जीएसटी दर में हुआ संशोधन, अब होंगी 2-स्लैब। किसे लाभ और किसे हानि। जाने विस्तार से। Always Right or Wrong.
जीएसटी स्लैब में हुआ सरलीकरण, अब होंगी दो-स्लैब:-
- अब तक जीएसटी में 4 स्लैब 5%, 12%, 18% और 28% हुआ करती थी।
- प्रस्तावित नए स्लैब में केवल 5% और 18% (सिर्फ़ कुछ “sin goods”/लक्ज़री वस्तुओं पर उच्च दर में एक विशेष स्लैब दी गयी है) ही है।
- विशेष “sin goods” जैसे तंबाकू और अन्य धूम्रपान आदि के लिए 40% की अलग से दर प्रस्तावित की गयी है, जो उच्च मूल्य और नापसंद की वस्तुओं पर सरकार द्वारा लागू की गयी है।
इन स्लैब्स से कौन से उत्पाद सस्ते होंगे:-
- छोटे कार, एयर कंडीशनर, टेलीविजन, एलिवेटर, बीमा प्रीमियम आदि जैसे रोज़मर्रा के बहुत से उपभोक्ता और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर कर दर काफी हद तक घटाई जा रही है।
- लगभग 99% के अंतर्गत आने वाली वस्तुएँ जो अब 12% पर हैं, उन्हें 5% में स्थानांतरित किया गया है, वहीं 90 से 99% वस्तुएँ जो 28% पर हैं, उन्हें 18% में ले जाया गया है।
इसके आर्थिक प्रभाव और लाभ पर एक नजर:-
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- कर दरों में कटौती से सामान्य उत्पाद तेजी से सस्ते होंगे, जिससे उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति भी बढ़ेगी। यह छोटे उद्योगों, MSMEs और उपभोक्ताओं को राहत देने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधि को भी उसी प्रकार बढ़ावा देगा। उपभोक्ता मांग लगभग 60% देश की GDP को अच्छे से बनाती है; कर में कटौती से यह और भी बढ़ सकती है। मार्केट में सकारात्मक रुझान — Nifty 50, Sensex में वृद्धि और शेयर बाजार में शानदार सेंटिमेंट देखा गया।
- प्रारंभ में राजस्व में गिरावट हो सकती है, अनुमानित रूप से $20 बिलियन तक का नुक़सान देखने को मिला। Emkay Research के अनुसार यह पुल–प्रावधिक घाटा लगभग 0.2% तक बढ़ सकता है, लेकिन दीर्घकालीन वृद्धि इसे पूरक रूप प्रदान करेगी। S&P Global और अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय के साथ समग्र राजस्व स्थिर ही रहेगा, क्योंकि सरल प्रणाली और बेहतर अनुपालन से राजस्व धाराएँ भी सुधरेंगी। Morgan Stanley और Citi Research के अनुसार ये सुधार GDP में 0.5 से 0.8% तक की वृद्धि (उपभोक्ता घरेलू हिस्से की बढ़ोतरी के रूप में) उत्पन्न कर सकते हैं।
- काटी गई जीएसटी दरें खुदरा महँगाई को 50 से 60 बेसिस प्वॉइंट तक भी कम कर सकती हैं, विशेषकर खाद्य एवं पेय पदार्थों में मुख्य रूप से लागू है। सीधे तौर पर कर कटौती और विशेष “sin goods” पर उच्च कर दर राजस्व शून्य करने में भी मदद करेगी। इससे RBI को ब्याज दरों को और घटाने में भी मदद मिल सकती है, RBI के टर्मिनल रेट को 5 से 5.25% के रेंज तक संभव समझा जा रहा है।
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जीएसटी के प्रशासनिक सुधार और प्रक्रिया की पारदर्शिता:-
- GST 2.0 का मुख्य उद्देश्य सिर्फ़ दरों को संशोधित करना मात्र ही नहीं, बल्कि आकलन, वर्गीकरण, इनपुट टैक्स क्रेडिट और अनुपालन में आई ऐतिहासिक जटिलताओं को दूर करना भी इसका मुख्य उद्देश्य है।
- रिटर्न फाइलिंग, तकनीकी रजिस्ट्रेशन, डिस्प्यूट समाधान और टैक्स दरों में स्थिरता सुनिश्चित करना भी इसका मुख्य उद्देश्य होगा।
- केंद्र सरकार ने राज्यों से यह भी कहा है कि वे इन सुधारों को दिवाली तक लागू करने में हर प्रकार से सहयोग करें, ताकि जनता को इसका लाभ त्योहार से पहले ही मिल सके।
GST को लेकर राज्यों की चिंताएँ और सहयोग:-
- देश के कई राज्यों ने राजस्व में संभावित नुकसान की चिंताएँ व्यक्त की हैं, खासकर उनकी जीएसटी हिस्सेदारी में गिरावट देखने को मिल सकती है।
- केंद्र ने GST Council और राज्यों के साथ एक मंच पर चर्चा जारी रखी है और राज्यों से यह अनुरोध किया है कि वे पूर्ण सहयोग करें ताकि दिवाली 2025 तक नई प्रणाली को सही प्रकार लागू किया जाए।
- दिल्ली विधानसभा ने भी राज्य स्तर पर जीएसटी संशोधन बिल को लागू कर दिया है, जिससे प्रशासनिक सुधार, टैक्स अनुपालन और राजस्व वृद्धि की दिशा में कार्य हुआ है।
इसका निष्कर्ष: एक नजर में
केंद्र सरकार की प्रस्तावित जीएसटी सुधार पहलों का मुख्य उद्देश्य सरलता, उपभोक्ता राहत, उच्च आर्थिक गतिविधि और दीर्घकालीन राजस्व स्थिरता को बढ़ावा देना भी सरकार का मुख्य उद्देश्य है। अगर राज्यों का केंद्र के साथ पूर्ण सहयोग रहता है और सुधार उचित रूप से लागू किया जाता है, तो यह कदम भारत की अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा प्रदान कर सकता है।