2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार: भारत में किसान इतनी ज्यादा संख्या में क्यों कर रहे आत्महत्या ? इसके आंकड़े, कारण और निवारण पर एक नजर ……… Always Right and Wrong.
किसान की आत्महत्या का सच: देश में किसानों की आत्महत्या का सच: कारण, सच्चाई और समाधान :-
भारत कृषि प्रधान देश है, जहां देश की लगभग 60 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर ही निर्भर है। लेकिन दुर्भाग्य इस बात का है कि भारत में हर साल हजारों किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो जाते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानि NCRB के आंकड़ों के अनुसार, साल 2023 में देश भर में लगभग 11,290 किसानों और खेतिहर मजदूरों ने अपनी जान दे ही। यह आंकड़ा एक गंभीर त्रासदी को दिखाता है जो वर्षों से देश के सामाजिक ताने-बाने को झकझोर देता है।
1. किसानों द्वारा आत्महत्या करना एक गंभीर सामाजिक संकट:-
किसानों द्वारा आत्महत्या करना केवल आर्थिक संकट की कहानी मात्र नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक विफलता, प्राकृतिक आपदाओं, कर्ज़ के बोझ, सामाजिक उपेक्षा और मानसिक तनाव की संयुक्त परिणति को भी दर्शाता है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्यप्रदेश और आंध्रप्रदेश आत्महत्याओं के सबसे अधिक प्रभावित राज्य में से एक हैं।
2. भारत में इनती बड़ी संख्या में क्यों करते हैं किसान आत्महत्या?
(i) किसानों पर कर्ज़ का बोझ:-
किसानों की आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण उनपर बैंक द्वारा बढ़ता कृषि ऋण है। छोटे और सीमांत किसान, जिनके पास 1-2 हेक्टेयर से भी कम भूमि है, वे खेती के लिए निजी साहूकारों, बैंकों या माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं से कर्ज़ ले लेते हैं। सूखा, बाढ़, फसल खराब होने या बाजार में उचित मूल्य न मिल पाने के कारण यह कर्ज़ चुकाना मुश्किल होता जाता है और एक समय ऐसा आता है कि किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाता है।
(ii) किसानों के लिए फसल बीमा और राहत योजनाओं में विफलता:-
भारत सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की हुई है, लेकिन जमीनी हकीकत उसके उलट है, बीमा कंपनियाँ अक्सर किसानों के दावे पूर्ण रूप से खारिज कर देती हैं या भुगतान में ही वर्षों लगा देती हैं। जिससे किसान को राहत नहीं मिलती और वह आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाता है।
(iii) देश में बढ़ती आबादी का दबाव और भूमिहीनता होना:-
भारत में कृषि भूमि का आकार लगातार घट ही रहा है। परिवार बढ़ने पर जमीन के टुकड़े भी छोटे होते जा रहे हैं, जिससे उत्पादन भी तेजी से घटता है और लाभ में भी गिरावट आती है। इससे खेती वर्तमान में टिकाऊ पेशा नहीं रह गया है।
(iv) देश में मंडी और बाजार व्यवस्था का असफल होना:-
किसानों को उनकी उपज और लागत का न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP नहीं मिल पाता। उन्हें बिचौलियों के माध्यम से औने-पौने दाम पर अपनी फसल को बेचना पड़ता है। यह आर्थिक शोषण, Farmer को हताश ही करता है।
(v) देश में जलवायु परिवर्तन का होना और बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं:-
भारत में जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा की अनियमितता होना, बाढ़ आना और सूखा जैसे कारण आम हो गए हैं। जिस कारण Farmer की पूरी मेहनत एक रात की बारिश या गर्मी में ही बर्बाद हो जाती है।
(vi) सरकारी तंत्र की उपेक्षा होना:-
बहुत बार ऐसा होता है कि Farmers की समस्याओं पर स्थानीय प्रशासन गंभीरता से ध्यान नहीं देता है। जिस कारण कृषि अधिकारी तक पहुँचना बहुत मुश्किल हो जाता है और योजनाओं का लाभ भी दलाल ही खा जाते हैं।
(vii) किसान पर मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक दबाव का होना:-
देश में कर्ज़दार Farmer को परिवार, समाज और बैंक से लगातार दबाव झेलना पड़ता है। जब किसान को कोई रास्ता नहीं दिखता, तो वह आत्महत्या जैसे भयावह आउट गलत कदम की ओर बढ़ जाता है।
3. सरकारी प्रयास कितने सफल और कितने असफल ?
