Climate Change, जलवायु परिवर्तन: कितनी तेजी से बढ़ रहा पृथ्वी का तापमान? 2050 तक 1.5 से 2 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना !
दोस्तों, धरती का तापमान बढ़ने का मुख्य कारण मानव गतिविधियों द्वारा उत्पन्न ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता उत्सर्जन है। इस प्रक्रिया को हम वैश्विक तापन (Global Warming) के नाम से भी जानते हैं और इसके कारण ही जलवायु परिवर्तन (Climate Change) हो रहा है। लगातार बढ़ते तापमान के पीछे बहुत से कारण हैं, जिनका प्रभाव पर्यावरण पर हर तरह से पड़ता है। इसका प्रभाव पारिस्थितिकी तंत्र, मानव जीवन और पृथ्वी के विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों पर देखने को मिल रहा है। आइए, इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं:-
1. Climate Change पर ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता प्रभाव:
धरती का तापमान बढ़ने का सबसे मुख्य कारण ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता उत्सर्जन है, जैसे: मीथेन (CH₄), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) और जलवाष्प (H₂O) आदि हैं। ये गैसें सूरज की ऊर्जा को अवशोषित कर लेती हैं और उसे पृथ्वी की सतह के पर ही एकत्रित करके रखती हैं, जिस कारण तापमान बढ़ता है। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में ग्रीनहाउस प्रभाव कहा जाता है।
- कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂): यह सबसे प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों में से एक है, जो जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला, तेल और गैस आदि के जलने से उत्पन्न होती है। इसके अलावा, वनस्पति पेड़ों आदि क्षेत्रों की अंधाधुंध कटाई से भी CO₂ का स्तर बढ़ता जा रहा है, क्योंकि पेड़- पौधे सांस के रूप में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं।
- मीथेन (CH₄): यह गैस कृषि और विशेष रूप से पशुओं से उत्सर्जित होती है और खाद्य उत्पादन के अन्य बहुत से तरीकों से भी निकलती है। विज्ञान की भाषा में कहें तो मीथेन का प्रभाव CO₂ से कई गुना ज्यादा होता है।
- नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O): यह गैस कृषि गतिविधियों, जैसे रासायनिक उर्वरकों एवं खाद्द के उपयोग से उत्पन्न होती है। यह भी शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसों में से एक है।
2. बढ़ती मानव गतिविधियाँ और बढ़ता औद्योगिकीकरण का Climate Change पर प्रभाव:
औद्योगिकीकरण के तेज गति से बढ़ने से वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी तेजी से बढ़ रहा है। वाहनों, कारखानों और विद्युत संयंत्रों द्वारा बड़ी मात्रा में CO₂ गैस और अन्य प्रदूषक गैसों का उत्सर्जन होता है। इसके अतिरिक्त, शहरीकरण और कृषि भूमि के विस्तार के कारण भी वनों की कटाई कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण को कम कर रही है, जिससे वातावरण में इन गैसों का स्तर तेजी से बढ़ रहा है।
3. वनों की कटाई का बढ़ता स्तर भी Climate change में है कारगर (Deforestation):
दोस्तों, वनों की अंधाधुंध कटाई भी एक अन्य महत्वपूर्ण कारण है जिसके कारण धरती के तापमान में वृद्धि हो रही है। पेड़ और वनस्पतियाँ कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करती हैं और ऑक्सीजन छोड़ती हैं, जिससे वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कम होता है। लेकिन जब पेड़ों को लगातार काटा जाता है, तो ये गैसें वातावरण में बढ़ने लगती हैं और लगातार ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देती हैं।
4. कृषि और पशुपालन में बढ़ती खामियाँ:
कृषि और पशुपालन के कारण भी बहुत अधिक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। मवेशी, खासकर तौर पर गाय, मीथेन गैस का उत्सर्जन करती हैं, जो कि CO₂ से भी बहुत ज्यादा प्रभावी ग्रीनहाउस गैस है। इसके साथ ही रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग नाइट्रस ऑक्साइड के बढ़ते उत्सर्जन का कारण बनता है। कृषि भूमि की तैयारी और सिंचाई की बदलती प्रक्रियाएं भी वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों का स्तर बढ़ाने में काफी हद तक योगदान करती हैं।
