एशियाई विकास बैंक यानि ADB ने भारत के वित्त वर्ष 2025-26 के लिए विकास दर के अनुमान को घटाकर 6.5 फीसद पर किया, एडीबी ने इसे अमेरिकी टैरिफ के बढ़ते प्रभाव का हवाला दिया। Always Right or Wrong.
एशियाई विकास बैंक यानि ADB ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 6.5 प्रतिशत पर कर दिया:-
इसकी प्रस्तावना:- एक नजर में
एशियाई विकास बैंक अर्थात Asian Development Bank – ADB ने जुलाई 2025 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के पूर्वानुमान में संशोधन करते हुए उसे घटाकर 6.5 फीसद पर कर दिया है। इससे पहले एशियाई विकास बैंक ने अप्रैल 2025 में भारत के लिए साल 2024-25 की वृद्धि दर का अनुमान 7 प्रतिशत पर रखा था। देखा जाये तो यह परिवर्तन वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों, मानसून की अनिश्चितताओं तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए इस स्तर पर किया गया है। यह कदम भारत सहित पूरे एशिया क्षेत्र की समग्र आर्थिक दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
ADB (एशियाई विकास बैंक का संक्षिप्त परिचय:-
ADB एक क्षेत्रीय स्तर का विकास बैंक है जिसकी स्थापना वर्ष 1966 में हुई थी। इसका मुख्यालय मनीला, फिलीपींस में स्थित है। एशियाई विकास बैंक, एशिया और प्रशांत क्षेत्र में समावेशी आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने वाला मुख्य बैंक है। भारत ADB का एक महत्वपूर्ण सदस्य भी है और ADB की परियोजनाओं में शीर्ष भागीदारों में भी शामिल है।
भारत के लिए ADB का नया अनुमान पर एक नजर:-
1. एडीबी पर मुद्रास्फीति का बढ़ता दबाव:-
ADB के अनुसार भारत में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का होना और खराब मानसून की संभावना से खाद्य मुद्रास्फीति का तेजी के साथ बढ़त हो सकती है। मुख्यतः प्याज, टमाटर, दाल और अनाज जैसी वस्तुएं पहले से ही महंगी हुई हैं। इससे उपभोक्ता खर्च पर प्रभाव भी तेजी से पड़ सकता है और घरेलू मांग में भी तेजी से गिरावट आ सकती है।
2. मॉनसून की अनिश्चितता का होना भी मुख्य कारण:-
भारत की कृषि अर्थव्यवस्था ज़्यादातर मॉनसून पर ही निर्भर करती है। साल 2025 का मानसून अब तक औसत से काफी कमजोर रहा है, जिससे खरीफ फसलों की बुआई भी काफी प्रभावित हो सकती है। इससे ग्रामीण आय, मांग और कृषि आधारित उद्योगों पर भी इसका असर पड़ेगा। ADB ने इसे मुख्य कारणों में से एक होना बताया है।
3. वैश्विक व्यापार में भी तेजी से मंदी आना:-
अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निर्यात पर भी मंदी का काफी असर देखने को मिल रहा है। ADB के अनुसार मध्य पूर्व, यूरोप और अमेरिका के बाजारों में भी मांग काफी कमजोर हुई है, जिससे भारत का निर्यात भी तेजी से प्रभावित हो रहा है।
ADB की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
- साल 2025 के लिए वृद्धि दर 6.5% है जो पहले 7% पर थी।
- साल 2026 के लिए अनुमान 6.7% माना जा रहा है।
- महंगाई दर का अनुमान भी 5.1% पर रहने का अनुमान है।
- निजी निवेश में सुधार का होना भी सार्वजनिक निवेश के सहारे उम्मीद की किरण बन सकता है।
- ग्रामीण मांग में कमजोरी का होना विशेषकर मानसून के कारण होता है।
- उद्योगों की वृद्धि से विनिर्माण क्षेत्र में सुधार लेकिन कृषि पर दबाव भी बढ़ा है।
एडीबी पर प्रभाव और इसकी संभावनाएं: एक नजर में
1. इससे रोजगार भी प्रभावित होगा:-
वृद्धि दर में कमी से रोजगार सृजन की गति भी काफी धीमी हो सकती है। खासकर MSME क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्रों में नौकरियों की कमी देखने को भी मिल सकती है।
2. राजकोषीय घाटे का बढ़ना:-
सरकार का कर संग्रह भी काफी धीमा हो सकता है, जिससे बजट घाटा बढ़ने का भी खतरा होगा। इससे सामाजिक योजनाओं पर खर्च में कटौती की संभावना भी तेजी से बढ़ेगी।
3. निवेशक की धारणा भी बदलेगी:-
ADB जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के आकलन से विदेशी निवेशकों की धारणा भी काफी हद तक प्रभावित हो सकती है, विशेषकर पोर्टफोलियो निवेश (FPI) पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।
4. उपभोक्ता की मांग भी प्रभावित होगी:-
मुद्रास्फीति और ब्याज दरों की वजह से उपभोक्ता खर्च पर भी इसका असर पड़ेगा, जिससे FMCG और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में बिक्री काफी हद तक धीमी हो सकती है।
भारत के लिए उम्मीद की किरण:-
हालांकि अनुमान में गिरावट दिख रही है, लेकिन ADB ने यह भी स्वीकार कर लिया है कि:
- भारत की मध्य और दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाएं भी काफी मजबूत हुई हैं।
- डिजिटल बुनियादी ढांचे, युवा जनसंख्या और नीति स्थिरता से नवाचार और निवेश को भी काफी हद तक बल मिलेगा।
- ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन के विकल्प के रूप में भारत की भूमिका भी तेजी से बढ्ने की संभावना है।
इसका निष्कर्ष: संक्षिप्त रूप में
ADB द्वारा भारत की आर्थिक वृद्धि दर को घटाकर 6.5 फीसद किया जाना एक महत्वपूर्ण आर्थिक संकेत तो है ही जो देश को अपने संरचनात्मक और मौसमी मुद्दों की ओर देखने को भी तेजी से मजबूर करता है। हालांकि यह अनुमान थोड़ी निराशा जरूर प्रदान करता है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था में लचीलापन और दीर्घकालिक सुधार की क्षमता भी बड़े स्तर पर बनी हुई है।
भारत सरकार को उद्योग और वित्तीय संस्थानों को मिलकर एक साथ कृषि, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और उपभोक्ता मांग के क्षेत्रों को भी मजबूती लाने के प्रयास तेजी से करने होंगे। तभी भारत विश्व स्तर पर अपनी विकास की गति को बरकरार रखने का पूरा प्रयास कर पाएगा और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना भी अच्छे से साकार हो सकेगा।