सरकार का बिहार पर पूरा फोकस, चुनाव आयोग ने बिहार की मतदाता सूची (2025) में विदेशी नागरिकों की बड़ी संख्या में असामान्य वृद्धि की गंभीर आशंका जताई है। Always Right or Wrong.
भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी पर आयोग ने जताई चिंता:-
हाल ही में भारत के निर्वाचन आयोग यानि Election Commission of India ने सरकार के लिए एक अहम खुलासा किया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण Voter List Revision के दौरान देखा गया कि बड़ी संख्या में नेपाल, म्यांमार और बांग्लादेश के नागरिकों की उपस्थिति दर्ज की गई है। यह न केवल चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता को बनाए रखने पर प्रश्नचिन्ह लगाता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आंतरिक स्थायित्व और चुनावी ईमानदारी के संदर्भ में भी गंभीर मुद्दा बनता दिख रहा है।
1. चुनाव आयोग के विषय की पृष्ठभूमि पर एक नजर:-
भारत एक विशाल और महान लोकतंत्र वाला देश है जहां हर वयस्क नागरिक को वोट देने का अधिकार दिया गया है। इस अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए भारत का निर्वाचन आयोग समय-समय पर मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण भी करता है, ताकि मृतकों के नामों को हटाया जा सकें और नए पात्र नागरिकों के नाम सूची में जोड़े जा सकें और दोहराव या फर्जी नामों को हटाया भी जाता है।
वर्तमान में विभिन्न राज्यों, विशेषकर सीमा से लगे क्षेत्रों; जैसे असम, मणिपुर, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश आदि में जब मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण किया गया, तब बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के नाम भारतीय मतदाता सूची में दर्ज पाए गए हैं। इसमें नेपाल, म्यांमार मुख्य रूप से रोहिंग्या समुदाय के नागरिक और बांग्लादेश के नागरिक भी बड़ी संख्या में शामिल हैं।
2. चुनाव आयोग की सूची में कैसे पाए गए विदेशी नागरिक ?
भारत के निर्वाचन आयोग ने स्थानीय प्रशासन और खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर यह पुनरीक्षण अभियान चलाया गया है। कई मामलों में देखा जाये तो ये विदेशी नागरिक भारत के लिए:
- जाली दस्तावेज बनाकर भारतीय नागरिक बन गए थे जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र आदि बनवाकर।
- स्थानीय राजनेताओं के सहयोग या दलालों की सम्पूर्ण मदद से मतदाता पहचान पत्र प्राप्त कर चुके थे।
- कुछ मामलों में विदेशी नागरिक प्रवासी समुदायों में मिलकर बसे हुए थे, जिससे उनकी पहचान कर पाना बहुत कठिन हो गया था।
3. विदेशी नागरिक कितनी संख्या में पाए गए ?
हालांकि भारत निर्वाचन आयोग ने सभी राज्यों का विस्तृत आंकड़ा अभी सार्वजनिक नहीं किया है, परंतु शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार बताया गया कि:
- असम राज्य में लगभग 40,000 से अधिक संदिग्ध नागरिक मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
- पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा राज्यों में बांग्लादेशी घुसपैठियों की बड़ी संख्या में पुष्टि हुई है।
- मणिपुर और मिज़ोरम राज्यों में भी म्यांमार से आए लोगों के नाम सूची में बड़ी संख्या में दर्ज मिले हैं।
4. विदेश नागरिकों के नाम का क्या प्रभाव पड़ता है ?
(a) बिहार की चुनावी प्रक्रिया की शुचिता पर कितना असर:
यदि विदेशी नागरिक भारत में वोट डालते हैं, तो इससे चुनाव के निष्पक्ष परिणाम पर काफी असर पड़ सकता है। यह लोकतंत्र के मूल आधार को भी कमजोर करेगा।
(b) भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर खतरा:
भारत में विदेशी नागरिकों की अनधिकृत मौजूदगी का होना, विशेष रूप से सीमावर्ती इलाकों में, सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं से आतंकी गतिविधियों होती हैं और तस्करी के जुड़ाव भी बड़ी संख्या में देखने को मिलते हैं।
5. भारतीय दस्तावेज़ बनना कैसे संभव हुआ ?
- भारत में आसानी से बन रहे आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य पहचान पत्रों के ज़रिए फर्जी तरीके से विदेशी नागरिकों ने भारत की नागरिकता प्राप्त की हुई है।
- भारत के कुछ क्षेत्रों में स्थानीय राजनेताओं ने वोट बैंक की राजनीति के चलते जानबूझकर विदेशी नागरिकों को भारत का वोटर कार्ड बनवाया।
- विशेषकर पूर्वोत्तर राज्यों में भारत की सीमाएँ लंबे समय से घुसपैठ के लिए संवेदनशील मानी जाती रही हैं।
- सीमावर्ती राज्यों में कुछ अधिकारी भी रिश्वत लेकर फर्जी दस्तावेजों को प्रमाणित कर देते हैं।
6. विदेशी लोगों पर निर्वाचन आयोग की कार्रवाई का क्या असर:-
भारत निर्वाचन आयोग ने विदेशी लोगों के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- भारत में जांच अभियान तेज किया गया है, विशेषकर सीमावर्ती जिलों में ज्यादा शक्ति की जा रही है।
- सरकार द्वारा संदिग्ध मतदाताओं की पहचान के लिए मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स का प्रयोग भी शुरू किया गया है।
- स्थानीय बीएलओ यानि Booth Level Officers को पुनः प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि फर्जी मतदाताओं की सही पहचान अच्छे तरीके से हो।
- भारत निर्वाचन आयोग ने सभी राज्यों को शक्त निर्देश दिया है कि वे विदेशी नागरिकों की उपस्थिति की जांच अच्छे से करें और ऐसे लोगों को सूची से तत्काल हटाएं जाएँ।
इसका निष्कर्ष:-
भारत के लोकतंत्र की नींव अच्छे से मजबूत तभी रह सकती है जब चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हों। मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों की उपस्थिति का होना इस नींव को ज्यादा कमजोर करती है। निर्वाचन आयोग का यह खुलासा होना समय रहते चेतावनी देता है, जिससे सरकार, प्रशासन, राजनैतिक दलों और समाज को मिलकर निपटना होगा। यदि अब भी भारत सरकार द्वारा सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन पर दीर्घकालिक संकट देखने को मिल सकता है।