भारत में 17.1 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर

भारत ने हासिल की बड़ी सफलता: गरीबों की संख्या घटकर 2.3% पर पहुंच चुकी है, 17.1 करोड़ लोग अत्यंत गरीबी से बाहर निकले।

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भारत ने लगभग 17.1 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला:-

विश्व बैंक की रिपोर्ट ने भारत की गरीबी उन्मूलन के प्रयासों को वैश्विक स्तर पर उचित ठहराया है। इस रिपोर्ट में भारत के लिए उल्लेख किया गया है कि भारत ने वर्ष 2011 से वर्ष 2019 के बीच लगभग 17.1 करोड़ (171 मिलियन) लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला है। यह उपलब्धि न केवल भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए एक प्रेरणादायक स्त्रोत है, क्योंकि वैश्विक गरीबी को घटाने में भारत की भूमिका काफी हद तक महत्वपूर्ण रही है।

1. विश्व बैंक की रिपोर्ट की मुख्य बातें:-

विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारत के लिए कहा गया है कि भारत ने पिछले एक दशक में गरीबों की संख्या में भारी गिरावट की है। वर्ष 2011 में भारत की एक बड़ी जनसंख्या अत्यधिक गरीबी में अपना जीवनयापन कर रही थी, यानी प्रतिदिन लगभग 2.15 अमेरिकी डॉलर से कम पर अपना जीवनयापन कर रही थी। लेकिन वर्ष 2019 तक यह संख्या काफी तेजी से घाटी है।

यह गिरावट मुख्य रूप से ग्रामीण भारत में अधिक देखी गई, जहां सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, रोज़गार योजनाएं और सब्सिडी योजनाओं ने गरीबी को कम करने में मुख्य भूमिका अदा की है।

2. गरीबी घटने के मुख्य कारणों पर एक नजर:-

i. सरकारी योजनाओं का बढ़ता प्रभाव:-

भारत सरकार की ऐसी बहुत सी प्रमुख योजनाएं रहीं जिसने गरीबी उन्मूलन में प्रभावी रूप से काम किया है। जैसे:-

  • काँग्रेस द्वारा लागू की गयी मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम): इस योजना ने ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम आय सुनिश्चित करने में काफी हद तक सहायता की।
  • भाजपा सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना: जिससे गरीबों को आवासीय सुरक्षा मिली है जिनके पास रहने के लिए घर नहीं हैं।
  • भाजपा सरकार की जन-धन योजना: जिसने गरीबों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में काफी मदद की, जिससे सब्सिडी सीधे खातों में पहुंची सकी।
  • भाजपा सरकार की उज्ज्वला योजना: गरीबों के लिए एलपीजी कनेक्शन के माध्यम से स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार।
  • भाजपा सरकार का स्वच्छ भारत मिशन: स्वच्छता को बढ़ावा देकर देश में स्वच्छता के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ।

ii. देश की आर्थिक वृद्धि और विकास:-

भारत की बढ़ती तीव्र आर्थिक वृद्धि ने रोजगार सृजन, उद्यमिता और आयवृद्धि के क्षेत्र में अवसर प्रदान किए। मुख्य रूप से सेवा और निर्माण क्षेत्र में रोजगार में काफी वृद्धि हुई जिससे निचले आर्थिक वर्ग के लोगों को भी इसका लाभ मिला।

iii. देश में बढ़ती डिजिटलीकरण और पारदर्शिता:- 

2014 के बाद आधार, मोबाइल और जन-धन खातों के त्रिकोण ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता को काफी हद तक बढ़ाया है और लीकेज को भी काफी हद तक कम किया। इससे योजनाओं का वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँचना आसान हुआ।

3. विश्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट का वैश्विक परिप्रेक्ष्य:-

भारत में लगभग 17.1 करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर आना एक बड़ी उपलब्धि है जो वैश्विक गरीबी घटाने में सबसे बड़े योगदान के रूप में देखा जा रहा है। यह काफी हद तक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक गरीबी के आंकड़ों में भारत का अनुपात ऐतिहासिक रूप से सबसे अधिक रहा है।

इस वार्षिक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच असमानता में काफी हद तक गिरावट आई है, जो यह दिखाता है कि विकास के क्षेत्र में भारत की स्थिति संतुलित रही है।

4. वर्तमान में जो चुनौतियाँ बनी हुई हैं उसपर एक नजर:-

देखा जाये तो यह उपलब्धि अत्यंत सराहनीय रही है, फिर भी देखा जाये तो भारत के सामने कुछ गंभीर चुनौतियाँ वर्तमान में भी मौजूद हैं; जैसे:-

  • COVID-19 महामारी का गंभीर प्रभाव: कोविड महामारी ने देश में हजारों/लाखों परिवारों को फिर से गरीबी के गर्त में धकेल दिया। असंगठित क्षेत्र व प्रवासी मजदूर मुख्य रूप से प्रभावित हुए हैं।
  • बेरोजगारी की बढ़ती समस्या: देखा जाये तो विशेषकर युवा वर्ग में बेरोजगारी दर अब भी उच्च स्तर पर बनी हुई है, जिससे आय असमानता का अंतर अब भी काफी हद तक बना हुआ है।
  • मुद्रास्फीति और खाद्य मूल्य में हुई वृद्धि: इससे गरीब वर्ग के लिए जरूरी चीजों व वस्तुओं की पहुंच भी कठिन हुई है।
  • शहरी क्षेत्र में बढ़ती गरीबी: शहरी क्षेत्रों में बनी हुई झुग्गियों और अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले लोगों की जीवन स्थितियों में अभी भी पर्याप्त सुधार नहीं हुआ है।

5. भविष्य की दिशा पर एक नजर व उसकी नीति सिफारिशें:- 

भारत को इस प्रगति को बनाए रखने के लिए निम्नलिखित उपायों पर अपना ध्यान केन्द्रित करना होगा:

i. मानव पूंजी में निवेश बढ़ाना:- 

शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण में निवेश को बढ़ावा देकर गरीब वर्ग की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। इससे उन्हें लंबे समय के लिए गरीबी से बाहर निकलने में सहायता मिलेगी।

ii. श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था:- 

असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और बेरोजगारी भत्ता जैसी मुख्य योजनाओं को बढ़ावा देना।

iii. महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में विस्तार:- 

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने से परिवारों की आय में वृद्धि की जा सकती है, जिससे गरीबी को घटाने में काफी मदद मिलेगी।

iv. प्राकृतिक आपदाओं के प्रति लचीलापन होना:-

जलवायु परिवर्तन व प्राकृतिक आपदाएं; गरीबों को सबसे अधिक प्रभावित करती हैं। अतः सामाजिक सुरक्षा ढांचे को आपदाओं के अनुकूल बनाया जाना चाहिए।

6. निष्कर्ष:- 

भारत द्वारा लगभग 17.1 करोड़ लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकालना भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित करने योग्य है। इस सफलता का मुख्य कारण, सरकार की नीतियों, आर्थिक विकास की नीतियों और सामाजिक कार्यक्रमों के समन्वय का परिणाम दर्शाता है। परंतु यह यात्रा अभी लंबी होगी। असमानता, बेरोजगारी और महामारी जैसे मुख्य कारकों के बने रहें के कारण इसे निरंतर आगे बढ़ाने की आवश्यक हैं। यदि भारत इन सभी चुनौतियों का समाधान करने में सफल रहता है, तो यह आने वाले वर्षों में गरीबी को पूरी तरह समाप्त कर सकती है।

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