Chhangur Baba: छांगुर बाबा कैसे बन गया 500 करोड़ के धर्मांतरण रैकेट का सबसे बड़ा रहनुमा? क्या है मामला? जाने विस्तार से। Always Right or Wrong.
chhangur baba (छांगुर बाबा) मामला में नया क्या और भारत में लगातार बढ़ता धर्मांतरण:-
भारत एक बहुधार्मिक, बहुजातीय और बहुसांस्कृतिक देश रहा है। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और अन्य बहुत से धार्मिक समुदाय एक साथ रहते हैं। लेकिन हाल के कुछ वर्षों में धर्मांतरण से जुड़े मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं, जो एक संवेदनशील और विवादास्पद मुद्दे बनते जा रहे हैं। जिसमें मुख्य रूप से “छांगुर बाबा” जैसे मामलों ने इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर खड़ा कर दिया है।
छांगुर बाबा का क्या है पूरा मामला ?
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से जुड़े इस चर्चित मामले में छांगुर बाबा नामक एक व्यक्ति पर आरोप है कि वह एक धर्मांतरण सिंडिकेट का हिस्सा था, जिसमें विदेशी फंडिंग के जरिए बड़े पैमाने पर गरीब और दलित वर्गों का ईसाई धर्म में धर्मांतरण कराया जा रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, छांगुर बाबा के पास विदेशों से फंड आ रहे थे, जिनका उपयोग चर्च निर्माण, बाइबल वितरण, धर्म-प्रचारकों की भर्ती और प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण के लिए किया जा रहा था।
सरकार की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि छांगुर बाबा के नेटवर्क का विस्तार केवल यूपी राज्य तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसका जाल छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार और मध्य प्रदेश आदि बहुत से राज्यों तक फैला हुआ था। इसके तहत गरीबों को पैसों, नौकरी, मुफ्त शिक्षा, इलाज और सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर लोगों का धर्म परिवर्तन का बहुत बड़ा रैकेट चलाया जा रहा था।
भारत में धर्मांतरण के पीछे बहुत से कारण:-
भारत में देखा जाये तो धर्मांतरण कोई नया विषय नहीं है, लेकिन इसके पीछे बहुत से जटिल सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारण भी देखने को मिलते हैं:
1. देश में आर्थिक असमानता और गरीबी का कारण:-
बहुसंख्यक धर्मांतरण मुख्य रूप से उन वर्गों में होता है जो आर्थिक और सामाजिक रूप से काफी कमजोर हैं। आदिवासी, दलित और वंचित वर्गों के लोगों को धन, नौकरी, शिक्षा, इलाज और अन्य सहायता का प्रलोभन देकर देश के अलग-अलग क्षेत्रों में धर्मांतरण कराया जाता है। छांगुर बाबा जैसे मामलों में भी यह बात सामने आई है कि विदेश से आने वाला पैसा गरीबों को लुभाने के लिए बहुत बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है।
2. भारत में सामाजिक भेदभाव और जातिवाद का होना:-
भारत में अभी भी दलितों और पिछड़ी जातियों के साथ बहुत बार भेदभाव और छुआछूत की घटनाएं होती रहती हैं। इससे आहत होकर कुछ लोग ऐसे धर्मों की ओर आकर्षित होने लगते हैं, जहां सामाजिक समानता और आत्म-सम्मान का दावा किया जाता हो। ईसाई या बौद्ध धर्म को अपनाने वाले बहुत से लोग बताते हैं कि उन्हें वहां सम्मान और बराबरी का अनुभव कराया जाता है।
3. भारत में धार्मिक संगठनों की सक्रियता होना और विदेशी सहायता होना:-
ईसाई मिशनरी संस्थान, इस्लामिक चैरिटी संगठन और कुछ अन्य संस्थाएं विदेशों से फंडिंग पाकर भारत में धर्मांतरण की घटनाओं को चलाती हैं। चर्च, मस्जिद और अन्य धार्मिक ढांचे स्थापित करके ये संस्थाएं धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक सेवा के माध्यम से लोगों को अपनी ओर प्रभावित भी करती हैं।
4. कानूनी की कमजोरियां और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी होना:-
भारत में धर्मांतरण विरोधी कानून कुछ राज्यों में लागू किया गया है, लेकिन उनकी प्रभावशीलता पर अब भी सवाल उठते रहते हैं। कई बार जांच एजेंसियों की ढिलाई, राजनीतिक संरक्षण और न्यायिक प्रक्रियाओं की धीमी गति से भी इन सभी गतिविधियों को ज्यादा बढ़ावा मिलता रहता है।
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उत्तर प्रदेश में छांगुर बाबा जैसा मामला क्यों गंभीर है ?
