पहलगाम आतंकी हमला : Pahalgam Terror Attack: आतंकी हमले में घायलों का मुफ्त इलाज कराएंगे मुकेश अंबानी, 26 लोगों की हत्या की आतंकवादियों ने । सरकार किस प्रकार लेगी बदला? जाने विस्तार से।
पहलगाम आतंकी हमला: जाने विस्तार से।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में 22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान की ओर से आए आतंकियों ने एक भीषण आतंकी हमला किया, जिसमें कम से कम 27 पर्यटकों की हत्या कर दी गई और 12 से ज्यादा घायल हो गए । यह हमला बाइसारन नामक प्रसिद्ध एक घास के मैदान पर हुआ, जो अमरनाथ यात्रा के लिए जाने वाले पर्यटकों के लिए एक बहुत ही सुंदर स्थान माना जाता है।
पहलगाम आतंकी हमले का सम्पूर्ण विवरण:-
पुलिस के भेष में आए चार सशस्त्र आतंकियों ने पर्यटकों के एक समूह पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जो पिछले कई वर्षों में कश्मीर में नागरिकों पर सबसे घातक हमला माना जा रहा है। मारे गए सभी पर्यटक भारतीय थे, जबकि एक नेपाली से था।
पहलगाम आतंकी हमले का कौन जिम्मेदार और किसकी संलिप्तता:-
हालांकि शुरुआत में किसी भी आतंकी समूह ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन कुछ समय के बाद ‘कश्मीर रेजिस्टेंस’ नामक एक आतंकी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली। कश्मीर रेजिस्टेंस नमक समूह पिछले कुछ समय से कश्मीर में बाहरी लोगों की बसावट के खिलाफ विरोध करता रहा है।
इस हमले के बाद सरकार की प्रतिक्रिया क्या है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और आतंकियों को सख्त से सख्त सजा देने का आश्वासन भी दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हमलावरों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। भारतीय सुरक्षा बलों ने कश्मीर के पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है, जिसमें चेकपॉइंट्स और वाहनों की जांच भी की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया क्या रही?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जो इस समय भारत की यात्रा पर हैं, उन्होने इस हमले की निंदा की और उन्होने भारतीय लोगों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इस आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की।
पहलगाम आतंकी हमले का पर्यटन पर कितना प्रभाव:-
इस हमले के बाद कश्मीर में पर्यटन पर गंभीर असर देखने को मिल रहा है। देश के अलग अलग क्षेत्रों से कई पर्यटकों ने अपनी यात्राएं रद्द कर दी हैं और विशेष रूप से महाराष्ट्र और गुजरात से आने वाले पर्यटकों में डर का माहौल बना हुआ है।
इस आतंकवादी घटना ने कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति और आतंकवाद के खतरे को एक बार फिर से उजागर किया है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बहुत बड़ी चुनौती है कि वे इस तरह के हमलों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं और क्षेत्र में शांति को फिर से बहाल करें।
जम्मू और कश्मीर भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है और सबसे उत्तर का राज्य है। जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और जटिल राजनीतिक परिदृश्य के लिए हमेशा जाना गया है। वर्तमान की एनडीए सरकार ने 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू और कश्मीर को एक पूर्ण राज्य से विभाजित कर दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के रूप में पुनर्गठित किया था। यह क्षेत्र ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण भी है।
1. जम्मू और कश्मीर की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक सौंदर्य:-
जम्मू और कश्मीर की सीमाएं उत्तर में लद्दाख और हिमाचल प्रदेश से मिलती हैं, पश्चिम में पाकिस्तान द्वारा कब्जा किए हुए कश्मीर (पीओके) और उत्तर में चीन के कब्जे वाले क्षेत्र (अक्साई चिन) से लगी हुई है। यह क्षेत्र मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया गया है:
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जम्मू: जो एक हिंदू बहुल क्षेत्र है जहां वैष्णो देवी मंदिर जैसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हैं।
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कश्मीर घाटी: यह एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है और डल झील, गुलमर्ग, पहलगाम, और सोनमर्ग जैसे स्थानों की वजह से इसे धरती का स्वर्ग भी कहा जाता है।
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लद्दाख: जो वर्तमान में एक केंद्र शासित प्रदेश है। यह क्षेत्र बौद्ध संस्कृति और अद्वितीय हिमालयी भू-दृश्य के लिए भी प्रसिद्ध है।
2. इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर एक नजर:-
जम्मू और कश्मीर रियासत का भारत में विलय 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय हुआ था। महाराजा हरि सिंह ने पाकिस्तान समर्थित कबायलियों के आक्रमण के बाद, भारत से मदद मांगी थी। राजा हरी सिंह जो उस समय इस रियासत के राजा थे, उन्होने भारत में शामिल होने के लिए विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए। भारत में विलय के बाद से ही पाकिस्तान और भारत के बीच यह क्षेत्र विवाद का केंद्र बना हुआ है।
