1947: भारत और पाकिस्तान के बीच लड़े गए युद्ध, 1947, 1965, 1971 व 1999 बुरी तरह हार हुई। जाने विस्तार से।
1947: भारत पाकिस्तान युद्ध से शुरू हुआ बटवारा:-
1947: भारत और पाकिस्तान युद्धों का इतिहास 1947 के बाद से ही शुरू होता है क्योंकि 1947 में ही भारत और पाकिस्तान का बटवारा हुआ था। इस बटवारे की भेट लाखों लोगो की जान चढ़ी। वर्तमान परिस्थिति को देखें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम हमले के जवाब में सशस्त्र बलों को पूरी छूट दी है यदि आगे युद्ध होता है तो इसे एक बड़े रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा सकता है। भारत पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति को समझने के लिए भारत-पाकिस्तान युद्धों के ऐतिहासिक को गहराई से जानने की जरूरत है।
1947 के बाद भारत-पाकिस्तान युद्धों के इतिहास पर एक नजर:-
1. सन 1947-48 का पहला कश्मीर युद्ध:-
भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ा गया पहला युद्ध अक्टूबर 1947 में जम्मू-कश्मीर रियासत को लेकर शुरू हुआ था। पाकिस्तान का समर्थन करने वाले कबायलियों ने कश्मीर पर हमला कर दिया, जिसके बाद महाराजा हरि सिंह ने भारत की ओर मदद का हाथ बढ़ाया और साथ ही भारत में विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए।
भारतीय सेना ने हस्तक्षेप करने के बाद कश्मीर से हमलावरों को पीछे हटाया, लेकिन 1947 के युद्ध को रुकवाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में ले जाया गया, जहां से जनवरी 1949 में यूएन के हस्तक्षेप से युद्धविराम हुआ और नियंत्रण रेखा (LoC) की स्थापना की गयी। हालांकि, पाकिस्तान ने जो पाक अधिकृत कश्मीर पर कब्जा किया था।
2. सन 1965 का दूसरा भारत-पाकिस्तान युद्ध:-
इस युद्ध का मुख्य कारण कश्मीर ही था। इस युद्ध में पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन जिब्राल्टर’ के तहत कश्मीर घाटी में घुसपैठ की योजना बनाई, जिसका मुख्य उद्देश्य सिर्फ स्थानीय मुस्लिम आबादी को भारत के खिलाफ भड़काना था। लेकिन पाकिस्तान की यह योजना विफल रही और भारत ने कड़ी जवाबी कार्रवाई करते हुए पश्चिमी मोर्चे लाहौर से सियालकोट तक सैन्य कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
युद्ध करीब एक महीने से अधिक चला और अंततः सोवियत संघ की मध्यस्थता से ताशकंद में 1966 में एक समझौता हुआ, जिसके अंतर्गत दोनों देश अपनी-अपनी सीमाओं पर वापस लौट गए।
3. सन 1971 का भारत पाकिस्तान युद्ध जिसमे बांग्लादेश का निर्माण हुआ:-
भारत-पाक युद्ध 1971 सबसे निर्णायक और ऐतिहासिक माना जाता है। इसका मुख्य कारण पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में राजनीतिक और मानवाधिकारों का गंभीर संकट था। पश्चिमी पाकिस्तान यानि अबका पाकिस्तान की सरकार द्वारा पूर्वी पाकिस्तान के लोगों पर भेदभाव के साथ अत्याचार किए जा रहे थे, जिससे लाखों बंग्लादेशी शरणार्थी अपनी जान बचाकर भारत में आ गए। भारत ने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में हस्तक्षेप किया और 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया, जिसके बाद भारत ने अपनी ओर से जवाबी कार्रवाई की।
यह युद्ध केवल 13 दिन में ही समाप्त हो गया और 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान की सेना ने अब के बांग्लादेश में आत्मसमर्पण कर दिया। लगभग 90,000 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बनाया गया। इस युद्ध के परिणामस्वरूप बांग्लादेश एक स्वतंत्र देश बनकर उभरा। जिसमे भारत की प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की विशेष भूमिका थी।
