हीरो ग्रुप का फर्श से अर्श तक का सफर।

हीरो ग्रुप को फर्श से अर्श तक पहुंचाने वाले थे बृजमोहन लाल मुंजाल, बहुत संघर्ष भरा रहा उनका सफर। 2025 में हेरो ग्रुप कहाँ खड़ा? जाने विस्तर से। Always Right or Wrong.

बृजमोहन लाल मुंजाल : सब्जी बेचने से लेकर हीरो ग्रुप की स्थापना तक का प्रेरणादायी जीवनपरिचय

भारत के औद्योगिक इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने बहुत साधारण शुरुआत से असाधारण सफलता की इबारत लिखी। बृजमोहन लाल मुंजाल उन्हीं में से एक थे। एक साधारण सब्जी बेचने वाले युवक से देश के सबसे बड़े टू-व्हीलर निर्माता “हीरो ग्रुप” के निर्माता बनने तक का उनका सफर मेहनत, दूरदर्शिता, ईमानदारी और जोखिम उठाने की क्षमता का जीता-जागता उदाहरण है।

हीरो ग्रुप का फर्श से अर्श तक का सफर।

प्रारंभिक जीवन और संघर्ष

बृजमोहन लाल मुंजाल का जन्म 1 जुलाई 1923 को पाकिस्तान के कमालिया (तत्कालीन पंजाब प्रांत) में एक साधारण हिंदू परिवार में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से खेती-किसानी करता था, लेकिन आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। बचपन से ही वे मेहनती, जिज्ञासु और व्यापारिक दृष्टिकोण रखने वाले थे।

कम उम्र में ही उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ अपने पिता की मदद करना शुरू कर दिया। घर की आमदनी सीमित थी, इसलिए उन्होंने 15 वर्ष की आयु में स्थानीय बाजार में सब्जियां बेचकर परिवार की मदद करनी शुरू की। यही से उनके जीवन में व्यापार का पहला अनुभव जुड़ा।

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विभाजन का असर और भारत आगमन

1947 में भारत विभाजन के समय मुंजाल परिवार को अपना पैतृक घर, जमीन-जायदाद और व्यवसाय छोड़कर भारत आना पड़ा। यह समय बेहद कठिन था। वे अपने तीन भाइयों – दयानंद, सत्यानंद और ओमप्रकाश के साथ लुधियाना (पंजाब) में आकर बस गए।

यहां शुरू से कुछ भी नहीं था — न पूंजी, न तैयार बाजार, न संसाधन। लेकिन बृजमोहन लाल के पास जो था, वह था कड़ी मेहनत और कुछ नया करने की ललक।

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साइकिल पार्ट्स से सफर की शुरुआत

लुधियाना आने के बाद उन्होंने और उनके भाइयों ने 1948 में “हीरो” नाम से साइकिल पार्ट्स का छोटा सा कारोबार शुरू किया। शुरुआत में वे हैंडल, फोर्क, रिम और स्पोक जैसे पुर्जे बनाते और बेचते थे।

कंपनी का नाम हीरो इसलिए रखा गया, क्योंकि वे चाहते थे कि यह नाम छोटा, यादगार और सकारात्मक भाव वाला हो। धीरे-धीरे उनकी गुणवत्ता और ईमानदारी के कारण लुधियाना में उनकी पहचान बनने लगी।

हीरो साइकिल्स का उदय

1956 में उन्होंने हीरो साइकिल्स लिमिटेड की स्थापना की और खुद साइकिल निर्माण में उतर गए। उनका लक्ष्य था – “अच्छी गुणवत्ता, उचित कीमत और समय पर आपूर्ति”।

1975 तक हीरो साइकिल्स दुनिया के सबसे बड़े साइकिल निर्माता बन गए। यह उपलब्धि उन्होंने निरंतर मेहनत, उत्पाद की विश्वसनीयता और बाजार की मांग को सही समय पर समझने की क्षमता से हासिल की।

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मोटरसाइकिल उद्योग में प्रवेश

1980 के दशक में भारत में टू-व्हीलर की मांग तेजी से बढ़ रही थी। विदेशी कंपनियां बाजार में आ रही थीं, लेकिन बृजमोहन लाल मुंजाल ने महसूस किया कि भारतीय उपभोक्ता के लिए टिकाऊ, किफायती और ईंधन-सक्षम मोटरसाइकिल की आवश्यकता है।

