अमेरिका का वीजा चाहिए तो देने होंगे 15,000 डॉलर। ट्रम्प ला रहे नई नीति। जाने विस्तार से। Always Right or Wrong.
अमेरिका ला रहा वीजा की नई नीति, अब यूएस जाने के लिए देना पड़ सकता है 15,000 डॉलर का भारी बॉन्ड:-
अमेरिका, जो वर्तमान में दुनिया भर के छात्रों, श्रमिकों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख गंतव्य का साधन बना हुआ है, अब अपनी वीजा नीति में बड़ा बदलाव करने के तैयारी में है। अमेरिकी सरकार ने सभी को प्रस्तावित किया है कि कुछ देशों के नागरिकों को अमेरिका आने से पहले 15,000 डॉलर जो लगभग 12.5 लाख रुपये हैं, तक का सिक्योरिटी बॉन्ड जमा करना पड़ सकता है। यह नीति मुख्यतः वीजा ओवरस्टे यानी वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में रुकने वाले लोगों की संख्या कम करने के उद्देश्य से लाई गई योजना है।
अमेरिका का यह कदम दुनियाभर में खासकर विकासशील देशों से आने वाले यात्रियों पर गहरा प्रभाव डालेगा, जिनके लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना आसान काम भी नहीं है। भारत जैसे देशों से अमेरिका जाने वाले हज़ारों छात्र, पेशेवर और पर्यटक इस प्रस्तावित नीति से बड़े स्तर पर प्रभावित हो सकते हैं।
इस प्रस्तावित नीति का मुख्य सार:-
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग यानि Department of Homeland Security – DHS द्वारा प्रस्तावित यह नई वीजा नीति ट्रम्प प्रशासन के समय में ही शुरू की गई थी, लेकिन बाइडन प्रशासन ने भी इस मुद्दे पर विचार जारी रखा था। इस प्रस्ताव के अंतर्गत B-1 यानि बिजनेस और B-2 यानि पर्यटक वीजा के लिए कुछ खास देशों के नागरिकों से अमेरिका में प्रवेश से पहले 5,000 डॉलर से 15,000 डॉलर तक का वीजा बॉन्ड लेने का सुझाव सरकार को दिया गया है।
अमेरिका जाने के लिए किसे देना पड़ेगा बॉन्ड?
डीएचएस की ओर से तय की गई प्राथमिक सूची में वो देश शामिल होंगे जिनकी वीजा ओवरस्टे दर 10% से ज्यादा है। हालांकि सूची अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन अतीत के आंकड़ों के अनुसार, अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के कुछ देशों से आने वाले लोगों की वीजा उल्लंघन दर देखने जाये तो काफी अधिक रही है। इसमें भारत अभी तक शामिल नहीं है, लेकिन भविष्य में भारत के कुछ श्रेणी के आवेदकों को यह बॉन्ड भी देना पड़ सकता है।
यह बॉन्ड विशेष तौर पर अस्थायी विजिटर्स पर लागू किया जा सकता है, जैसे:
- पर्यटक के क्षेत्र में
- व्यापारिक यात्रियों के लिए
- मेडिकल टूरिज्म पर जाने वाले लोग के लिए
- विदेश में पढ़ने वाले कुछ छात्रों पर भी यह नीति विशेष रूप से लागू हो सकती है
भारत पर इसका संभावित प्रभाव क्या होगा?
भारत से अमेरिका जाने वाले लोगों की संख्या हर साल लाखों में हो जाती है। इनमें छात्रों, सॉफ्टवेयर पेशेवरों, व्यापारियों और पर्यटकों की बड़ी संख्या अमेरिका जाती है। यदि भारत को इस नीति के दायरे में लाया गया तो:
- छात्रों पर इसका सीधा असर होगा, शिक्षा के लिए पहले से भारी-भरकम खर्च वहन कर रहे बहुत से छात्रों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
- टूरिज्म भी घटेगा, भारतीय पर्यटक अमेरिका जाने से ज्यादा कतराएंगे, जिससे अमेरिकी पर्यटन उद्योग को काफी नुकसान हो सकता है।
- डिप्लोमैटिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि भारत जैसी प्रमुख सहयोगी राष्ट्रों के साथ यह नीति तनाव का कारण भी बन सकती है।
अमेरिका की इस नीति की आलोचना और समर्थन:-
नीति की आलोचना:
- यह नीति नस्लीय भेदभाव की ओर ज्यादा संकेत करती है क्योंकि इसे केवल कुछ चुनिंदा देशों पर ही लागू किया जा सकता है।
- गरीब और मध्यम वर्ग के पर्यटकों के लिए अमेरिका यात्रा लगभग असंभव हो जाएगी।
- इससे अमेरिका की “विविधता और अवसरों की भूमि” की छवि काफी हद तक धूमिल होगी।
इस नीति का समर्थन:
- इससे वीजा सिस्टम की जवाबदेही तेजी से बढ़ेगी।
- वीजा ओवरस्टे जैसे मामलों में भी गिरावट देखने को मिलेगी।
- अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा और संसाधनों की रक्षा अच्छे से की जा सकेगी।
इस नीति में बाइडन प्रशासन की स्थिति क्या थी?
हालांकि यह नीति ट्रम्प प्रशासन की ओर से ही प्रस्तावित की गई थी, लेकिन बाइडन प्रशासन ने इसे पूरी तरह से रद्द भी नहीं किया था। बाइडन ने इमिग्रेशन को मानवीय आधार पर अधिक सहानुभूति से देखने की बात भी अपने इंटरव्यू में कही थी, लेकिन वीजा ओवरस्टे की समस्या को भी नकारा नहीं जा सकता है।
इसका निष्कर्ष:-
अमेरिका द्वारा प्रस्तावित वीजा नीति, जिसमें 15,000 डॉलर तक का बॉन्ड जमा करने की बात अमेरिकी सरकार द्वारा की जा रही है, वैश्विक यात्रा और आव्रजन पर दूरगामी प्रभाव डालेगी। इस नीति का मुख्य उद्देश्य भले ही सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित करना क्यों न हो, लेकिन यह आर्थिक और सामाजिक स्तर पर असमानता भी बड़े स्तर पर पैदा कर सकती है। भारत जैसे देशों के लिए यह नीति चिंता का विषय हो सकती है और ऐसे में भारत को अमेरिका से इस पर स्पष्ट बातचीत करने की आवश्यकता है।