(i) कर्ज़ माफी की योजनाएँ:-
कई राज्य सरकारों ने किसानों के लिए कर्ज़ माफी की योजनाएँ चलाई हुई हैं, लेकिन ये सिर्फ अस्थायी समाधान हैं। जमीनी स्तर पर बहुत बार Farmers तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुँचता।
(ii) सरकार द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना:-
इस योजना के तहत हर साल Farmers को 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। परंतु यह राशि एक Farmer की सालाना जरूरतों का 5% भी नहीं हो पाती हैं।
(iii) सरकार द्वारा e-NAM और कृषि सुधार योजना पर एक नजर:-
सरकार ने हर बार डिजिटल मंडियों को बढ़ावा देने की बात की, लेकिन ज़्यादातर ग्रामीण किसान अभी भी डिजिटल साक्षरता से काफी दूर हैं।
5. इस समस्या का क्या समाधान है ?
(i) किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी:-
सरकार द्वारा MSP को कानूनी मान्यता देना चाहिए, ताकि Farmer को लागत से ऊपर निश्चित मूल्य मिल सके और वह गलत कदम उठाने से बचे।
(ii) देश में कृषि ऋण प्रणाली का पुनर्गठन हो :-
देश में बैंकों को छोटे Farmers को बिना किसी जमानत कर्ज़ देने की व्यवस्था करनी चाहिए और साथ ही निजी साहूकारों की लूट पर भी रोक लगानी चाहिए जो भी साहूकार गलत करे उसे कठोर सजा मिलनी चाहिए।
(iii) किसानों के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण बीज, खाद और कीटनाशक दवाओं की व्यवस्था:-
Farmers को स्थानीय स्तर पर सरकार द्वारा सही कृषि सलाह और सामग्री का सरल इंतजाम करना चाहिए, ताकि वे कर्ज़ के जाल में न फँसे।
6. देश में मीडिया और समाज की भूमिका: एक नजर में
Farmers की आत्महत्या पर केवल रिपोर्टिंग करना ही काफी नहीं है। मीडिया और सामाजिक संगठनों को किसानों के मुद्दे को सरकार के सामने उठाना चाहिए तथा सरकार पर नीतिगत दबाव बनाया जाना चाहिए। इसके साथ-साथ Farmers को गरिमा के साथ जीने की सामाजिक मान्यता भी दी जानी चाहिए।
इसका निष्कर्ष:-
देश में Farmers की आत्महत्या केवल एक व्यक्तिगत संकट नहीं है, बल्कि यह पूरे राष्ट्र की कृषि नीति, सामाजिक दृष्टिकोण और प्रशासनिक कार्यप्रणाली का एक प्रतिबिंब भी है। जब तक Farmer को सम्मान, स्थिर आय और आत्मनिर्भरता का वातावरण सरकार द्वारा नहीं दिलाया जाएगा, तब तक यह त्रासदी ऐसे ही चलती रहेगी। एक सशक्त भारत की नींव तभी बन सकती है, जब उसका अन्नदाता सुरक्षित, सुखी और आत्मनिर्भर बना होगा। देश के किसान को आत्महत्या नहीं, बल्कि एक स्थायी समाधान चाहिए। देश में जय जवान, जय किसान का नारा तभी सार्थक और सही होगा, जब Farmer की जान की कीमत सिर्फ उसकी फसल से नहीं, बल्कि उसकी जिंदगी की गरिमा से भी आँकी जानी चाहिए।
https://www.bbc.com/hindi/india/2013/01/130128_indian_farmers_suicide_pk