साल 2025 जनवरी से जून तक राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 22,000 लोगों की मौत हो गयी। अच्छे राजमार्गों के बावजूद भी हादसों का आंकड़ा डराने वाला। Always Right or Wrong.
भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों पर हादसों से गई लगभग 22,000 लोगों की जान:-
भारत में सड़क हादसों का होना एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। हाल ही में सामने आए भारत सरकार के आंकड़ों ने इस चिंता को और भी बढ़ा दिया है। साल 2025 के पिछले छह महीनों के भीतर यानि जनवरी 2025 से जून 2025 तक), राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग 22,000 लोगों की जान दुर्घटनाओं के चलते चली गई, जो यह दिखाता है कि देश में सड़क सुरक्षा को लेकर अभी भी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। सरकार का यह आँकड़ा न सिर्फ मानवीय क्षति को दर्शाता है, बल्कि सड़क तंत्र, यातायात प्रबंधन और लोगों में जागरूकता की कमी को भी दिखाता है।
1. राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ता हादसों का स्वरूप:-
भारत में देखा जाये तो कुल सड़क नेटवर्क लगभग 64 लाख किलोमीटर से भी अधिक है, जिसमें से राष्ट्रीय राजमार्ग मात्र 2 प्रतिशत हिस्से पर ही फैले हुए हैं, लेकिन ये पूरे ट्रैफिक का लगभग 40% से ज्यादा बोझ को वहन करते हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर तेज़ गति, भारी मालवाहक ट्रक, निजी वाहन, बसें और अव्यवस्थित यातायात अक्सर गंभीर दुर्घटनाओं का कारण भी बनते हैं। भारत सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन हादसों में मारे गए लगभग 22,000 लोगों में से अधिकांश: दोपहिया वाहन चालक, पैदल यात्री, दुपहिया पर बिना हेलमेट के चलने वाले युवा और ट्रक या भारी वाहन की चपेट में आने वाले लोग ही थे।
2. सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं के मुख्य कारण:-
भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों पर इतनी बड़ी संख्या में जान गंवाने के पीछे बहुत से कारण हैं, जैसे: तेज़ रफ्तार और नियंत्रण की कमी होना, ओवरलोडेड वाहन का राजमार्गों पर चलना, दुर्बल सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर का होना, ड्राइवरों की लापरवाही का होना, मोबाइल फोन पर बात करते हुए ड्राइविंग करना, सीट बेल्ट या हेलमेट का उपयोग न करना और पैदल यात्रियों की असावधानी होना। कई बार देखा जाता है कि पैदल यात्री भी बिना ज़ेब्रा क्रॉसिंग या फुटओवर ब्रिज का उपयोग किए सड़क पार करने लगते हैं, जिससे वे दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
3. इसमें सरकारी की पहल और सरकार द्वारा बनाए गए कानून:-
भारत सरकार ने सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए बहुत से कदम उठाए हैं; जैसे: मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 कानून लाया गया जिसमें कानून के अंतर्गत ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाने का नियम लागू है। उदाहरणस्वरूप: बिना हेलमेट या बिना सीट बेल्ट के ₹1000 तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा, शराब पीकर वाहन चलाने पर चालक को ₹10,000 और जेल भी जाना पद सकता है।
ई-चालान और डिजिटल निगरानी होना जिसमें सरकार द्वारा कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरों के ज़रिए ट्रैफिक उल्लंघन रिकॉर्ड किए जा रहे हैं, जिससे कानून का पालन सख्ती से किया जा रहा है। सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया जाना, जिसमें सरकार सड़क सुरक्षा सप्ताह, सेव लाइफ फाउंडेशन जैसी पहलें शुरू कर चुकी है, जिनमें स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक जगहों पर लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाना सरकार का लक्ष्य है। इमरजेंसी हेल्पलाइन और एम्बुलेंस सेवा शुरू करना जिसमें राजमार्गों पर 108 या 112 आपातकालीन सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे दुर्घटना के तुरंत बाद मदद को पहुंचाया जा सके।
4. देश के किन राज्यों में सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं:-
भारत सरकार के आँकड़ों के अनुसार, जिन राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सबसे अधिक जानें गई हैं, उनमें उत्तर प्रदेश सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं और मृतकों की संख्या वाला राज्य बना हुआ है। उसके बाद महाराष्ट्र का नंबर है जिसमे बड़े और औद्योगिक राज्य होने के कारण भारी ट्रैफिक और अधिक हादसे देखने को मिलते हैं। उसके बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान और तमिलनाडु भी इस सूची में शामिल हैं। अधिकांशतः इन राज्यों में दुर्घटनाएं रात के समय, या खराब मौसम में ज्यादा होती हैं, जब विजिबिलिटी काफी कम होती है।
5. सड़क हादसों के निवारण के उपाय और इनके आगे की राह:-
यदि भारत सरकार को सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या को कम करना है, तो उसे बहुआयामी रणनीति अपनानी होगी; जैसे: सड़क डिज़ाइन में ज्यादा-से-ज्यादा सुधार करना; जिसमें बेहतर लाइटिंग की सुविधा, स्पीड ब्रेकर लगाना, पैदल क्रॉसिंग का सही उपयोग और अंडरपास व ओवरब्रिज का सही इस्तेमाल होना। सड़क इंजीनियरिंग ऑडिट होना; जिसमें हर सड़क निर्माण के बाद और समय-समय पर सड़क सुरक्षा ऑडिट करना भी बेहद ज़रूरी होता है जिससे खतरनाक क्षेत्रों की पहचान सही और सटीक हो सके। सख्त ड्राइविंग टेस्ट और लाइसेंस नियम बनाए जाने चाहिए, ताकि भारत में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करना अपेक्षाकृत आसान हो सके। साथ ही इसे और सख्त बनाए जाने की आवश्यकता है।
इसका निष्कर्ष: एक नजर में
भारत जैसे बड़े देश में सड़क दुर्घटनाओं में जान गँवाने वालों की संख्या चिंताजनक स्तर पर जा पहुंची है। मुख्यतः राष्ट्रीय राजमार्गों पर जो हालात दिख रहे हैं, वे राष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ है। सरकारी प्रयास, कानून, तकनीकी हस्तक्षेप और आम नागरिकों की जिम्मेदारी होने से इन सभी का संतुलित संयोजन ही इस संकट से बाहर निकलने का सही और उचित रास्ता है। यदि देश का हर नागरिक और व्यवस्था मिलकर काम करे, तो यह आँकड़ा भविष्य में शून्य तक भी लाया जा सकता है।