भारत स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में चीन से आगे।

भारत ने 2025 में चीन को पीछे छोड़ा: अमेरिका को स्मार्टफोन एक्सपोर्ट के व्यापार में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। जाने विस्तार से। Always Right or Wrong.

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अमेरिका को फोन निर्यात के मामले में भारत ने चीन को पीछे छोड़ा:-

वर्तमान समय में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसमें अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात के मामले में भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि भारत के लिए सिर्फ व्यापारिक या आर्थिक दृष्टिकोण से ही अच्छी नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक, रणनीतिक और तकनीकी क्षेत्र में भी उन्नति का प्रतीक है। स्मार्टफोन जैसे उच्च तकनीकी वाले उत्पाद का भारत में प्रमुख निर्यातक बनना मेक इन इंडिया अभियान और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलते रुझानों का भी अच्छा संकेत है।

भारत स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में चीन से आगे।

निर्यात के इस घटनाक्रम का संक्षिप्त विवरण:-

साल 2023-24 के दौरान भारत ने अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। भारत से अमेरिका को निर्यात किए गए स्मार्टफोनों का मूल्य लगभग 10 बिलियन डॉलर से अधिक पहुँच गया, जबकि चीन से इसका निर्यात घटकर 8.5 बिलियन डॉलर ही रह गया। भारत की यह सफलता न केवल वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में उसकी बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होता दिख रहा है।

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भारत स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में चीन से आगे।

भारत की यह बड़ी सफलता कैसे संभव हुई?

1. भारत का मेक इन इंडिया और पीएलआई योजनाओं का बढ़ता प्रभाव:-

भारत सरकार ने साल 2020 के बाद से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए Production Linked Incentive जैसी महत्वपूर्ण योजना लागू की। इसके तहत स्मार्टफोन निर्माताओं को उत्पादन के आधार पर अधिक-से-अधिक प्रोत्साहन दिया गया। इससे Apple, Samsung, Xiaomi, Lava जैसे बड़े ब्रांड्स ने भारत में अपने उत्पादन को तेजी से बढ़ाया।

2. Apple जैसी कंपनियों का झुकाव भारत की ओर बढ़ता हुआ:-

भारत में Apple के iPhone का निर्माण Foxconn, Wistron और Pegatron जैसे ताइवानी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स द्वारा तेजी और कुशलता के साथ किया जा रहा है। Apple ने चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए भारत में अपना निवेश बढ़ाया, जिससे iPhone 12, 13, 14 और 15 मॉडल का निर्माण भारत में कुशलता के साथ होने लगा।

3. अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का चीन प्लस वन वाला दृष्टिकोण:-

कोविड महामारी और अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के बाद वैश्विक कंपनियों ने चीन पर अपनी निर्भरता को कम करने का निर्णय लिया था। इसके चलते चीन प्लस वन रणनीति के तहत भारत को एक वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र के रूप में बाहरी कंपनियों द्वारा चुना गया।

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अमेरिका को भारत से फोन निर्यात में बढ़ती तेजी के मुख्य कारण:-

  • अमेरिका और भारत के बीच बेहतर और आगे बढ़ते व्यापारिक संबंध।
  • डॉलर के मुकाबले रुपये का स्थिर बना रहना, जिससे भारतीय वस्तुएँ का निर्यात सस्ता पड़ता है।

भारत की विशेष उपलब्धि के निम्नलिखित लाभ:-

1. भारत में रोजगार में वृद्धि:-

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उछाल से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। Foxconn, Dixon, Lava जैसी कंपनियाँ ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नौकरियाँ दे रही हैं।

2. विदेशी मुद्रा में बढ़ता लाभ:-

मोबाइल फोन जैसे हाई-टेक उत्पादों का निर्यात बढ़ने से भारत के चालू खाता घाटे में भी कमी आती है और विदेशी मुद्रा भंडार भी काफी हद तक मजबूत होता है।

3. तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत का कदम:-

भारत में सिर्फ असेंबलिंग ही नहीं, बल्कि धीरे-धीरे R&D, डिजाइनिंग और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में भी तेजी से विकास हो रहा है, जिससे देश तकनीकी रूप से भी आत्मनिर्भर बनेगा।

भारत स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में चीन से आगे।https://www.bhaskar.com/business/news/india-vs-china-us-apple-iphone-smartphone-exporter-report-135562697.html

वर्तमान में चीन की स्थिति में इतनी गिरावट क्यों?

1. अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध का बढ़ना:-

ट्रंप शासनकाल से ही अमेरिका और चीन के व्यापारिक संबंधों में काफी हद तक गिरावट आई है। चीन से आयात पर अधिक शुल्क लगाए गए थे, जिससे अमेरिकी कंपनियाँ अन्य विकल्पों की तलाश में लगीं रहीं और उन्होने भारत का रुख किया।

2. चीन पर कोविड लॉकडाउन का प्रभाव भी बढ़ा:-

चीन में साल 2020 से साल 2022 के बीच Zero Covid Policy के चलते बार-बार लॉकडाउन लगाए गए, जिससे सप्लाई चेन बड़े स्तर पर बाधित हुई और अमेरिका जैसे देशों ने आपूर्ति के दूसरे स्रोत ढूंढने की भरसक कोशिश शुरू कर दिए।

3. चीन की राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ता सेंसरशिप:-

चीन में व्यापार संचालन को लेकर कई बार अनिश्चितताएँ देखने को मिली हैं। विदेशी कंपनियाँ सेंसरशिप, डेटा प्राइवेसी और सरकारी हस्तक्षेप से भी काफी चिंतित हैं।

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भारत के लिए भविष्य की संभावनाएँ:-

भारत की यह सफलता केवल एक शुरुआत मात्र है। आने वाले वर्षों में भारत निम्नलिखित क्षेत्रों में और अधिक विस्तार कर सकता है:

  • स्मार्टफोन एक्सपोर्ट के अलावा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों जैसे टैबलेट, लैपटॉप, वियरेबल डिवाइसेज का निर्यात भी बड़े स्तर पर करेगा।
  • सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में भारत की आत्मनिर्भरता, जिसके लिए 76,000 करोड़ रुपए की एक महत्वपूर्ण योजना लाई गई है
  • 5G तकनीक, AI आधारित डिवाइस और IoT उपकरणों का बढ़ता उत्पादन और निर्यात में भी तेजी से इजाफा होगा।
  • भारत-अमेरिका टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप के अंतर्गत साझा R&D केंद्रों की भी स्थापना करने की योजना पर तेजी से काम हो रहा है।
भारत स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में चीन से आगे।

इसका निष्कर्ष: एक संक्षिप्त बिन्दु

भारत का अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात में चीन को पीछे छोड़ना केवल एक आंकड़ा मात्र नहीं, बल्कि एक नई आर्थिक और रणनीतिक दिशा का भी महत्वपूर्ण संकेत है। यह भारत की निर्माण क्षमता, तकनीकी दक्षता और वैश्विक भूमिका को भी दर्शाता है। यदि सरकार, उद्योग और तकनीकी क्षेत्र मिलकर लंबी अवधि की रणनीति अपनाएँ, तो यह सफलता न केवल स्थायी रहेगी, बल्कि भारत को विश्व का प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातक भी बना सकती है।

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