1984 में उन्होंने जापान की होंडा मोटर कंपनी से साझेदारी की और हीरो होंडा मोटर्स लिमिटेड की स्थापना की। उनकी पहली मोटरसाइकिल “सीडी100” 1985 में लॉन्च हुई, जिसने भारतीय बाजार में तहलका मचा दिया। इसकी माइलेज, मजबूती और किफायती कीमत ने इसे हर घर की पसंद बना दिया।

व्यावसायिक सिद्धांत और प्रबंधन शैली

बृजमोहन लाल मुंजाल के व्यावसायिक सिद्धांत बेहद स्पष्ट थे:

  1. गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं।
  2. ग्राहक को सर्वोपरि मानना।
  3. कर्मचारियों को परिवार की तरह सम्मान देना।
  4. जोखिम लेने से न डरना, लेकिन पूरी तैयारी के साथ।

वे अक्सर कहते थे – “हम उत्पाद नहीं बेचते, हम विश्वास बेचते हैं।” यही कारण था कि उनके नेतृत्व में हीरो ग्रुप न केवल साइकिल और मोटरसाइकिल, बल्कि ऑटो पार्ट्स, फाइनेंस और अन्य क्षेत्रों में भी मजबूत ब्रांड बन गया।

हीरो ग्रुप का विस्तार

समय के साथ हीरो ग्रुप ने अपने कारोबार को कई क्षेत्रों में फैलाया:

  • हीरो साइकिल्स – दुनिया का सबसे बड़ा साइकिल निर्माता।
  • हीरो होंडा (अब हीरो मोटोकॉर्प) – दुनिया का सबसे बड़ा दोपहिया वाहन निर्माता।
  • हीरो माजेस्टिक – स्कूटर निर्माण।
  • हीरो फिनकॉर्प – वित्तीय सेवाएं।
  • हीरो मोटोस्पोर्ट्स – अंतरराष्ट्रीय रेसिंग में भागीदारी।
हीरो ग्रुप का फर्श से अर्श तक का सफर।

पुरस्कार और सम्मान

बृजमोहन लाल मुंजाल को उनके योगदान के लिए कई सम्मान मिले:

  • 2001 में पद्म भूषण।
  • 1994 में “बिजनेस मैन ऑफ द ईयर” (Business Standard)।
  • विभिन्न विश्वविद्यालयों से मानद उपाधियां।
  • दुनिया के सबसे बड़े साइकिल निर्माता के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज।

सादगी और मानवीयता

अपार सफलता के बावजूद वे बेहद सादगीपूर्ण जीवन जीते थे। वे कर्मचारियों के साथ बैठकर भोजन करते, उनकी समस्याएं सुनते और व्यक्तिगत मदद भी करते थे। उनके लिए व्यवसाय केवल लाभ कमाने का साधन नहीं, बल्कि समाज की सेवा का माध्यम था।

अंतिम समय और विरासत

बृजमोहन लाल मुंजाल का निधन 1 नवंबर 2015 को 92 वर्ष की आयु में हुआ। उनके निधन के बाद भी हीरो ग्रुप उनकी विचारधारा और सिद्धांतों पर चलता आ रहा है।

https://www.forbesindia.com/article/leaderhip-awards-2013/brijmohan-lall-munjal-a-hero-for-lifes/36351/1

आज हीरो मोटोकॉर्प हर साल लाखों मोटरसाइकिल बनाकर न केवल भारत, बल्कि 40 से अधिक देशों में निर्यात करता है। बृजमोहन लाल का जीवन यह साबित करता है कि कठिन परिस्थितियां इंसान को रोक नहीं सकतीं, अगर उसके पास ईमानदारी, मेहनत और सही दिशा में प्रयास करने का संकल्प हो।

निष्कर्ष

बृजमोहन लाल मुंजाल की कहानी केवल एक व्यापारी की सफलता की गाथा नहीं, बल्कि यह एक प्रेरक संदेश है –
“साधारण शुरुआत से असाधारण मंज़िल पाना संभव है, बशर्ते मेहनत, धैर्य और ईमानदारी को अपना साथी बना लिया जाए।”
उन्होंने दिखाया कि सब्जी बेचने वाला युवक भी विश्व का सबसे बड़ा टू-व्हीलर निर्माता बन सकता है।

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