पश्चिम एशिया यानि मध्य-पूर्व (Middle East) में शांति से भारत पर क्या असर होगा (2025) ? भारत में कच्चे तेल की कीमत पर क्या असर होगा ? – महंगा या सस्ता।
पश्चिम एशिया में शांति से भारत को कितना लाभ होगा:-
पश्चिम एशिया, जिसे सामान्यतः मध्य-पूर्व यानि Middle East भी कहा जाता है, इसे भारत की विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक संबंधों और सामरिक हितों की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। यह भूभाग पश्चिम क्षेत्र में ईरान, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान, इज़राइल और लेबनान आदि देशों के क्षेत्रीय संगठन से मिलकर बना है। इन देशों में लंबे समय से चल रहे संघर्ष, धार्मिक उग्रवाद, इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों की सक्रियता, यमन युद्ध, ईरान-सऊदी तनाव, इज़राइल-फलस्तीन विवाद आदि ने पूरे क्षेत्र की स्थिति को अस्थिर कर रखा है। वर्तमान की ऐसी स्थिति में यदि इस क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित होती है, तो भारत को भविष्य में बहुआयामी लाभ हो सकते हैं।
1. भारत की ऊर्जा सुरक्षा में स्थायित्व होना:-
भारत द्वारा अपनी कुल तेल और गैस आवश्यकताओं का लगभग 80% से अधिक आयात किया जाता है, जिसमें बहुत बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया के क्षेत्र से आता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत जैसे देश भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता देश हैं। युद्ध या अशांति की स्थिति में तेल की आपूर्ति बाधित होती ही है, ये बात किसी से छिपी नहीं है। जिस कारण भारत को ऊर्जा संकट, मूल्य वृद्धि और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है।
स्थायी शांति से लाभ:
- तेल और गैस की आपूर्ति स्थिर बनी रहेगी।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम में वृद्धि नहीं होगी वह स्थिर रहेंगे, जिससे भारत का आयात बिल कम होगा।
- भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों की भविष्य में दीर्घकालिक योजना बना सकेगा।
2. प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और प्रेषण धन (Remittances) एक गंभीर समस्या:-
भारत के लगभग 90 लाख से अधिक भारतीय पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों में काम के सिलसिले में कार्यरत हैं। ये प्रवासी लोग भारत को हर वर्ष लगभग 100 अरब डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा भेज रहे हैं, जो देश के विदेशी मुद्रा भंडार का एक अहम हिस्सा अदा करता है।
स्थायी शांति से क्या लाभ:
- स्थायी शांति से प्रवासी भारतीयों की जान-माल की सुरक्षा रहेगी।
- प्रवासी लोगों के रोज़गार सुरक्षित रहेंगे, जिससे विदेशी मुद्रा प्राप्ति निरंतरता बनी रहेगी।
- भारतीय श्रमिकों की संख्या और रोजगार के अवसरों में काफी वृद्धि होगी।
3. स्थायी शांति से व्यापार और निवेश में वृद्धि होगी:-
भारत और पश्चिम एशिया के बीच व्यापारिक संबंध बहुत गहरे हैं। UAE और सऊदी अरब जैसे देश भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार भी हैं। भारत फार्मा, टेक्सटाइल, खाद्य, ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग गुड्स का निर्यात बड़ी मात्रा में करता है, जबकि तेल और गैस का आयात भी बड़ी मात्रा में करता है।
स्थायी शांति से कितना लाभ:-
- भारत के व्यापार मार्ग सुरक्षित होंगे।
- भारत को निवेश के नए अवसर प्रदान करना जो इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, फार्मा और कृषि क्षेत्र आदि में होंगे।
- भारत और गल्फ देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते यानि FTA जैसे करारों को तेज गति मिलेगी।
4. स्थायी शांति के भूराजनीतिक और रणनीतिक लाभ पर एक नजर:-
भारत और पश्चिम एशिया के सभी प्रमुख देशों; जैसे: ईरान, सऊदी अरब, इज़राइल और फलस्तीन आदि से भारत संतुलित संबंध बनाए हुए है। यह कूटनीतिक संतुलन तभी कारगर हो सकता है जब क्षेत्र में स्थायी शांति और संवाद का वातावरण होगा।
स्थायी शांति से कितना लाभ:-
- भारत अपने सम्बन्धों को बनाए रखने के लिए पश्चिम एशिया क्षेत्र के साथ शांति के एक भागीदार और मध्यस्थ की भूमिका अच्छे से निभा सकता है।
- पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय तनाव कम होने से भारत-ईरान जैसे संबंधों को ओर भी ज्यादा मजबूती मिलेगी, जैसे चाबहार पोर्ट परियोजना आदि।
- पश्चिम एशिया में शांति से भारत का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और साख में बढ़ोतरी होगी, विशेषकर यदि वह क्षेत्रीय कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता होगा तो।
5. स्थायी शांति से संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा:-
पश्चिम एशिया में भारत के करोड़ों मुस्लिम नागरिक आते हैं जो हर वर्ष हज और उमरा के लिए मक्का-मदीना जाते हैं। इसके अलावा, भारत और अरब देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध भी प्रगाढ़ रहे हैं।
स्थायी शांति से कितना लाभ:-
- स्थायी शांति से धार्मिक यात्रा सुविधाजनक, सुरक्षित और सुलभ हो सकेगी।
- मध्य-पूर्व में स्थायी शांति से पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में बढ़ौतरी होगी।
- भारत में पश्चिम एशियाई पर्यटकों का आगमन तेजी से बढ़ेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी काफी बल मिलेगा।
इसका निष्कर्ष:-
पश्चिम एशिया में स्थायी शांति भारत के लिए आर्थिक, कूटनीतिक, रणनीतिक और मानवीय दृष्टिकोण से अत्यधिक लाभकारी सिद्ध हुई है। तेल की आपूर्ति की स्थिरता से लेकर प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, आतंकवाद के खतरे में कमी से लेकर व्यापार और निवेश के नए अवसरों में भी स्थायी शांति से भारत को व्यापक लाभ होता है। साथ ही, भारत की वैश्विक छवि, ऊर्जा नीति और विदेश व्यापार की स्थिरता भी इसी क्षेत्र की स्थिरता से काफी हद तक जुड़ी हुई है। इसलिए भारत को चाहिए कि वह पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों को अपना समर्थन खुलकर दे, ताकि विभिन्न पक्षों के साथ संवाद बनाए रखा जा सके और मानवता, विकास और स्थायित्व के पक्ष में अपनी भूमिका को अच्छे से निभाया जा सकें।