अमेरिका का बंकर-बस्टर

अमेरिका का बंकर-बस्टर बम क्या है? जिसका वज़न 13,000 किलोग्राम है और जिस बम से ईरान पर हमला हुआ।

अमेरिका का बंकर-बस्टर बम और ईरान पर हमला: 

प्रस्तावना: एक नजर-

हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान पर संभावित बंकर-बस्टर बम से हमले करने की खबरें वैश्विक जगत में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। यह केवल अमेरिका-ईरान संबंधों में बढ़ते तनाव का एक प्रकार है, साथ ही यह आधुनिक युद्ध तकनीकों में भी एक नई परत को जोड़ता है।

अमेरिका का बंकर-बस्टर बम

1. क्या होता है बंकर-बस्टर बम?

बंकर-बस्टर बम एक विशेष प्रकार का  भारी-भरकम बम होता है जिसे जमीन के भीतर छिपे हुए ठिकानों, सुरंगों, परमाणु संयंत्रों या अत्यधिक सुरक्षित भूमिगत बंकरों को नष्ट करने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

● इसकी मुख्य विशेषताएँ:

  • 60 मीटर की गहराई तक घुसने की क्षमता: बंकर-बस्टर बम में अत्यधिक मजबूती वाला एक नुकीला सिरा होता है जो विस्फोट से पहले ज़मीन या कंक्रीट में 60 मीटर तक घुस सकता है।
  • विलंबित से विस्फोट होने की प्रणाली का होना: यह तकनीक बम को फटने से पहले कुछ समय देती है जिससे वह गहराई में प्रवेश कर सके और उसके बाद अंदर विस्फोट कर सके।
  • इसकी प्रभावी विस्फोटक शक्ति का होना: इसमे उच्च क्षमता वाले विस्फोटक लगे होते हैं जो गहरे संरक्षित लक्ष्य को भी पूरी तरह ध्वस्त करने में सक्षम होने हैं।
अमेरिका का बंकर-बस्टर

2. अमेरिका के प्रमुख बंकर-बस्टर बम इस प्रकार हैं:-

GBU-28 (Guided Bomb Unit-28) बम:

  • वर्ष 1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान इस बम को विकसित किया गया था।
  • 5,000 पाउंड वजनी यह बम कंक्रीट वाली जमीन में 30 मीटर तक और मिट्टी में 100 मीटर तक घुसकर विस्फोट कर सकता है।

GBU-57A/B MOP (Massive Ordnance Penetrator) प्रकार का बम:

  • अमेरिका का यह बम दुनिया का सबसे शक्तिशाली बंकर-बस्टर बम है।
  • जिसका वजन लगभग 30,000 पाउंड है।
  • अमेरिका के इस बम को B-2 Stealth Bomber द्वारा गिराया जाता है।
  • अमेरिका का यह बम कंक्रीट में 60 मीटर तक घुस सकता है।
अमेरिका का बंकर-बस्टर

3. ईरान पर अमेरिका द्वारा किया गया हमला:- 

● अमेरिका पर राजनीतिक तनाव:

अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बना हुआ है। अमेरिका का 100 प्रतिशत दावा है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित कर रहा है और जल्द ही वह परमाणु हथियार बना लेगा, जबकि ईरान इसे शांतिपूर्ण ऊर्जा कार्यक्रम बताता चला आ रहा है।

ईरान की भूमिगत परमाणु साइटों पर एक नजर:- 

  • ईरान के नतांज़ और फोर्डो जैसे स्थल परमाणु कार्यक्रम के मुख्य केंद्र हैं, जिन्हें गहरी सुरंगों में ईरान द्वारा बनाया गया है ताकि उन्हें हवा से हमले में सुरक्षित बचाया जा सके।
  • अधिक गहराई के कारण इन स्थलों को नष्ट करने के लिए सामान्य बेअसर साबित होते हैं, इसीलिए बंकर-बस्टर की ही आवश्यकता पड़ती है।
अमेरिका का बंकर-बस्टर

4. अमेरिका के ईरान पर हमले के लक्ष्य:- 

  • ईरान का परमाणु संयंत्र की संवेदनशील यूरेनियम संवर्धन सुविधा।
  • सैन्य बंकर में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अंडरग्राउंड कमांड सेंटर को नष्ट करना।
  • ईरान के मिसाइल डिपो पर लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के ठिकाने होना।
अमेरिका का बंकर-बस्टर

5. इस हमले के रणनीतिक प्रभाव:- 

● इस हमले के बाद ईरान की प्रतिक्रिया:-

  • यदि सच में हमले की पुष्टि होती है, तो ईरान की प्रतिक्रिया अत्यंत तीव्र होगी, सीधा सैन्य जवाब देना, साइबर अटैक करना या क्षेत्रीय सहयोगियों के माध्यम से संघर्ष को ओर ज्यादा बढ़ावा देना शामिल होगा।

● इस हमले से मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ी:- 

  • मध्य-पूर्व में लेबनान, सीरिया, इराक और यमन में ईरान समर्थक गुट फिर से सक्रिय होंगे। वे अमेरिका या इज़राइल के सहयोगियों पर बड़ा हमला कर सकते हैं।
  • इससे भविष्य में इजरायल और सऊदी अरब जैसे देशों की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा बढ़ सकता है।

● ईरान द्वारा रोक लगाने से तेल आपूर्ति पर असर होगा:-

  • ईरान से लगी होरमुज की खाड़ी, जिससे विश्व का लगभग 20% तेल गुजरता है या आयात-निर्यात होता है, ईरान द्वारा बंद की जा सकती है, जिससे भविष्य में वैश्विक ऊर्जा संकट बहुत तेजी से उत्पन्न हो सकता है। महंगाई भी तेजी से बढ़ेगी जिस कारण गरीब देशों को अपनी जीविका चलाना बहुत कठिन हो जाएगा।
अमेरिका का बंकर-बस्टर

निष्कर्ष

बंकर-बस्टर एक तकनीकी हथियार नहीं है; यह आधुनिक भू-राजनीतिक टकराव का घातक उपकरण भी बन चुका है। ईरान जैसे शक्तिशाली देश, जो भूमिगत संरचनाओं में अपनी रक्षा व्यवस्था छिपने में सक्षम हैं, उनके लिए यह एक गंभीर चुनौती पेश करता है। अमेरिका द्वारा ऐसे हथियारों का प्रयोग करना न केवल सैन्य रणनीति है, बल्कि कूटनीतिक दबाव का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अमेरिका का बंकर-बस्टर

यदि यह हमला सच में हुआ है या भविष्य में फिर से होता है, तो यह न केवल ईरान-अमेरिका संबंधों को नया मोड़ पर ला देगा, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र की स्थिरता को भी पूरी तरह से हिला सकता है। ऐसे में देखा जाये तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सतर्कता, संवाद और संतुलन की ओर आगे बढ़ना होगा, अन्यथा एक buster के बाद पूरी दुनिया उसके कंपन को महसूस करेगी।

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