भारत में पिछले एक साल में 3 बार हादसे का शिकार हुआ जगुआर फाइटर जेट, एयरफोर्स में शामिल हुए कितना समय हुआ इस जेट को। Always good or bad.
भारत में पिछले 5 महीने में 3 जगुआर हुए क्रैश: इसके कारण, चिंता और इतिहास पर विस्तार से विश्लेषण:-
पिछले कुछ महीनों में देश में भारतीय वायुसेना के लिए एक चिंता का विषय बनकर उभर रहा है हमारा फाइटर जेट जगुआर। फाइटर जेट का लगातार दुर्घटनाग्रस्त होना देश के लिए एक निराशा का विषय है। पिछले 5 महीनों में 3 जगुआर लड़ाकू विमान क्रैश होना एक दुखद घटना है, जिससे वायुसेना की संचालन क्षमता, इन विमानों की तकनीकी स्थिति और आधुनिकीकरण की दिशा पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
क्या है भारत का जगुआर विमान ?
जगुआर एक ट्विन-इंजन वाला एयरक्राफ्ट है, यह ग्राउंड अटैक और डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक वाला एयरक्राफ्ट है। इसे मुख्यतः निम्न ऊंचाई वाले क्षेत्रों पर दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने और हवाई हमले करने के लिए उसी प्रकार से डिजाइन किया गया था। इसका निर्माण ब्रिटिश-फ्रांसीसी कंपनी के संयुक्त उपक्रम SEPECAT द्वारा किया गया था। भारतीय वायुसेना ने इसे साल 1979 में सेना में शामिल किया था और यह तब से भारत के युद्ध कौशल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। इसे भारतीय वायुसेना में शमशेर के नाम से भी जाना जाता है।
देश में पिछले 5 महीने में हुई दुर्घटनाएँ:-
भारतीय वायुसेना की ओर से इन सभी दुर्घटनाओं की पुष्टि की गई है और सभी मामलों में पायलट को पूरी तरह से सुरक्षित बाहर निकलने में सफलता मिली है, लेकिन जेट के नुकसान ने देश की चिंता जरूर बढ़ा दी है।
- जेट की पहली दुर्घटना – पश्चिम बंगाल में एक प्रशिक्षण मिशन के दौरान हुआ क्रैश।
- जेट की दूसरी दुर्घटना – गुजरात के कच्छ इलाके में उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी के कारण गिरा विमान।
- जेट की तीसरी दुर्घटना – राजस्थान के पोखरण रेंज में अभ्यास के दौरान जेट नीचे आ गिरा था।
जेट की इन सभी दुर्घटनाओं में तकनीकी गड़बड़ी को प्राथमिक कारण के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन विस्तृत कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी रिपोर्ट का अभी भी इंतजार है।
जगुआर की दुर्घटनाओं के संभावित कारणों पर एक नजर:-
- जेट का पुराना डिजाइन होना और प्लेटफॉर्म की कमी:
जगुआर साल 1960 के दशक में डिजाइन किया हुआ था। भले ही भारत ने इसके कई अपग्रेड वर्जन किए हों, लेकिन इसकी मूल तकनीक अब लगभग 50 वर्षों से अधिक पुरानी हो चुकी है। - जेट में स्पेयर पार्ट्स की कमी होना:
ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा मूल उत्पादन बंद करने के कारण भारत को स्पेयर पार्ट्स की मूलभूत कमी का सामना करना पड़ रहा है। HAL यानि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने कई पार्ट्स का स्वदेशीकरण भी किया, लेकिन ये हमेशा पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाते।
जगुआर का भारत में क्या रहा इतिहास:-
- जगुआर के शामिल होने की पृष्ठभूमि:
वर्ष 1970 के दशक में भारत को एक ऐसे लड़ाकू विमान की ज़रूरत महसूस हुई जो दुश्मन की सीमा में घुसकर सटीकता के साथ बमबारी कर सके और कम ऊंचाई पर कुशल उड़ान भर सके। इसके लिए फ्रांस और ब्रिटेन के संयुक्त विमान जगुआर का चुनाव किया गया। - इसका भारत में हुआ निर्माण:
भारत ने कुछ विमानों को सीधे तौर पर आयात किया और बाकी का HAL ने लाइसेंस उत्पादन शुरू किया था। करीब 160 से अधिक जगुआर भारत में तैयार किए जा चुके हैं।
क्या वास्तव में जगुआर अब उड़ान के योग्य रहा है?
देश भर में यह सवाल अब तेजी से उठ रहा है। हालांकि वायुसेना ने इसे साल 2030 तक सेवा में रखने की योजना बनाई हुई थी, लेकिन लगातार दुर्घटनाओं और स्पेयर की कमी ने इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
जगुआर के विकल्प और भविष्य की रणनीति पर एक नजर:-
- तेजस और राफेल जैसे विमान होंगे आधुनिक विकल्प:
भारत ने HAL तेजस को स्वदेशी विकल्प के रूप में भी तैयार किया है। साथ ही, फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान भारत को मिल चुके हैं, जो जगुआर से कई गुना अधिक सक्षम और टिकाऊ हैं। - देश में AMCA और MRFA प्रोग्राम:
भविष्य में भारत 5वीं पीढ़ी का फाइटर AMCA और मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट MRFA के लिए वैश्विक टेंडर की सम्पूर्ण योजना पर काम कर रहा है, जो पुराने विमानों को रिप्लेस करेंगे और नए विमान देश को मिलेंगे।
इसका निष्कर्ष:-
जगुआर भारतीय वायुसेना का एक महत्वपूर्ण और गौरवशाली हिस्सा रहा है। इसने दशकों तक देश की सुरक्षा में अहम भूमिका तो निभाई ही, साथ ही इसकी तकनीकी सीमाएँ खुलकर सामने देखने को मिल रही हैं। पिछले 5 महीनों में 3 दुर्घटनाएँ इस बात का स्पष्ट संकेत दे रही हैं कि समय रहते फैसला लेना आवश्यक हो गया है। वायुसेना के लिए यह समय है उसके पुराने और गौरवशाली इतिहास को सम्मानपूर्वक विदाई देने और आधुनिक विमानों को मुख्य रूप से प्राथमिकता देने का।