4. कारगिल युद्ध 1999 का समय:-
कारगिल युद्ध पाकिस्तान की सेना और उसके समर्थित घुसपैठियों द्वारा कारगिल की ऊंचाइयों पर कब्जा जमाने के लिए हुआ था। यह युद्ध उस समय में हुआ जब दोनों देशों ने परमाणु परीक्षण किए हुए कुछ समय ही हुआ था, और वैश्विक स्तर पर स्थिति काफी तनावपूर्ण भरी थी। भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत पहाड़ों से सभी घुसपैठियों को खदेड़ दिया और क्षेत्र पर पुनः नियंत्रण स्थापित कर लिया। इस युद्ध में भारत को हर तरह से जीत मिली।
भारत-पाकिस्तान तनाव की वर्तमान वजह उरी, पुलवामा तथा पहलगाम जैसे हमले:-
2016 में उरी में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक की। इसके बाद 2019 में पुलवामा आतंकी हमला हुआ जिसमे CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे, जिसका जवाब भारत ने बालाकोट एयर स्ट्राइक करके दिया।
22 अप्रैल, 2025 में पहलगाम में 27 पर्यटकों को उनका धर्म पूछकर गोली मार दी जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सशस्त्र बलों को पूरी छूट दी हुई है इसका मतलब होता है कि भारत की रक्षा नीति में न्यूनतम प्रतिक्रिया से सक्रिय आक्रामकता की ओर एक और कदम होगा और भारत इसका करारा जवाब अवश्य देगा। यह नीति स्पष्ट संदेश देती है कि भारत आतंकवाद को हर तरह से करारा जवाब देने और उनका सर्वनाश करने में पूर्ण रूप से तैयार है।
सेना को खुली छूट और इसके आगामी परिणाम:-
सेना को खुली छूट का मतलब साफ है कि सेना को कार्रवाई के लिए राजनीतिक स्तर पर किसी प्रकार की बाधा नहीं है। सेना को रणनीतिक और सामरिक स्तर पर हर तरह के निर्णय लेने की स्वतंत्रता है। इसका सीधा असर भारत-पाकिस्तान के संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ेगा। लेकिन यहाँ सवाल भारत के सम्मान का है। इतना शक्तिशाली देश जिसे कुछ आतंकी दूसरे देश से आकार भारत में 27 पर्यटकों को मौत के घाट उतार दें तो यह भारत देश के लिए बहुत शर्म की बात है।
इस घटना के संभावित परिणाम:
-
सीमा पर बढ़ता तनाव: आगे नियंत्रण रेखा (LoC) पर गोलाबारी और घुसपैठ करने में बढ़ोतरी हो सकती है।
-
आंतरिक सुरक्षा के लिए सतर्कता: भारत के अन्य हिस्सों में भी आतंकी गतिविधियों कहीं बढ़ न जाएँ उसके लिए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो जाएंगी।
-
भारत पर बढ़ता राजनयिक दबाव: अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भारत-पाकिस्तान दोनों ही देशों पर शांति बनाए रखने का दबाव लगातार बन रहा है।
-
भारत की सैन्य श्रेष्ठता का प्रदर्शन: भारत यह दिखायेगा कि अब वह किसी भी हमले का जवाब आगे बढ़कर देगा।
बढ़ते संघर्ष का निष्कर्ष:-
भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्धों का इतिहास दिखाता है कि हर युद्ध के पीछे सिर्फ कश्मीर और आतंकी घटनाएं प्रमुख कारण रही हैं। भारत ने अब तक संयम के साथ जवाब देने की नीति अपनाई हुई थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह रुख बदला है, अब हर घटना का जवाब सेना द्वारा बहुत बड़े स्तर पर दिया जा रहा है। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और अब सेना को खुली छूट जैसे कदम इसी बदलाव का संकेत हैं कि आगे कुछ तो होने वाला है।
यदि पहलगाम में हुआ हमला भारत की संप्रभुता और सैनिक प्रतिष्ठानों को लक्षित करता है, तो इसका जवाब देना अनिवार्य है। लेकिन ऐसे जवाबी कदमों में हर तरह के प्रभाव का भी ध्यान रखना होगा। युद्ध केवल अंतिम विकल्प होना चाहिए अगर दूसरे विकल्पों से जवाब दिया जा सके तो पहले उन विकल्पों को अपनाना चाहिए क्योंकि युद्ध की हालत में देश को आर्थिक और जान माल की हानि होती है।