हस्ताक्षर करने पड़े थे।
- तिब्बत और ब्रिटिश भारत संबंध: वर्ष 1903-04 में ब्रिटिश भारत ने तिब्बत पर ल्हासा अभियान को बड़े स्तर पर चलाया जिससे China बहुत चिंतित हुआ। वर्ष 1914 में शिमला समझौता हुआ जिसमें तिब्बत को भारत-तिब्बत सीमा मैकमोहन रेखा के रूप में निर्धारित कर दिया गया, परंतु China ने इसे कभी मान्यता नहीं दी थी।
वर्ष 1947 के बाद स्वतंत्र भारत और China के संबंध:-
भारत की ब्रिटिश साम्राज्य से स्वतंत्रता के बाद दोनों देशों के बीच संबंध एक नए युग में प्रवेश करते हैं। जो इस प्रकार थे:-
1. वर्ष 1950 के समय चीन का तिब्बत पर अधिकार:-
- वर्ष 1950 में China ने तिब्बत पर अपना सैन्य नियंत्रण स्थापित कर लिया था।
- भारत ने इस नियंत्रण को मौन समर्थन दिया और तिब्बत को China का अंग माना, जिससे तिब्बत और भारत के पारंपरिक संबंध धीरे-धीरे कमजोर हुए।
2. वर्ष 1954 में हुआ पंचशील समझौता:-
- भारत और China ने वर्ष 1954 में पंचशील सिद्धांतों पर आधारित एक समझौता किया जिसमें शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को काफी महत्व दिया गया था।
- दोनों देशों द्वारा “हिंदी चीनी भाई-भाई” का नारा भी दिया गया था।
3. वर्ष 1962 में हुआ भारत-चीन के बीच युद्ध:-
- वर्ष 1962 में China ने अक्साई चिन क्षेत्र लद्दाख और नेफा जो अब अरुणाचल प्रदेश में है, में आक्रमण कर दिया था।
- भारत को इस युद्ध में करारी हार मिली थी। इस युद्ध से हिंदी-चीनी भाईचारे की भावना को भी झटका लगा था।
वर्ष 1962 से 1990 के बीच संबंधों में पड़ा ठंडापन:-
- वर्ष 1967 में सिक्किम सीमा पर झड़पें हुईं जिसमें भारत ने अपनी बढ़त दिखाई थी।
- वर्ष 1976 में राजनयिक संबंध भी बहाल हुए, लेकिन गहरी असहमति भी बनी रही।
- वर्ष 1988 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी की चीन यात्रा ने द्विपक्षीय संवाद की फिर से शुरुआत की।
वर्ष 1990 के बाद के संबंधों में हुआ पुनरुद्धार:-
- व्यापारिक संबंधों में तेज वृद्धि: दोनों देशों ने आर्थिक सुधारों के बाद आपसी व्यापार को तेजी से बढ़ावा दिया। उस समय China भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा।
- दोनों देशों की सीमा वार्ता और समझौते: वर्ष 1993, 1996, 2005 और 2013 में सीमा विवादों को सुलझाने के लिए कई समझौते किए गए थे।
- BRICS और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में दोनों देशों की भागीदारी ने सहयोग को काफी हद तक आगे बढ़ा दिया था।
Bharat-China के वर्तमान स्थिति:-
साल 2017 में हुआ डोकलाम संकट:-
- भूटान-China सीमा पर डोकलाम में चीनी सड़क निर्माण को भारत ने रोक दिया था। 73 दिनों तक दोनों सेनाएँ आमने-सामने खड़ी रहीं थी।
गलवान घाटी में 2020 में हुआ संघर्ष:-
- लद्दाख के गलवान क्षेत्र में भारत-चीन सैनिकों के बीच हुई खूनी झड़प लंबे समय तक रही। भारत के 20 सैनिक और China के अनिश्चित संख्या में सैनिक इस संघर्ष में मारे गए थे।
- इसके कुछ समय बाद दोनों देशों ने सैन्य और कूटनीतिक वार्ता शुरू की थी लेकिन सीमा पर तनाव अभी भी बना हुआ है।
दोनों देशों की वर्तमान स्थिति:-
- दोनों देशों का सैनिक गतिरोध अभी भी लद्दाख के कई इलाकों में बरकरार है।
- आर्थिक निर्भरता के क्षेत्र में China से आयात अब भी काफी अधिक है, जिससे व्यापार घाटा अभी भी बना हुआ है।
- रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में भारत ‘QUAD’ यानि अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के साथ मिलकर China की आक्रामकता का जवाब देने की नीति पर अपना काम कर रहा है।
इसका निष्कर्ष:-
भारत और China के बीच संबंध प्राचीन सांस्कृतिक मित्रता से आधुनिक सामरिक प्रतिद्वंद्विता में अब बदल चुके हैं। तिब्बत, सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और वैश्विक कूटनीति जैसे मुद्दों ने द्विपक्षीय संबंधों को ओर अधिक जटिल बना दिया है। फिर भी, दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावना वर्तमान स्थिति बनी हुई है, क्योंकि एशिया और विश्व की स्थिरता के लिए इन दो शक्तियों का समन्वय आवश्यक हो गया है।