5. कोयला एवं तेल आधारित ऊर्जा का उपयोग:
वर्तमान में अधिकतम ऊर्जा का उत्पादन कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों से किया जाता है। इन ईंधनों के जलने से CO₂ का उत्सर्जन काफी अधिक मात्रा में होता है, जिससे वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ने लगती है। हालांकि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के रूप में जैसे सौर, पवन और जल ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं, लेकिन वर्तमान समय में जीवाश्म ईंधन ही ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है।
6. वाहन और परिवहन से बढ़ता प्रदूषण:
दुनिया भर में बढ़ते वाहन और परिवहन के साधन और उनसे निकालने वाली प्रदूषित गैसें भी वातावरण में प्रदूषण फैलाने का एक प्रमुख कारण हैं। इनसे निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य प्रदूषक गैसें धरती के तापमान को लगातार बढ़ा रही हैं। विशेष रूप से लगातार बढ़ती शहरी आबादी और बढ़ते ट्रैफिक ने इस समस्या को और भी गंभीर स्थिति में खड़ा कर दिया है।
7. जलवायु परिवर्तन के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव:
वर्तमान समय में बढ़ता तापमान, पृथ्वी के विभिन्न भागों में बढ़ते जलवायु परिवर्तन का कारण बन रहा है। उच्च तापमान के कारण ग्लेशियरों का पिघलना, समुद्र स्तर का बढ़ना, मौसम के पैटर्न में बदलाव, और अधिक चरम मौसम घटनाओं (जैसे गर्मी की लहरें, तूफान, बर्फबारी) के जोखिम में लगातार वृद्धि हो रही है। समुद्र का स्तर बढ़ने से निचले तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है और बढ़ते जलवायु परिवर्तन के कारण कई प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर आ खड़ी हुई हैं।
8. बढ़ता वायुमंडलीय प्रदूषण:
वायुमंडलीय प्रदूषण, जैसे धुंआ, धूल और रसायनिक पदार्थ, सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करने में मदद करते हैं, जिससे वातावरण में गर्मी की मात्रा बढ़ती है। इससे तापमान में वृद्धि होती जाती है और जलवायु प्रणाली पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
9. बढ़ते प्राकृतिक कारण:
हालांकि मानव गतिविधियाँ ही जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण हैं लेकिन कुछ प्राकृतिक कारण भी धरती के तापमान में बढ़ोत्तरी का कारण बनते हैं। जैसे:- ज्वालामुखी विस्फोट, सौर गतिविधियाँ और प्राकृतिक जलवायु परिवर्तन (एल नीनो और ला नीना) भी तापमान में परिवर्तन ला सकते हैं। हालांकि, इनका प्रभाव मानव जनित उत्सर्जन के मुकाबले काफी कम होता है, लेकिन ये अस्थायी रूप से जलवायु को प्रभावित कर रहे हैं।
10. निवारण :
धरती का तापमान बढ़ने के कारणों को समझने से स्पष्ट होता है कि यह एक कठोर प्रक्रिया है, जिसमें मानव गतिविधियाँ मुख्य भूमिका निभा रही हैं। ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन, औद्योगिकीकरण, वन संरक्षण की कमी और कृषि-पशुपालन की प्रक्रियाएँ इन सभी कारकों के परिणामस्वरूप पृथ्वी का तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। यदि जल्द से जल्द इन समस्याओं का समाधान नहीं निकाला गया, तो इसके दुष्परिणाम हमारे पर्यावरण, समाज, और जीवनशैली पर गंभीर रूप से पड़ेंगे।
इसलिए, हम सभी को एक साथ मिलकर ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए समुचित कदम उठाने होंगे जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग, वनस्पतियों का संरक्षण और स्थायी कृषि पद्धतियाँ अपनाना आदि शामिल हैं। केवल वैश्विक स्तर पर जागरूकता और कार्रवाई से हम इस संकट से उबर सकते हैं।
धरती का तापमान बढ़ना एक गंभीर समस्या है, जिसके लिए मानव गतिविधियाँ जिम्मेदार हैं। ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता उत्सर्जन जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण है। वनों की कटाई, औद्योगिकीकरण और कृषि गतिविधियाँ इस समस्या को और बढ़ा रही हैं। हमें अपने आदतों में बदलाव लाना होगा और प्रकृति के संरक्षण पर ध्यान देना होगा। क्या ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए और क्या उपाय किए जा सकते हैं?
इसपर मै बहुत जल्द एक लेख प्रस्तुत करूंगा शायद आप उससे संतुष्ट हो जाएँ।