राधा यादव के संघर्ष की कहानी

क्रिकेटर राधा यादव: साल 2000 में जन्मी राधा यादव के संघर्ष की कहानी। जाने विस्तार से। Always Right or Wrong.

 

क्रिकेटर राधा यादव का बचपन और प्रारंभिक जीवन:-

क्रिकेटर राधा यादव का जन्म 21 अप्रैल 2000 को मुंबई के कंदिवली वेस्ट में एक साधारण परिवार में हुआ था, वे सातवें माह में ही समय से पहले पैदा हो गयी थीं। उनका परिवार बेहद सीमित संसाधनों में अपना जीवनयापन कर रहा था। वे 225 वर्ग फुट के छोटे से कमरे में अपने परिवार के साथ रहती थी, उनके पिता की सब्जी और डेयरी की छोटी सी दुकान थी और यह पूरी बस्ती स्लम पुनर्विकास क्षेत्र के अंतर्गत थी।

लेकिन वे उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिला के अजोशी गांव की मूल निवासी हैं, जहां से उनका परिवार मुंबई काम के लिए आया था ताकि बेहतर अवसर मिल सकें।

राधा यादव के संघर्ष की कहानी

शुरुआती क्रिकेट प्रेम और संघर्ष

राधा मात्र 6 वर्ष की उम्र से ही मोहल्ले में गली-क्रिकेट खेलने लगी थीं। तब उनका साथी अधिकांशतः लड़के ही थे और कई लोगों ने यह कहते हुए तंज भी किया कि यह लड़की के लिए ठीक नहीं है। हालांकि, उनके पिता ओमप्रकाश यादव ने हमेशा ही उनका साथ दिया और समाज की बातों पर कभी ध्यान नहीं दिया और राधा को खेलने की पूर्ण स्वतंत्रता दी।

उनके पास क्रिकेट किट खरीदने के पैसे नहीं थे इसलिए राधा लकड़ी से बैट बनाकर अपना अभ्यास किया करती थीं। घर से स्टेडियम तक सफर उनके लिए हमेशा ही आसान नहीं रहा, पिता उन्हें साइकिल से छोड़ा करते थे, लेकिन वापस आने के लिए कभी-कभी पैदल भी आना पद जाता था।

राधा यादव के संघर्ष की कहानी

मौका मिलते ही करियर ने भरी उड़ान:-

जब वे लगभग 12 वर्ष की थीं, तब उनके खेलने से प्रभावित होकर कोच प्रफुल्ल नायक ने उन्हें प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया था। उन्होंने नायक से मिलने पर अपने पिता को आश्वासन दिया कि अगर क्रिकेट में सफल नहीं भी होती हैं, तब भी वे रेलवे जैसी जगह नौकरी दिलवा ही देंगे। नायक ने राधा को अबेंडिबाई डामोदर काले विद्यालय से Our Lady of Remedy में उनका ट्रांसफर कराया, जहाँ उनका पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट प्रशिक्षण भी जारी रहा।

शुरुआत में राधा तेज गेंदबाजी करने की इच्छा रखती थीं, लेकिन कोच नायक ने उन्हें स्पिन गेंदबाजी अपनाने का अपना सुझाव दिया और यह परिवर्तन उनके करियर का मुख्य मोड़ साबित हुआ।

कोच नायक ने न सिर्फ कोचिंग की, बल्कि किट और भोजन तक की व्यवस्था भी कराई, जबकि राधा के पिता सब्जियों और डेयरी कारोबार के माध्यम से अतिरिक्त आय जुटाते रहे ताकि बेटी का सपना सही प्रकार से पूरा किया जा सके। राधा की बड़ी बहन ने भी अपना करियर छोड़कर उसकी हर तरह से मदद की, जिससे पारिवारिक बलिदान और समर्थन का अद्भुत चित्र समाज के सामने प्रस्तुत होता है।

राधा यादव के संघर्ष की कहानी

यादव का राज्य स्तर से अंतरराष्ट्रीय मैदान तक का सफर:-

साल 2015 में उन्होंने घरेलू क्रिकेट में कीर्तिमान दिखाना शुरू कर दिया था। मुंबई की टीम को छोड़कर वे वडोदरा, गुजरात चली गईं, जहां वे उन्नति के नए अवसरों से भी जुड़ीं; अंडर-19 और सीनियर टीम का नेतृत्व भी किया और फिर भारतीय टीम तक का सफर भी अच्छी तरह से पूरा किया।

उन्होंने फरवरी 2018 में टेनिस-बॉल क्रिकेट से इंटरनेशनल टी20 में पदार्पण भी किया था, 2018 ICC महिला T20 विश्व कप वेस्ट इंडीज के खिलाफ में वे भारत के शीर्ष विकेट लेने वाली गेंदबाजों में शामिल हो गयी थी।

राधा यादव के संघर्ष की कहानी

राधा यादव की व्यावसायिक क्रिकेट आय का आरंभ राज्य-स्तर की मैच फीस जो ₹12–15 हज़ार प्रति मैच थी, से शुरू हुआ, बाद में बीसीसीआई से मिलने वाले सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट, जो पहले ₹10 लाख, अब लगभग ₹30 लाख है, ने उनके और परिवार की आर्थिक स्थिति को ही बदलकर रख दिया था। उनकी पहली कमाई से उन्होंने अपने पिता के लिए एक दुकान खरीदी, जिसका नाम राधा जनरल स्टोर रखा।

https://ndtv.in/cricket/this-time-faith-and-dedication-is-really-different-big-statement-by-radha-yadav-hero-of-the-historic-victory-hindi-8853885

राधा यादव के संघर्ष की कहानी

इनके संघर्ष से सफलता की कहानी पर एक नजर:-

राधा यादव की कहानी हमारे समाज को सिखाती है कि परिस्थिति चाहे कितनी भी मुश्किल/कठिन क्यों न हो जाएँ, यदि पारिवारिक समर्थन, सही मार्गदर्शन और आत्म-विश्वास किसी के पास हो तो सपनों को हकीकत में बदला भी जा सकता है।

  • उन्होंने गरीबी, असहज स्थितियों और समाज की तानों के बावजूद भी हार नहीं मानी और सफलता के शिखर को प्राप्त किया।
  • उनके पिता का बलिदान, कोच का समर्पण और खुद का समर्पण से ही तीनों वजहें उनके संघर्ष को सफलता में बदलने के स्तंभ भी बने।
  • एक लड़की गांव से मुंबई की झुग्गी से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने वाली महान क्रिकेटर बन ही गईं।

इस पूरी संघर्ष भरी यात्रा ने राधा यादव को न केवल एक क्रिकेटर बल्कि एक प्रेरक आदर्श भी बना दिया, जो गरीब परिवार से आकर अपनी मेहनत, संघर्ष और संयम से करोड़ों लोगों के लिए आज मिसाल बनी हुई हैं।

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