भारत की सीमाओं पर बढ़ता गंभीर संकट, वर्तमान समय में जम्मू से लेकर मणिपुर तक जो हो रहा है, वह एक बड़ी साजिश का दिखाता है। 2025 जाने विस्तार से। Always Right or Wrong.
भारत के पड़ोसी देशों के साथ लगती सीमाओं पर बढ़ता संकट:-
भारत एक विशाल भू-भाग के साथ-साथ एक समृद्ध देश भी है जिसकी सीमाएँ सात पड़ोसी देशों; पाकिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार और अफगानिस्तान यानि POK की ओर से लगती हैं। भारत की यह भू-राजनीतिक स्थिति उसे रणनीतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण बनाती है, लेकिन साथ ही सीमाओं पर निरंतर संकट और तनाव का कारण भी इन दिनों देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत की सीमाओं पर संकट लगातार बढ़ा है, जिसके पीछे कई आंतरिक और बाहरी कारक दिखते हैं।
1. भारत का चीन के साथ सीमा विवाद:-
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद कई दशकों पुराना है, लेकिन साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़पों के बाद यह संकट ओर भी तेजी से गहरा हो गया है। लद्दाख क्षेत्र में चीन की सेना PLA द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा LAC पार कर अतिक्रमण करने के लिए भारत में घूस आई थी।
सीमा विवाद का मुख्य कारण:-
- भारत चीन सीमा की वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्पष्ट परिभाषा का न होना।
- चीन का विस्तारवादी रवैया और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव यानि BRI के माध्यम से रणनीतिक पकड़ को मजबूत करना।
- भारत की रणनीतिक सड़कों और बुनियादी ढाँचे का तेजी से निर्माण, जो चीन को असहज होने पर मजबूर करता है।
इस विवाद का परिणाम:-
- चीन और भारत के बीच सैन्य तनाव का होना।
- दोनों देशों की सीमा क्षेत्रों में भारी सैन्य जमावड़ा होना।
- व्यापारिक और राजनयिक संबंधों में तेजी के साथ बढ़ती कटुता भी।
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2. भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर बढ़ता संकट:-
पाकिस्तान के साथ वर्ष 1947 से ही भारत की सीमा संवेदनशील रही है। जम्मू-कश्मीर के गमगीन मुद्दे, आतंकवाद और घुसपैठ के चलते यह तनाव हमेशा से ही बना हुआ है।
हाल की घटनाओं पर एक नजर:-
- नियंत्रण रेखा यानि LoC पर बार-बार संघर्षविराम उल्लंघन का होना।
- पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा भारत में घुसपैठ करना और आतंकी हमलों की अंजाम देना।
- कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पाकिस्तान की भारत के लिए बढ़ती आक्रामक कूटनीति।
विवाद का परिणाम:-
- दोनों देशों की सीमा पर सैन्य संघर्ष की बढ़ती स्थिति।
- नागरिकों के लिए खतरा और विस्थापन की स्थिति हमेशा ही बने रहना।
- अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत-पाक संबंधों की नकारात्मक छवि दुनिया के सामने उजागर होना।
3. भारत के नेपाल और भूटान से बढ़ते सीमा तनाव:-
हालाँकि नेपाल और भूटान जैसे छोटे देशों के साथ भारत के संबंध सौहार्दपूर्ण रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में कुछ घटनाओं ने तनाव को कुछ हद तक बढ़ाया है।
भारत-नेपाल तनाव:-
- साल 2020 में नेपाल ने एक नया राजनीतिक नक्शा अपने देश के लिए जारी किया, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल ने अपना क्षेत्र बताया था।
- यह क्षेत्र वर्तमान में भारत के नियंत्रण में है और सामरिक दृष्टि से भारत के लिए बहुत अधिक महत्वपूर्ण है।
भारत-भूटान तनाव पर एक नजर:-
- साल 2017 में हुआ डोकलाम विवाद, जिसमें चीन ने भूटान क्षेत्र में सड़क निर्माण का गंभीर प्रयास किया था, जिसमें भारत ने आक्रामक रूप से हस्तक्षेप किया।
- भूटान पर चीन का दबाव तेजी से बढ़ रहा है, जिससे भारत की रणनीतिक स्थिति भी भूटान के प्रति प्रभावित हो रही है।
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4. भारत की बांग्लादेश और म्यांमार से संबंधित सुरक्षा चुनौतियाँ: एक नजर
भारत-बांग्लादेश तनाव:-
- भारत और बांग्लादेश सीमा को कई स्थानों पर खुली मानते हुए अवैध प्रवास, तस्करी और सीमा पार अपराधों की समस्या भी तेजी के साथ बढ़ रही है।
- असम और पूर्वोत्तर राज्यों में घुसपैठ होना एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।
भारत-म्यांमार संबंध:-
- म्यांमार में (तख़्ता पलट) सैन्य शासन और अस्थिरता के कारण भी भारत की मिजोरम और मणिपुर सीमाओं पर शरणार्थियों की घुसपैठ में वृद्धि हुई है और उग्रवादियों की घुसपैठ भी तेजी से बढ़ी है।
5. भारत में बढ़ता आंतरिक विद्रोह और borders की सुरक्षा पर प्रभाव:-
पूर्वोत्तर भारत और जम्मू-कश्मीर में बढ़ते उग्रवाद और अलगाववाद की समस्याएँ borders पर गंभीर संकट को पैदा करती हैं। उग्रवादी संगठनों को बाहरी समर्थन मिलने की आशंका भी तेजी से बढ़ रही है।
6. भारत के समुद्री borders पर बढ़ती चुनौती:-
भारत के समुद्री border की लंबाई 7500 किलोमीटर लंबी है। चीन के बढ़ते नौसैनिक प्रभाव, हिंद महासागर में उसकी गतिविधियाँ और भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए समुद्री सुरक्षा भी एक बड़ा और गंभीर मुद्दा बना हुआ है।
समुद्री क्षेत्र में विशेष खतरे:-
- चीन का String of Pearls रणनीति का होना, जिसके तहत वह भारत को चारों ओर से घेरने की गंभीर कोशिश कर रहा है।
- समुद्री चोरी, ड्रग्स तस्करी और अवैध मछली पकड़ना भी भारत के लिए एक गंभीर चुनौती है।
इसका निष्कर्ष:-
भारत के borders सिर्फ एक भौगोलिक रेखा मात्र नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा का भी प्रतीक हैं। आज जब वैश्विक राजनीति अस्थिर तेजी से हो रही है, तब भारत के लिए borders की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हो गयी है। सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास, सैन्य सशक्तिकरण और कूटनीतिक संतुलन ही भारत को इस संकट से तेजी से बाहर निकाल सकते हैं। सामूहिक राष्ट्रीय चेतना, तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बीच भारत अपनी borders को सुरक्षित और स्थिर बना रहा है।