भारतीय नौसेना की बढ़ी ताकत

भारतीय नौसेना: आईएनएस तमाल (2025) हुआ भारतीय नौसेना में शामिल। भारत की नेवी के क्षेत्र में बढ़ेगी ताकत।

भारतीय नौसेना में आईएनएस तमाल के शामिल होने से सेना की ताकत में एक महत्वपूर्ण बढ़ोतरी:-

इसका परिचय और पृष्ठभूमि:

आईएनएस तमाल (एफ71), जिसे तमाल नाम से भी जाना जाता है। यह एक तलवार-क्लास की उन्नत तुशिल-क्रीवक III फ्रिगेट है। इसे रूस के कालिनिनग्राद स्थित यांटर शिपयार्ड में बनाकर भारतीय नौसेना द्वारा 1 जुलाई 2025 को कमीशन किया गया। आईएनएस तमाल को भारत की अंतिम विदेशी निर्मित युद्धपोत माना गया है। इसकी शुरुआती परियोजना साल 2018‑2019 में प्रस्तावित किया गया था। अंततः यह रूस से आयात की हुई ऐसी आखिरी नौका बनी, क्योंकि भविष्य में भारत विदेशी शिपबिल्डिंग पर निर्भरता छोड़कर आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

भारतीय नौसेना की बढ़ी ताकत

आईएनएस तमाल की तकनीकी क्षमताएँ और सेंसर: विशेष

आईएनएस तमाल में अत्याधुनिक प्रकार की तकनीक शामिल है; जैसे:-

  • सीओजीएजी गैस टरबाइन प्रणालियाँ जो 44,000 एचपी  यानि 33,000 kW की कुल शक्ति के साथ, 30 नॉट्स यानि 56 किमी/घं की अधिकतम गति से व 4,850 समुद्री मील की रेंज के साथ संभव है।
  • इसमे उन्नत सेंसर सूट फ़्रेगेट एम2ईएम 3डी रडार, एचयूएमएसए-एनजी एमके II सोनार, लाडोगा इनर्शियल नेविगेशन और रटेप/पुमा फायर कंट्रोल सिस्टम लगे हुए हैं।
  • इसमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्रणाली टीके-25ई-5 ईडबल्यू, पीके-10/केटी-216 डिकॉय लॉन्चर, ईओ/आईआर सेंसर और नेटवर्क‑सेंट्रिक कमांड प्लेटफॉर्म शामिल है।

यह संयोजन चार-आयामी युद्ध (सर्फ़ेस, एयर, अंडरवाटर, एलेक्ट्रोनिक) में बहुपक्षीय संचालन को संभव बनाता है।

भारतीय नौसेना की बढ़ी ताकत

आईएनएस तमाल की हथियार प्रणालियाँ:-

आईएनएस तमाल अपनी क्षेत्र की विश्वसनीय ताकत और मल्टी-डोमेन से लैस क्षमताओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है:

आईएनएस तमाल की हथियार प्रणाली आईएनएस तमाल का विवरण
इसमें 24 × Shtil‑1 वीएलएस एसएएमएस 70 किमी सीमा वाले वर्टिकल लॉन्च सतह‑से‑वायु मिसाइलें
8 × ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलें (Mach 2.8–3), सतह और जमीनी लक्ष्य दोनों के लिए सक्षम
इसमे 1 × 100 mm A‑190E/AK‑190 नवल गन लंबे रेंज की आग क्षमता
2 × AK‑630 CIWS निकट सुरक्षा के लिए घातक सीआईडब्ल्यूएस
2 × 533 mm टॉरपीडो ट्यूब + आरबीयू ‑6000 एएसडबल्यू  रॉकेट गहरा जल सुरक्षा और पनडुब्बी रोध क्षमता
हेलिकोप्टर डेक Ka‑28/Ka‑31 या एचएएल ध्रुव एएसडब्ल्यू और एईडबल्यू हेलीकॉप्टर के लिए समर्थन

आईएनएस तमाल में देशीय सामग्री और आत्मनिर्भर भारत पर एक नजर:-

भारत के आईएनएस तमाल में लगभग 26% हिस्सा देशीय उपकरणों का शामिल है, जिन्हें भारत के प्रमुख रक्षा उद्यमों; जैसे ब्रह्मोस एरोस्पेस, बीईएल, केलट्रोन, नोवा (टाटा), इत्यादि के द्वारा विकसित किया गया।
यह न केवल भारत के निर्यात पर निर्भरता को कम करेगा, बल्कि भविष्य में गोवा शिपयार्ड में निर्माणाधीन Triput-क्लास जैसी अगली श्रृंखलाओं के लिए क्षमता को भी विकसित करेगा।

