कुदरत का कहर: हर साल आकाशीय बिजली गिरने से लगभग 32 करोड़ पेड़ हो जाते हैं नष्ट। जाने विस्तार से……. Always Right or Wrong.
आकाशीय बिजली गिरने से हर साल दुनिया में नष्ट हो जाते हैं 32 करोड़ पेड़:-
आकाशीय बिजली गिरना एक प्राकृतिक घटना मात्र है, जिसे सामान्यतः हम आकाशीय बिजली या तड़ित भी कहते हैं। यह तब घटित होती है जब हमारे वायुमंडल में चार्ज का असंतुलन अत्यधिक मात्रा में बढ़ जाता है और वह संतुलन स्थापित करने के लिए ऊर्जा के रूप में धरती की ओर तेजी से प्रवाहित होती है। यह ऊर्जा अत्यंत तीव्र गति से होती है, जिसकी तापमान सूर्य की सतह से भी अधिक लगभग 30,000°C से भी ज्यादा होता है। हालांकि यह घटना क्षणिक समय के लिए होती है, परंतु इसके प्रभाव अत्यंत घातक और जानलेवा हो सकते हैं, विशेषकर वनस्पति जगत पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है।
आकाशीय बिजली गिरने की प्रक्रिया किस प्रकार होती है और पेड़ों पर इसका प्रभाव:-
आकाशीय बिजली गिरने की प्रक्रिया वायुमंडलीय विद्युतीय असंतुलन से जुड़ी हुई मानी जाती है, खासकर तब जब गरज-चमक वाले तूफानों के साथ तेज बारिश होती है। जब कोई आकाशीय बिजली धरती पर गिरती है, तो वह अपने रास्ते में आने वाले हर वस्तु; विशेषकर ऊंचे और आर्द्र पेड़ों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। पेड़ क्योंकि पृथ्वी से जुड़े हुए होते हैं और ऊंचाई में भी अधिक होते हैं, अतः वे अक्सर बिजली गिरने के लिए लक्ष्य का काम करते हैं।
lightning के समय अत्यधिक तापमान के कारण पेड़ का ऊतक भी (tissue) फट जाता है। कई बार देखा जाता है कि पेड़ के अंदर आग भी लग जाती है, जो धीरे-धीरे उसे पूरी तरह से जलाकर राख़ कर देती है। आकाशीय बिजली का प्रभाव जमीन के नीचे जड़ों तक पहुँच जाता है, जिससे पेड़ की वृद्धि और जीवन प्रणाली हमेशा के लिए रुक जाती है। आकाशीय बिजली गिरने से निकले कार्बन और जलवाष्प वायुमंडल में पहुँचकर ग्रीनहाउस प्रभाव को भी तेजी से बढ़ाने का प्रयास करते हैं।
अमेजन वर्षावन का एक बड़ा उदाहरण है:-
अमेजन रेनफॉरेस्ट यानि जिसे धरती के फेफड़े भी कहा जाता है, इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित होते रहते हैं। अमेज़न के पेड़ न केवल बहुत ऊंचे होते हैं बल्कि नम और घने भी बहुत ज्यादा होते हैं, जिससे वे बिजली गिरने के लिए प्राथमिक लक्ष्य का काम करते हैं।
साल 2018 में प्रकाशित एक शोध में दिखाया गया है कि अमेजन में हर वर्ष बिजली गिरने के कारण ही लगभग 2 से 5 करोड़ से भी कहीं ज्यादा पेड़ नष्ट हो जाते हैं। इन पेड़ों के नष्ट होने से न केवल जैव विविधता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है, बल्कि कार्बन अवशोषण की क्षमता में भी भारी गिरावट देखने को मिलती है।
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Lightning से मानव जीवन कितना प्रभावित होता है:-
देखा जाये तो बिजली गिरने से मानव मृत्यु की घटनाएं भी अकसर होती ही रहती हैं, लेकिन पेड़ों के माध्यम से इसका अप्रत्यक्ष असर सबसे अधिक होता है; जैसे: पेड़ों की छाया और नमी संरक्षण भूमिकाएं धीरे-धीरे समाप्त होती जाती हैं, जिसका कृषि पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। धरती पर पेड़ पर्यावरण को ठंडा रखने में मदद करते हैं। उनके अभाव में स्थानीय तापमान भी तेजी से बढ़ता है। धरती पर पेड़ जलचक्र को संतुलित बनाए रखते हैं, जिससे भूजल स्तर में भी स्थिरता आती है।
Lightning से बचाव के मुख्य उपाय और इसके समाधान पर एक नजर:-
Lightning की प्रक्रिया को कभी भी पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके प्रभाव को काफी हद तक सीमित किया जा सकता है:
- बड़े जंगलों में ऊंचे-ऊंचे स्थानों पर तड़ित चालक लगाए जाने चाहिए जो बिजली को सीधे जमीन तक आसानी से पहुंचा सकें।
- धरती पर वनों की निगरानी और पुनः वृक्षारोपण करने का अभियान चलाकर हानि की पूर्ति की जा सकती है।
- इंसान को ऐसी तकनीक विकसित करनी चाहिए जो Lightning से पहले ही चेतावनी जारी कर सके, जिससे संवेदनशील क्षेत्रों को आसानी से बचाया जा सके।
- सरकार द्वारा जारी वन विभाग और ग्रामवासियों को मिलकर जंगलों में बिजली गिरने के बाद तुरंत तेजी से कार्यवाही को अंजाम देना चाहिए, जैसे आग को बुझाना या पेड़ों को बचाने का प्रयास करना।
इसका निष्कर्ष: एक नजर में
Lightning प्रकृति की एक शक्ति मात्र है जिसे मानव द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके प्रभावों को बहुत हद तक सीमित अवश्य किया जा सकता है। हर साल लगभग 32 करोड़ से अधिक पेड़ों का नष्ट होना केवल एक आंकड़ा मात्र नहीं, बल्कि हमारी धरती की सेहत के लिए भी एक चेतावनी है। यदि हम समय रहते इस ओर ध्यान नहीं देते हैं, तो हम इस प्राकृतिक चुनौती से न केवल अपने पर्यावरण को बहुत बड़ी क्षति पहुचएंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और हरा-भरा भविष्य भी सुनिश्चित नहीं कर पाएंगे।