delhi में पुराने वाहन बंद होंगे

Delhi में Old Vehicle Ban (2025): Delhi में पुरानी गाड़ियों पर सरकार का नया फैसला! अब सीज नहीं होंगी गाड़ियां

Delhi में पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों पर होगा पूरी तरह से बैन: पेट्रोल पंप से नहीं मिलेगा वाहनों को तेल:-

परिचय:- एक नजर में 

राष्ट्रीय राजधानी Delhi देश की राजधानी होने के साथ ही एक बड़ा महानगर भी है। दिल्ली में वाहनों की संख्या करोड़ों में है। भारत की आबादी तेजी से बढ़ रही है और आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ व्यक्तिगत वाहनों पर निर्भरता ने यहां के वायु प्रदूषण को चिंताजनक स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया है। वायु गुणवत्ता सूचकांक “AQI” के दिये आंकड़ों के अनुसार, Delhi दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है। Delhi की इस गंभीर स्थिति को सुधारने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानि NGT और सुप्रीम कोर्ट द्वारा कई दिशानिर्देश पारित किए गए हैं। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए एक नया आदेश सामने आया है; यदि कोई डीजल वाहन 10 साल से अधिक और पेट्रोल वाहन 15 साल से ज्यादा पुराना है, तो उसे पेट्रोल पंप से तेल नहीं दिया जाएगा।

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delhi सरकार के इस फैसले का उद्देश्य क्या है ?

इस नियम के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:-

  • बढ़ते प्रदूषण में कमी लाना।
  • दिल्ली में पुराने, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़कों से हटाना भी शामिल है।
  • दिल्ली में लोगों को ई-वाहन या सीएनजी जैसे वैकल्पिक ईंधन की ओर ज्यादा-से-ज्यादा प्रोत्साहित करना है।
  • पर्यावरणीय कानूनों को कठोरता से लागू करना।

Delhi सरकार और पर्यावरण नियंत्रण एजेंसियां भी यह मानती हैं कि पुराने वाहन कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसी जहरीली गैसें वातावरण में नये वाहनों की तुलना में ज्यादा छोडते  हैं, जो इंसानों की सेहत के लिए बहुत ज्यादा खतरनाक हैं।

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दिल्ली सरकार के नए आदेश की प्रमुख बातें:- 

  1. डीजल वाहन पर बैन:
    10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों को पेट्रोल पंप से अब डीजल नहीं मिलेगा।
  2. पेट्रोल वाहन पर बैन:
    15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को भी पेट्रोल पम्प से तेल नहीं मिलेगा।
  3. दिल्ली सरकार की स्वचालित पहचान प्रणाली:
    पेट्रोल पंपों पर वाहन नंबर प्लेट स्कैनिंग सिस्टम लगाए जाएँगे, जिससे पंप कर्मचारी वाहन की उम्र को उसी समय जान सकें।
  4. QR कोड का सिस्टम भी:
    वाहन की वैधता को सही से जांचने के लिए एक डिजिटल QR कोड सिस्टम भी लागू किया जा रहा है।
  5. मान्यता प्राप्त वाहनों को भी छूट नहीं मिलेगी:
    दिल्ली सरकार के नियम के अनुसार, अगर पुराने वाहन का इंश्योरेंस वैध भी है और वह तकनीकी रूप से सही स्थिति में भी हो, तब भी उसे इस नियम से छूट नहीं मिलेगी।
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दिल्ली सरकार में इसका कानूनी आधारक्या है:- 

इस निर्णय को NGT और सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए आदेशों पर आधारित माना जा रहा है:

  • NGT का आदेश (2015):
    NGT ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों के उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी।
  • सुप्रीम कोर्ट का मिला समर्थन:
    सुप्रीम कोर्ट ने भी इन निर्देशों का पूरा समर्थन किया और दिल्ली सरकार को निर्देश दिए कि वह इन आदेशों को कड़ी/सख्ती से लागू करे।
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दिल्ली सरकार की रणनीति और विकल्प पर एक नजर:- 

दिल्ली सरकार पुराने वाहनों की तेजी से स्क्रैपिंग को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं भी दिल्ली सरकार द्वारा चलाई जा रही हैं:

  1. वाहन स्क्रैप करने की नीति:
    पुराने वाहन मालिकों को स्क्रैपिंग करने पर नए वाहन की खरीद पर काफी छूट दी जा रही हैं।
  2. सरकार द्वारा ई-वाहन नीति लागू की गयी है:
    Delhi सरकार की ईवी नीति के अंतर्गत ई-वाहनों की खरीद पर सब्सिडी, रोड टैक्स में छूट और रजिस्ट्रेशन शुल्क माफ करने की भी योजना बनाई गयी है।
  3. सरकार द्वारा सीएनजी और हाइड्रोजन ईंधन का ज्यादा उपयोग:
    सार्वजनिक परिवहन को वैकल्पिक ईंधन जैसे सीएनजी, हाइड्रोजन और ई-बसों की ओर अधिक मोड़ा जा रहा है।
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सरकार द्वारा समाप्ति और सुझाव पर एक नजर:- 

Delhi सरकार का यह कदम वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने की दिशा में साहसिक और जरूरी कदम माना जा रहा है। हालाँकि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि इसे जमीनी स्तर पर कितनी कुशलता से लागू किया जाएगा।

जनता के सुझाव:

  • पुराने वाहन मालिकों को पर्याप्त समय और विकल्प भी दिए जाएं।
  • स्क्रैपिंग और ई-वाहन पर जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
  • सरकार द्वारा सब्सिडी और आसान लोन योजनाएं चलाई जानी चाहिए।
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इसका निष्कर्ष:-

सरकार का यह फैसला Delhi के भविष्य को स्वस्थ और स्वच्छ बनाने की दिशा में भी एक मजबूत कदम कहा जाएगा। भले ही इसकी राह में बड़ी चुनौतियाँ क्यों न हों, लेकिन यदि नागरिक और सरकार मिलकर अपने-अपने प्रयास करें तो यह न सिर्फ दिल्ली बल्कि देशभर के शहरों के लिए भी एक विशेष मॉडल नीति बन सकती है। वायु प्रदूषण की लड़ाई लंबी होगी, लेकिन यह निर्णय इस लड़ाई का एक निर्णायक हथियार भी बन सकता है।

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