1947, 1965 और 1999 का कारगिल युद्ध जिसमें भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। इसके अलावा, सीमा पर बार-बार संघर्ष विराम उल्लंघन और आतंकी घटनाएं आमतौर पर होती रहती हैं।
3. अनुच्छेद 370 और 35A के बारे में:-
अनुच्छेद 370 जो आजादी के बाद नेहरू सरकार में वहाँ की जनता को खुश करने के लिए ही जम्मू और कश्मीर को भारत में एक विशेष दर्जा प्रदान करता था। यह प्रावधान राज्य को अपनी अलग संविधान, झंडा और कानून बनाने की शक्ति प्रदान करता था। अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने इस अनुच्छेद को समाप्त कर दिया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया जिससे जम्मू और कश्मीर में बढ़ते अलगाववाद की जड़ों को कमजोर किया जा सके।
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जम्मू और कश्मीर जिसे विधानसभा प्रदान की गयी।
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लद्दाख जिसे बिना विधानसभा के घोषित किया गया।
4. जम्मू और कश्मीर में आतंकी घटनाएं और वहाँ की सुरक्षा स्थिति
कश्मीर आजादी के बाद से ही आतंकवाद से प्रभावित है। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों जैसे जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा द्वारा यहां हिंसा फैलाने की कोशिशें आजादी के बाद से ही की जा रही हैं।
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पुलवामा हमला (2019): इस आत्मघाती हमले में 40 से अधिक सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे। जिसका दर्द देश आजतक नहीं भुला है।
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पहलगाम हमला (2025): हाल ही में हुए इस हमले में 27 पर्यटकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई जो देश को फिर से पुलवामा हमले की याद दिलाता है और पुलवामा के बाद यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है।
इन हमलों से एक बात को स्पष्ट हो जाती है कि क्षेत्र की अब भी सुरक्षा की स्थिति गंभीर है।
5. जम्मू-कश्मीर की सामाजिक और धार्मिक विविधता:-
जम्मू और कश्मीर विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का एक संगम है:
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जम्मू: मुख्यतः हिंदू बहुल आबादी वाला क्षेत्र है।
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कश्मीर: मुस्लिम बहुल आबादी वाला क्षेत्र है।
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लद्दाख: बौद्ध धर्म की प्रमुखता वाला क्षेत्र है।
यह विविधता ही इस क्षेत्र को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाती है, लेकिन राजनीतिक और धार्मिक मतभेद भी समय-समय पर देखने को मिलते हैं।
6. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की पर्यटन और अर्थव्यवस्था:-
कश्मीर घाटी को भारत का सबसे सुंदर स्थान साथ ही पर्यटन स्थल भी माना जाता है। यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य पर्यटन पर आधारित है:
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पर्यटन: डल झील, गुलमर्ग, सोनमर्ग, वैष्णो देवी आदि आकर्षण के प्रमुख केंद्र हैं।
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कृषि और बागवानी: सेब, केसर, अखरोट, और बादाम की खेती यहाँ सबसे ज्यादा होती है।
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हस्तशिल्प: पश्मीना, कालीन, लकड़ी की कारीगरी यहाँ रोजगार का प्रमुख स्रोत है।
हालांकि आतंकी घटनाएं और राजनीतिक अस्थिरता के कारण पर्यटन उद्योग को बार-बार झटका लगता रहता है।
7. इस क्षेत्र में केंद्र सरकार की प्रमुख पहलें:-
2019 के बाद केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में विकास के लिए बहुत सी योजनाएं शुरू की हैं:
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इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: नए राजमार्ग, रेलवे कनेक्टिविटी, स्मार्ट सिटी परियोजनाएं आदि ने इस क्षेत्र का बहुत तेजी से विकास किया है।
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शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश से इस क्षेत्र के लोगो में सोचने का नजरिया बदला है।
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युवा सशक्तिकरण: स्किल डिवेलपमेंट और स्टार्टअप योजनाएं से यहाँ के लोगों अपने रोजगार को बढ़ाने के लिए आगे आए हैं।
हालांकि, स्थानीय लोगों का एक वर्ग इतने विकास के बाद भी सरकार की नीतियों को अपने अधिकारों का हनन मानता है।
8. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के भविष्य की राह:-
जम्मू और कश्मीर का भविष्य भी इस बात पर निर्भर करता है कि इस क्षेत्र में:
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शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखी जाए, जिससे पुलवामा और पहलगाव जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
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स्थानीय लोगों को भरोसे में लिया जाना चाहिए और उन्हे भरोसा दिलाना चाहिए कि उनके क्षेत्र का विकास हो रहा है।
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राजनीतिक संवाद और पारदर्शिता बढ़ाई जानी चाहिए साथ ही लोगों में जागरूकता बढ़नी चाहिए।
आतंकवाद के उन्मूलन के साथ-साथ ही स्थानीय लोगों की भावनाओं का भी सम्मान किया जाना जरूरी है।