IMF

IMF यानि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष क्या है और इसे आप कैसे समझते हैं ? 2025 Always Right or Wrong.

आईएमएफ यानि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष क्या है और यह किस तरह से काम करता है? आइये जाने:- 

आर्थिक वैश्वीकरण और वैश्विक वित्तीय स्थिरता की दुनिया को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष “IMF – International Monetary Fund” एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अग्रसर संस्था है।  आईएमएफ़ की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैश्विक आर्थिक सहयोग और विकास को बढ़ावा देने के मुख्य उद्देश्य से की गई। वर्तमान में IMF दुनिया भर के लगभग सभी देशों की आर्थिक नीतियों को स्थिर बनाए रखने में, संकट के समय ऋण देने के साथ-साथ और संरचनात्मक सुधारों में सहयोग देने में भी मुख्य भूमिका निभा रहा है।

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IMF की स्थापना कब और कैसे हुई:-

IMF की स्थापना ब्रेटन वुड्स सम्मेलन के समय में वर्ष 1944 में हुई थी और इसने आधिकारिक रूप से 27 दिसंबर 1945 से कार्य करना शुरू किया। आईएमएफ़ का मुख्यालय वॉशिंगटन डी.सी., अमेरिका में अवस्थित है। IMF की स्थापना का मुख्य उद्देश्य: अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग को ज्यादा-से-ज्यादा बढ़ावा देना, विनिमय दरों में स्थिरता को बनाए रखना और सदस्य देशों के भुगतान संतुलन यानि Balance of Payment की बढ़ती समस्याओं से उबरने में देशों की मदद करना है।

आईएमएफ़ की सदस्यता और इसका संगठनात्मक ढांचा किस प्रकार कार्य करता है:-

IMF के वर्तमान में 190 से अधिक सदस्य देश हैं। कोई भी देश IMF की सदस्यता तभी ले पाता है जब वह विश्व बैंक का भी सदस्य प्राप्त किया हुआ हो। IMF की निर्णय प्रक्रिया में सदस्य देशों की वोटिंग करने की शक्ति उनके कोटे पर ही आधारित मुख्यतः आधारित होती है, जो उस देश की अर्थव्यवस्था के मूलभूत ढांचे और वैश्विक व्यापार में उसकी भूमिका पर मुख्य रूप से निर्भर करता है।

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अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख संगठनात्मक अंग:-

  1. बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का कार्य होता है कि वह सर्वोच्च नीति-निर्माता निकाय है, जिसमें प्रत्येक सदस्य देश का एक प्रतिनिधि के तौर पर कार्य करता है।
  2. कार्यकारी बोर्ड होता है, जिसमें 24 सदस्यों का बोर्ड IMF की रोजमर्रा की गतिविधियों की अच्छे और सुचारु रूप से निगरानी करता है।
  3. प्रबंध निदेशक होता है जो मुख्यतः IMF का प्रमुख होता है और कार्यकारी बोर्ड की अध्यक्षता भी ग्रहण करता है। यह पद ज़्यादातर यूरोप के ही किसी नागरिक को दिया जाता है।

IMF के प्रमुख अंगों पर एक नजर:-

IMF मुख्यरूप से 2 तरीके से ही कार्य करता है, जैसे:

1. वित्तीय सहायता देना:-  

जब किसी देश को विदेशी मुद्रा संकट का सामना करना पड़ता है या भुगतान असंतुलन यानि Balance of Payment Deficit जैसी किसी भी समस्याओं से कोई देश जूझ रहा होता है, तो IMF उस देश को ऋण यानि Loan मुहय्या करता है। इस सहायता के लिए देश को आईएमएफ़ की शर्तों का भी कड़ाई से पालन करना होता है, जिन्हें आम तौर पर संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रम यानि Structural Adjustment Program भी कहा जाता है। जैसे: भारत ने वर्ष 1991 में विदेशी मुद्रा संकट के समय आईएमएफ़ से $2.2 अरब डॉलर का ऋण लिया था। बदले में भारत को उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण यानि LPG reforms को अपने देश में लागू करना पड़ा था।

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2. आईएमएफ़ द्वारा निगरानी किया जाना:-  

आईएमएफ़ सदस्य देशों की आर्थिक और मौद्रिक नीतियों की स्वतः निगरानी भी करता है। इसके अंतर्गत वह समय-समय पर सदस्य देशों की जीडीपी वृद्धि, मुद्रास्फीति, राजकोषीय घाटा, ऋण स्तर, चालू खाता संतुलन आदि को भी सही प्रकार से जांच करता है। आईएमएफ़ प्रत्येक देश के लिए Article IV Consultation Reports भी जारी करता है जो उस देश की आर्थिक स्थिति का विश्लेषण भी कहा जा सकता है।

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https://www.investopedia.com/terms/i/imf.asp

IMF की आलोचनाएँ भी होती हैं:-

आईएमएफ़ के कार्यप्रणाली पर कई बार सवाल भी खड़े होते रहे हैं:-

  1. आईएफ़एम की कठोर शर्तें होती हैं, आईएमएफ़ द्वारा दिए गए ऋण के साथ जो भी शर्तें जुड़ी होती हैं, वे अक्सर सामाजिक कल्याण योजनाओं में कटौती, सब्सिडी हटाने, सरकारी खर्च में कमी जैसे कदमों को मुख्य रूप से शामिल करती हैं, जिससे आम जनता काफी हद तक प्रभावित होती है।
  2. अमेरिका और यूरोप का वर्चस्व ज्यादा होता है, आईएमएफ़ की निर्णय प्रक्रिया में अमेरिका और यूरोपीय देशों का सबसे अधिक दबदबा है, क्योंकि उनके पास अधिक कोटा और वोटिंग पावर सबसे ज्यादा होती है।
  3. एक ही मॉडल को सब जगह लागू किया जाता है, आईएमएफ़ अक्सर एक ही आर्थिक सुधार मॉडल को विभिन्न देशों में लागू करने की सलाह भी समय समय पर देता है, बिना यह समझे कि हर देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी अलग-अलग हो सकती है।
  4. लोकतांत्रिक जवाबदेही की कमी होना भी शामिल है, आईएमएफ़ को कभी-कभी ‘अलोकतांत्रिक’ संस्था के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि उसके फैसलों का असर लाखों लोगों पर मुख्य रूप से पड़ता है, लेकिन उन फैसलों में आम जनता की कोई भी सहायक भूमिका नहीं होती है।
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इसका निष्कर्ष: एक नजर में

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानि आईएमएफ़ वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता और विकास को सुनिश्चित करने के लिए एक केंद्रीय स्तंभ के रूप में भी सटीक कार्य करता है। इसके कार्यों से लाखों लोगों की जीवन-शैली भी काफी हद तक प्रभावित होती है। हालांकि आईएमएफ़ की नीतियाँ कई बार आलोचनाओं के घेरे में भी रहती हैं, फिर भी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में इसकी भूमिका को कभी नकारा नहीं जा सका है। आईएमएफ़ का भविष्य इस बात पर भी निर्भर करेगा कि वह अपनी कार्यशैली को अधिक लोककल्याणकारी, पारदर्शी और उत्तरदायी किस प्रकार बना रहा है और विकासशील देशों की वास्तविक ज़रूरतों को समझकर उनका किस प्रकार से सहयोग कर  रहा है?

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