भारत रोजगार योजना: मोदी ने लगभग 3.5 करोड़ नौकरियां सृजित करने के किया वादा। मोदी ने शुरू की ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’। जाने विस्तार से। Always Right or Wrong.
मोदी ने कहा, अगले दो वर्षों में देश भर में सृजित होंगी 3.5 करोड़ नौकरियाँ:-
भारत आज विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश बन गया है और साथ ही सबसे तेज़ी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में से भी एक बना हुआ है। ऐसे में रोजगार यानि Employment का मुद्दा हमेशा ही सबसे बड़ा चुनावी, सामाजिक और आर्थिक विषयों का सुलगता प्रश्न रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने एक भाषण में कहा है कि अगले दो वर्षों में देश भर में 3.5 करोड़ नौकरियाँ अलग-अलग क्षेत्रों में सृजित की जाएंगी। यह घोषणा न केवल युवाओं में फिर से एक नई उम्मीद को जगाती है बल्कि भारत की आर्थिक दिशा को भी स्पष्ट रूप से दुनिया के सामने रखती है।
प्रधानमंत्री मोदी का हमेशा ही रोजगार पर फोकस रहा है:-
वर्ष 2014 से सत्ता में आने के बाद ही मोदी सरकार लगातार रोजगार सृजन पर जोरदार बल देती रही है। सरकार द्वारा “मेक इन इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया”, “डिजिटल इंडिया”, “आत्मनिर्भर भारत”, “पीएलआई योजना” यानि Production Linked Incentive Scheme जैसी दमदार नीतियों का उद्देश्य न केवल उत्पादन और निवेश को तेजी से बढ़ावा देना है बल्कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भी करोड़ों नौकरियों का निर्माण देशभर में करना है।
मोदी ने यह भी कहा है कि अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ रोजगार अवसरों का सृजन जल्द-से-जल्द किया जाएगा। यह संख्या भारत के हिसाब से छोटी नहीं है, बल्कि लगभग हर महीने औसतन 15 लाख नौकरियों पूरे देश भर में सृजित करने का अवसर भी होगा।
भारत की वर्तमान की रोजगार स्थिति पर एक नजर:-
भारत में वर्तमान समय में कार्यशील जनसंख्या 15-59 वर्ष की लगभग 90 करोड़ के आसपास मानी जा रही है।
- बेरोजगारी दर पर विचार करते हुए, सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनॉमी (CMIE) के अनुसार साल 2024 में भारत की बेरोजगारी दर 7 से 8% के बीच रही है।
- युवाओं में बेरोजगारी की दर को दर्शाते हुए, उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं में बेरोजगारी की दर लगभग 20% से भी अधिक है।
- असंगठित क्षेत्र में भारत की स्थिति लगभग 80-85% असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की है।
ऐसे में इतने बड़े देश में Employment सृजन केवल संख्या का खेल मात्र नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और स्थायी रोजगार बनाना भी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है।
भारत में रोजगार सृजन के लिए सरकार के द्वारा उठाए गए मुख्य कदम:-
- सरकार की पीएलआई योजना, जिसमें 14 क्षेत्रों को आकर्षित कर लाखों रोजगार बनाना सरकार का लक्ष्य है।
- मेक इन इंडिया स्कीम के तहत, विदेशी निवेश और घरेलू उद्योग को तेजी से बढ़ावा देना।
- स्टार्टअप इंडिया मिशन के तहत, युवाओं को उद्यमिता की ओर प्रोत्साहित करना भी सरकार का मुख्य लक्ष्य है।
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना यानि PMKVY के तहत, युवाओं को नई तकनीकों में ट्रेनिंग देकर, उन्हे स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है।
- राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP) को जारी करते हुए, 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश, सीधे और अप्रत्यक्ष रोजगार को बढ़ावा।
- ग्रीन एनर्जी मिशन के तहत, सौर, पवन और हाइड्रोजन ऊर्जा से नए सेक्टरों में Employment को सृजित करना भी सरकार का उद्देश्य है।
सरकार के लिए मुख्य चुनौतियाँ:-
हालांकि 3.5 करोड़ नौकरियों का लक्ष्य उत्साहजनक तो है ही, परंतु इसमें कुछ चुनौतियाँ भी सामने दिख रही हैं:
- कौशल अंतर (Skill Gap) को देखते हुए, उद्योग की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित जनशक्ति का बड़ा अभाव।
- गुणवत्ता बनाम संख्या के तहत, अधिकतर नौकरियाँ असंगठित और कम आय वाली न बनें, इसे भी ध्यान में रखना होगा।
- निजी निवेश की गति को बढ़ते हुए, विदेशी और घरेलू निवेश की रफ्तार को भी तेज करना चाहिए।
- वैश्विक आर्थिक स्थिति को देखते हुए, अमेरिका, चीन और यूरोप में मंदी का असर भारत के Employment पर देखने को मिल सकता है।
इसका निष्कर्ष: संक्षिप्त नजर में
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का यह भी कहना है कि अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ नौकरियाँ सृजित होंगी, एक महत्वाकांक्षी और साहसिक घोषणा मानी जा रही है। यदि सरकार अपनी योजनाओं को तेज़ी और प्रभावी ढंग से लागू करती है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। निजी क्षेत्र को अधिक प्रोत्साहन भी यह सरकार देती है और युवाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध भी कराती है, तो यह लक्ष्य प्राप्त भी किया जा सकता है, बशर्ते नियत साफ हो।
भारत जैसे विशाल और युवा देश के लिए इनती बड़ी संख्या में Employment सृजन केवल एक राजनीतिक वादा मात्र नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्थिरता की अनिवार्य शर्त भी मानी जा रही है। आने वाले दो वर्ष इस बात का प्रमाण होते दिखेंगे कि क्या सरकार इस चुनौती को अवसर में बदल पाएगी और भारत को Employment के क्षेत्र में एक नई ऊँचाई पर पहुँचा पाएगी। अब यहीं देखना है। क्या सरकार द्वारा कहा गया हर लक्ष्य आसानी से पाया जा सकेगा।