छांगुर बाबा मामले की गंभीरता इसलिए भी अधिक हो जाती है क्योंकि यह केवल एक व्यक्ति का ही नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का प्रतिनिधित्व भी करता है जो विदेशी फंडिंग पर काम करता है। इस नेटवर्क का उद्देश्य न केवल धर्मांतरण को बढ़ावा देना है, बल्कि यह भारत की सामाजिक संरचना और धार्मिक संतुलन को भी बड़े स्तर पर प्रभावित कर रहा था।
धर्मांतरण मामले में भारत सरकार और राज्यों की प्रतिक्रिया:- एक नजर
धर्मांतरण पर लगाम लगाने के लिए कई राज्य सरकारों ने धर्मांतरण विरोधी कानून बनाए हुए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड हैं। इन कानूनों के तहत जबरन, धोखाधड़ी या प्रलोभन देकर धर्म बदलवाने को बड़े अपराध की श्रेणी में लिया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने छांगुर बाबा मामले में बहुत तेजी से सख्ती दिखाई है और विदेश से धन प्राप्त करने की जांच प्रवर्तन निदेशालय यानि ED और इंटेलिजेंस ब्यूरो यानि IB द्वारा पूरे रैकेट पर करवाई की जा रही है। साथ ही, ऐसे मामलों से निपटने के लिए एक निगरानी तंत्र भी सरकार द्वारा विकसित किया जा रहा है।
धर्मांतरण रोकने का समाधान क्या हो?
भारत में धर्मांतरण की तेजी के साथ बढ़ती प्रवृत्ति को नियंत्रित करने के लिए केवल कानूनी उपाय ही पर्याप्त नहीं हो सकते। इसके लिए एक व्यापक दृष्टिकोण को भी अपनाने की आवश्यक है:
1. देश में सामाजिक समरसता का विकास होना:-
जातिगत भेदभाव, छुआछूत और सामाजिक बहिष्कार जैसी कुरीतियों को देश से खत्म करने की आवश्यकता है ताकि कोई भी व्यक्ति सम्मान के लिए धर्मांतरण न करे।
2. गरीब तबके का आर्थिक विकास और समावेशन होना:-
गरीब, दलित और आदिवासी वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाए जाने की आवश्यकता है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में भी उनकी पहुँच अच्छे से सुनिश्चित करना धर्मांतरण के मुख्य कारणों को समाप्त करेगा।
3. देश में धार्मिक संगठनों की निगरानी होना:-
विदेश से फंडिंग लेने वाले धार्मिक संस्थानों की सरकार द्वारा निगरानी की जानी चाहिए ताकि यह अच्छे से सुनिश्चित किया जा सके कि वे फंड का उपयोग केवल सामाजिक सेवा के लिए ही कर रहे हैं, न कि दूसरे समुदायों का जबरन धर्मांतरण के लिए।
4. देश में जनजागरण अभियान को बढ़ावा देना:-
सरकार और सामाजिक संगठनों को मिलकर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है ताकि लोगों को संविधान में प्रदत्त अधिकारों और धर्मांतरण के निहितार्थों की सही जानकारी हो सके और वे धर्मांतरण से बच सकें।
इसका निष्कर्ष:- संक्षिप्त रूप में
उत्तर प्रदेश में छांगुर बाबा मामला भारत में धर्मांतरण की एक बड़ी और चिंताजनक तस्वीर को देश के सामने दिखाता है। यह केवल एक व्यक्ति का मामला मात्र नहीं है, बल्कि एक संगठित नेटवर्क, विदेशी फंडिंग और सामाजिक असमानता से उपजे धार्मिक असंतोष की तस्वीर को भी उजागर करता है। भारत जैसे विविधता वाले देश में, जहां हर धर्म और समुदाय को सम्मान दिया जाना चाहिए, वहां जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन की प्रवृत्ति होना न केवल संविधान के खिलाफ बात है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने के लिए भी गंभीर खतरा है।