2025 में अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर का भारत को हो रहा लाभ, भारत का अमेरिका को निर्यात और चीन के साथ आयात में हुई बढ़ोत्तरी। Always Right or Wrong.
भारत का अमेरिका को निर्यात बढ़ा और चीन के साथ आयात बढ़ा:-
भारत की वैश्विक व्यापार नीति में अमेरिका और चीन दो सबसे महत्वपूर्ण देश बन चुके हैं। एक ओर जहां अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात साझेदार बन गया है, तो वहीं दूसरी ओर चीन भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना गया है। हाल के वर्षों में भारत का अमेरिका को निर्यात और चीन से आयात दोनों में काफी बड़ी संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। भारत के लिए यह व्यापारिक बढ़ोतरी केवल आर्थिक आँकड़ों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक, तकनीकी और वैश्विक रणनीतियों से भी बहुत गहराई से जुड़ी हुई है।
भारत द्वारा अमेरिका को निर्यात में विशेष वृद्धि:-
1. भारत के तकनीकी और सेवा क्षेत्र में तेज मजबूती:
भारत ने व्यापारिक क्षेत्र में IT, सॉफ्टवेयर, BPO और इंजीनियरिंग सेवाओं में विश्वस्तर पर अपनी पहचान को दिखा दिया है। अमेरिका वर्तमान में इन सभी सेवाओं का सबसे बड़ा ग्राहक बना हुआ है। अमेरिका की TCS, Infosys, Wipro जैसी कंपनियाँ भारत के साथ बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स पर काम करती हैं, जिससे निर्यात में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।
2. भारत से वस्तुओं का अमेरिका को निर्यात:
भारत अमेरिका को रत्न-आभूषण, दवाइयाँ, मशीनरी, जैविक रसायन, वस्त्र, कृषि उत्पाद; जैसे बासमती चावल और मसाले आदि और पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ी मात्रा में एक्सपोर्ट करता है। मुख्य रूप से दवाओं और फार्मास्यूटिकल्स में भारत की गुणवत्ता और कम लागत अमेरिका के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
3. भारत के आमेरका के साथ व्यापार समझौते और सहयोग:
भारत-अमेरिका के बीच बेहतर कूटनीतिक संबंधों ने व्यापार को बड़े स्तर तक बढ़ा दिया है। अमेरिका की Generalized System of Preferences यानि GSP की समाप्ति के बावजूद भी भारत ने व्यापार के नए रास्ते तलाशे और प्रतिस्पर्धी मूल्य पर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की आपूर्ति भी की। QUAD देशों और IPEF जैसे मंचों के माध्यम से भी दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिला है।
भारत की चीन के साथ आयात में हुई वृद्धि:-
1. भारत की इलेक्ट्रॉनिक और मशीनरी की निर्भरता:-
भारत आज भी मोबाइल फोन, लैपटॉप, सोलर पैनल, टेलीकॉम उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक घटकों आदि के लिए बड़ी मात्रा में चीन पर निर्भर बना हुआ है। भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अभी भी कुछ महत्वपूर्ण वस्तुएँ चीन से हमारे देश में आती हैं, जिससे आयात को बढ़ावा मिलता है।
2. भारत में कच्चा माल और औद्योगिक उत्पाद की मांग:-
भारत के उद्योगों के लिए जरूरी कच्चा माल, जो केमिकल्स, प्लास्टिक, आयरन उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक घटक आदि के लिए चीन से सस्ते और बड़ी मात्रा में आते हैं। चीन की इकोनॉमी ऑफ स्केल जो बड़े पैमाने पर उत्पादन करती है उसके कारण उनके उत्पादों की कीमत भारत के अन्य आपूर्तिकर्ताओं से काफी कम पड़ती है।
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भारत के आँकड़ों की दृष्टि से देखा जाये तो:-
- वर्ष 2023-24 में भारत का अमेरिका को निर्यात किया गया सामान लगभग 78 अरब डॉलर के आसपास था, जो भारत के कुल निर्यात का लगभग 17% होता है।
- वहीं चीन के साथ भारत का आयात करीब 101 अरब डॉलर का रहा था, जो कुल आयात का लगभग 14% होता है।
अर्थात यह तो स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात मार्ग बन चुका है, जबकि चीन भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना हुआ है।
तीनों देशों के व्यापार में भविष्य की दिशा पर एक नजर:-
- भारत को अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते यानि FTA की दिशा में ओर तेजी से काम करने की आवश्यकता होगी जिससे अमेरिका के साथ ओर अधिक निर्यात हो सके।
- भारत को चीन के साथ आयात पर वैकल्पिक आपूर्ति शृंखलाएँ को ओर अच्छे से विकसित करना होगा, मुख्यतः दक्षिण कोरिया, वियतनाम, जापान जैसे देशों से भी अधिक।
- भारत को स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को अधिक बढ़ावा देने के लिए रिसर्च और इनोवेशन में भी बड़ी में निवेश करने की आवश्यकता है।
- भारत की फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को ओर अधिक मजबूत करने की अत्यंत आवश्यक भी है।
इसका निष्कर्ष:-
भारत का अमेरिका को निर्यात करना और चीन से आयात का ज्यादा-से-ज्यादा बढ़ना, दो अलग-अलग आर्थिक परिस्थितियों को दिखाते हैं। अमेरिका भारत के लिए संभावनाओं से भरा हुआ एक बड़ा बाजार बन गया है, जबकि चीन आज भी एक अपरिहार्य आपूर्ति केंद्र बना हुआ है। भारत को अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए इन दोनों महाशक्तियों के साथ अच्छा संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता होगी। भारत द्वारा निर्यात को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे घटाना भी आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक विशेष कदम माना जाएगा।