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इसके रणनीतिक महत्व:-

  1. वृहदीदृष्टि का विस्तार:- Western Fleet “Sword Arm” में शामिल होकर आईएनएस तमाल भारतीय महासागरीय क्षेत्र (आईओआर) में बल उत्पादक सिद्ध होगी।

कमान और शिपबिल्डिंग में भागीदारी:-

  • कमीशनिंग में Vice Admiral संजय जसजित सिंह (Western Naval Command) मुख्य अतिथि रहे।
  • 250 से अधिक भारतीय दल ने रूस में कठोर प्रशिक्षण शीतकालीन सत्र में ग्रहण किया एवं निर्माण निगरानी में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
  • इस परियोजना के नियंत्रण में Directorate of Ship Production और Controller of Warship Production & Acquisition शामिल किया गया हैं।

इसकी परिचालन क्षमता और फ्यूचर रोडमैप पर एक नजर:-

  • इसमें नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध और इंटीग्रेटेड सिस्टम आईएनएस तमाल को मल्टी-डेमेंशनल ऑपरेशन हेतु इसे ज्यादा भरोसेमंद बनाते हैं; जैसे: ड्रोन, उपग्रह मार्गदर्शन, real-time डेटा इंटीग्रेशन आदि।
  • इसमें विदेशी निर्मित श्रृंखला का अंत होने के साथ ही, भारत भविष्य के लिए गोवा शिपयार्ड में लगातार आईएनएस Triput जैसी घरेलू फ्रिगेट्स का निर्माण बड़े स्तर पर करेगा, जो आत्मनिर्भरता को और बढ़ावा देगा।
  • इसे सीएनओपी, एबीएचवाईएएस‑II जैसी स्वदेशी मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से अपडेट किया जाना चाहिए ताकि प्रयोगात्मक व इनोवेशन मोर्चे पर भारतीय नौसेना को हर तरह से तैयार रखा जा सके।
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आईएनएस तमाल से सामरिक और राजनयिक संदेश

  • आईएनएस तमाल का तैनाती IOR में भारत की अभिजात समुद्री शक्ति की व्याख्या को दर्शाता है; जैसे चीन एक तरह से शक्तियों को एक प्रतिरोधक मौजूदगी दिखाने का प्रयास कर रहा है।
  • यह भारत और रूस रक्षा संबंधों की गहराई को भी गंभीरता से दर्शाता है लेकिन साथ ही यह भी संकेत देता है कि अब अगला चरण मेक इन इंडिया पर मुख्य रूप से आधारित होगा; जैसा कि मंदारिणी या एलएचआर जैसी युद्धपोत निर्माण योजनाओं से यह स्पष्ट रूप से दिखता है।
  • यह आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत का एक निर्णायक क़दम है, क्योंकि भविष्य में 10 से ज्यादा  फ्रिगेट्स समान तकनीकी और लॉजिस्टिक कॉमनालिटी के साथ भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा।

इसका निष्कर्ष:-

आईएनएस तमाल ने भारतीय नौसेना को कई स्तरों पर विशेष ताकत प्रदान की है:-

  • तकनीकी दृष्टि से देखा जाये तो यह मिसाइल सिस्टम, सेंसर, युद्धक क्षमता और नेटवर्क प्रधान युद्ध प्रणाली लेकर आता है।
  • रणनीतिक रूप से अगर देखें तो यह IOR में भारत की पुरज़ोर समुद्री उपस्थिति को दर्शाता है।
  • औद्योगिक एवं आत्मनिर्भर दृष्टि से देखने पर पता चलता है कि यह भारत के स्वदेशी शिपबिल्डिंग और रक्षा उत्पादन को एक नया मोड़ प्रदान करता है।

इसके कमिशनिंग के बाद युद्धपोत भारतीय नौसेना के Sword Arm Western Fleet को तथा इसे ज्यादा सशक्त व शक्तिशाली बनाएगी। विश्व स्तर पर भारत की छाप को IOR से पार ले जाकर अंडमान सेवाओं, हिंद-प्रशांत तटों तक विस्तृत रूप से पहुँचा सकती है। साथ ही यह रूस के साथ पुराने रक्षा संबंधों के मध्य Make in India की आधारशिला को भी मजबूती से रखती है।

भारतीय नौसेना की बढ़ी ताकत

आईएनएस तमाल केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारतीय नौसेना की आत्म‑निर्भरता, तकनीकी क्षमता, सामरिक विस्तार व विदेश नीति की शक्ति का जीवंत प्रतीक भी दिखाती है।

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https://www.thehindu.com/news/national/ins-tamal-commissioned-in-kaliningrad-marks-end-of-foreign-built-indian-navy-warships/article69760222.ece

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