2025 में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन की बैठक का महत्व, SCO का गठन कब हुआ, इसके सदस्य देशों पर विस्तृत वर्णन। Always Right or Wrong.
शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) संगठन क्या है और इसे किस कारण बनाया गया ?
शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन यानि SCO “शंघाई सहयोग संगठन” एक क्षेत्रीय अंतरसरकारी संगठन है जिसकी स्थापना वर्ष 2001 में की गयी थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग को मजबूत बनाए रखना, क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना, आतंकवाद का मुकाबला करना और आर्थिक, सांस्कृतिक, तथा राजनीतिक सहयोग को भी मजबूती से आगे ले जाना शामिल है। SCO आज पूरे विश्व के सबसे बड़े और प्रभावशाली बहुपक्षीय संगठनों में से एक है, जिसकी सदस्य देशों में लगभग दुनिया की आधी आबादी और एक तिहाई से अधिक भू-भाग आता है।
SCO की उत्पत्ति के कारण और इसकी स्थापना की पृष्ठभूमि पर एक नजर:-
1. सबसे पहले शंघाई फाइव की शुरुआत साल 1996 में की गयी:-
SCO की नींव वर्ष 1996 में चीन, रूस, कज़ाखस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान द्वारा रखी गई। सबसे पहले यह पाँच देशों का समूह ‘शंघाई फाइव’ कहलाता था और इसका मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित था:
- पड़ोसी देशों के साथ आपसी सीमा विवादों का समाधान आपसी बातचीत से सुलझाना।
- देशों के क्षेत्रीय सुरक्षा में सहयोग करना।
- देशों की सीमा पर सैन्य विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ावा देना।
2. उसके बाद उज़्बेकिस्तान का एससीओ में जुड़ना और SCO का पुनर्गठन वर्ष 2001 में:-
वर्ष 2001 में उज़्बेकिस्तान इस समूह में शामिल किया गया और इसी साल 15 जून 2001 को कज़ाखस्तान के अस्ताना में हुए एससीओ SCO की स्थापना की गई थी। शंघाई में हुए उद्घाटन सम्मेलन में एससीओ के चार्टर पर भी हस्ताक्षर हुए थे।
SCO की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या था ?
SCO की स्थापना करने का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित था:
- विश्व में आतंकवाद और चरमपंथ से लड़ना – मध्य एशिया और उसके आसपास के क्षेत्रों में आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद की समस्याएं तेजी से बढ़ने के कारण इसकी स्थापना की गयी थीं।
- सहयोगी देशों की सीमा सुरक्षा और विश्वास निर्माण को मजबूत करना – चीन और मध्य एशियाई देशों के बीच लगभग 7000 किमी से अधिक लंबी सीमा रेखा थी, जहां विवाद की आशंका बनी हुई थी। SCO के माध्यम से इन्हें शांति से सुलझाया जाना भी इस संगठन का मुख्य उद्देश्य था।
एससीओ के सदस्य देशों की संख्या और इसका ढांचा:-
संगठन के स्थायी सदस्य देश, साल 2023 तक:-
- चीन प्रमुख देश
- रूस प्रमुख देश
- भारत (2017 में शामिल हुआ)
- पाकिस्तान (2017 में शामिल हुआ)
- कज़ाखस्तान प्रमुख देश
- किर्गिस्तान प्रमुख देश
- ताजिकिस्तान प्रमुख देश
- उज़्बेकिस्तान प्रमुख देश
- ईरान (2023 में पूर्ण सदस्य बना था)
इस संगठन के पर्यवेक्षक देशों की सूची:-
- अफगानिस्तान पर्यवेक्षक देश
- बेलारूस पर्यवेक्षक देश
- मंगोलिया पर्यवेक्षक देश
इसके संवाद साझेदार देश:-
- श्रीलंका, तुर्की, अजरबैजान, नेपाल, कंबोडिया और सऊदी अरब इस संगठन के संवाद साझेदार देश हैं।
भारत और एससीओ के बीच कैसा संबंध:-
भारत वर्ष 2005 में पर्यवेक्षक के रूप में एससीओ में शामिल हुआ था और वर्ष 2017 में भारत को इस संगठन का पूर्ण सदस्य बनाया गया। भारत के लिए एससीओ संगठन का महत्व निमन्वत है:
- भारत की आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई – पाकिस्तान और अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति को देखते हुए भारत के लिए इस संगठन के उद्देश्यों के साथ आतंकविरोधी सहयोग अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन गया है।
- भारत का सेंट्रल एशिया से संपर्क होना – एससीओ संगठन में भारत के शामिल होने से मध्य एशिया के संसाधन संपन्न देशों से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर भारत को मिला है।
- भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण बिन्दु – कजाखस्तान, रूस और ईरान जैसे देशों के माध्यम से भारत के लिए ऊर्जा की भरपूर उपलब्धता सुनिश्चित हो सकती है।
- भारत का चीन और पाकिस्तान से कूटनीतिक संवाद होना – एससीओ मंच के माध्यम से भारत इन दोनों पड़ोसी देशों के साथ भी नियमित रूप से संवाद कर सकता है।
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इसका निष्कर्ष:- एक महत्वपूर्ण बिन्दु
एससीओ एक ऐसा मंच प्रदान करता है जो आज की वैश्विक राजनीति में सामूहिक सुरक्षा, बहुपक्षीय सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बहुत अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह संगठन न केवल एशिया की महाशक्तियों; जैसे भारत, चीन और रूस देशों को एक साथ लाता है, बल्कि छोटे-छोटे मध्य एशियाई देशों को भी वैश्विक फलक पर स्थान प्रदान करता है।
कूटनीतिक दृष्टि से भारत के लिए एससीओ एक रणनीतिक अवसर प्रदान करता है जिससे वह मध्य एशिया, रूस और ईरान जैसे महत्वपूर्ण देशों के साथ अपने व्यापारिक, सुरक्षा और ऊर्जा संबंधों को बहुत अधिक मजबूत कर सकता है। हालाँकि अंदरूनी मतभेद और कार्यान्वयन की चुनौतियाँ भी सामने हैं, फिर भी एससीओ की प्रासंगिकता आने वाले समय में और अधिक मजबूती से आगे बढ़ेगी।