अब दिल्ली एनसीआर में खत्म होगा आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश 2025 पर दिल्ली में MCD बना रहा प्लान; जो काम में बाधा डालेगा उसपर होगी कार्यवाही। जाने विस्तार से। Always Right or Wrong.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा अपने आदेश में?
- यह आदेश 11–12 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किया गया था, जब कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे, खासकर डॉग बाइट्स और रेबीज को देखते हुए सीधे हस्तक्षेप करने का फैसला किया।
- SC का मुख्य निर्देश:
- सभी आवारा कुत्तों को तुरंत सड़कों से उठाया जाए और उन्हें शेल्टर होम्स में स्थानांतरित किया जाए; चाहे वे नसबंदी किए गए हों या नहीं किए गए हों और उन्हें किसी भी परिस्थिति में सड़क पर वापसी नहीं करने दी जाए।
- पूरा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र यानी दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाज़ियाबाद व आसपास इसमें शामिल है।
- 8 सप्ताह में कम से कम 5,000–6,000 कुत्तों की क्षमता वाले शेल्टर तैयार किए जाने चाहिए। जिनमें नसबंदी, टीकाकरण, देखभाल की व्यवस्थाएं और CCTV की अच्छे से निगरानी हो।
- हेल्पलाइन भी स्थापित होनी चाहिए जो डॉग बाइट की सूचना पर 4 घंटों में अपनी प्रतिक्रिया दे तथा संबंधित कुत्तों को जल्द-से-जल्द उठाए।
- कोर्ट ने तत्काल रिपोर्ट मांगने के बाद कहा कि क्या व्यवस्थाएँ बन रही हैं और आगे की सुनवाई में इसकी समीक्षा की जाएगी।
- यदि देश में कोई व्यक्ति या संगठन इस प्रक्रिया में अपनी बाधा डाले, तो कानूनी कार्रवाई, सहित अवमानना (Contempt) की चेतावनी भी दी गई है।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया: पर एक नजर
- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मामले में कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या एक महासंकट बन चुकी है और सरकार शीघ्र ही अदालत के निर्देशानुसार अपनी एक नीति बनाएगी।
- दिल्ली महापौर और RWAs ने आदेश का जोरदार तरीके से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लोग लंबे समय से बहुत परेशान हैं और उन्हें अब राहत मिलेगी।
- हालांकि, प्रशासनिक चुनौतियाँ भी स्पष्ट रूप से दिख रही हैं—जैसे, गुड़गांव (गुरुग्राम) में सिर्फ 100 कुत्तों के लिए ही शेल्टर क्षमता है जबकि अनुमान है कि वहाँ 50,000 से भी ज्यादा आवारा कुत्ते हैं।
विरोध की उठती आवाजें और आलोचना:-
- PETA इंडिया, FIAPO और अन्य जनहित समूहों ने आदेश को अव्यवहार्य, “अतर्कपूर्ण और अवैध रूप में बताया, क्योंकि यह वर्ष 2023 की ABC (Animal Birth Control) नियमावली—जो नसबंदी, टीकाकरण और लौटाव पर मुख्य रूप से आधारित है—को दरकिनार कर रहा है।
- सेलिब्रिटीज जैसे जाह्नवी कपूर, वरुण धवन, विर दास, चिन्मयी आदि ने इसे डॉग्स के लिए डेथ वॉरेंट नाम दिया और कोमलता की कमी भी बताया।
- समाचार-संपादकीय; जैसे Economic Times ने इसे मानव-केंद्रित अतिशयवाद यानि anthropocentrism करार दिया और कहा कि यह साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ABC नियमों को पुनः पुष्टि करने वाले फैसले और सरकार की नीति के विपरीत करार दिया है।
- आलोचनात्मक विद्वानों का यह भी मानना है कि जब तक कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी व्यापक रूप से नहीं की जाएगी, निर्देशों का अनुपालन सार्वजनिक स्वास्थ्य पर विपरीत रूप से असर डाल सकता है।
इसमें कानूनी और व्यावहारिक चुनौतियाँ: एक नजर में
इसका मुद्दा | पूर्ण विवरण |
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ABC नियमों का उल्लंघन क्यों | वर्ष 2023 के नियम के अनुसार, शेल्टर के बजाय नसबंदी व टीकाकरण के बाद वापस कुत्तों को छोड़ दिये जाते थे, लेकिन अब कोर्ट ने उसे Absurd कहा है। |
शेल्टर इन्फ्रास्ट्रक्चर की बड़ी कमी | विशेष रूप से देखा जाए तो गुरुग्राम जैसे इलाकों में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। |
विपरीत नीति प्रभाव का असर | जब तक नसबंदी या टीकाकरण नहीं होगा, सड़कों से हटने से रोग नियंत्रण मुश्किल ही होगा। |
मानव कल्याण vs पशु अधिकार का टकराव देखने को मिलेगा | सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन तेजी से बिगड़ता दिख रहा है और संवेदनशीलता का सवाल तेजी से उठा है। |
वित्तीय बोझ बढ़ेगा | शेल्टर निर्माण, संचालन और स्टाफिंग बहुत ज्यादा महंगा होगा—मेनका गांधी ने अनुमानित लागत ₹15,000 करोड़ से अधिक बताई है। |
इसका निष्कर्ष: एक ऐतिहासिक लेकिन विवादास्पद आदेश माना जाएगा
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश देखा जाए तो बिना किसी दिलचस्पी या संवेदना के जल्द कार्रवाई की बात इसमें कही गई है जो देश के बाहर भी चर्चा का गंभीर विषय बन चुका है। यह नियम एक ऐसे समय में आया है जब रेबीज़ व कुत्तों से जूझ रहे परिवारों की संवेदनशीलता उच्चतम सीमा पर दिख रही है, लेकिन इसे लागू करने में व्यावहारिकता, वैधता और सहिष्णुता के बीच गहरी टकराहट देखने को मिल रही है।
- सरकार की तरफ से इसे लंबित संसाधनों की कमी मात्र कहा गया है और उचित नीति की आवश्यकता पर भी जोर देने की बात कही गई है।
- विपक्षी वर्ग अपनी पैनी अपील करता दिख रहा है कि ऐसा आदेश बिना वैज्ञानिक, मानवतावादी और वित्तीय दृष्टिकोणों को ध्यान में रखे देने से समस्या और भी अधिक बढ़ सकती है।
इसे लागू किस प्रकार किया जाए; NCR में ओर भी शेल्टर बनाए जा सकते हैं, पशुओं और मनुष्यों दोनों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए, यह भी देखना अनिवार्य है और कानून व नीति के बीच कहाँ संतुलन बिठाया जाए, यह भी जरूरी है। यह अगली सुनवाई और सरकार व न्यायपालिका की रणनीति से तय होने की उम्मीद की जा रही है।