जून, 2025 में भारत का GST collection बढ़कर 6.2% लगभग 1.85 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हुआ। जाने विस्तार से।
जून, 2025 में GST का कलेक्शन 6% बढ़कर 1.85 लाख करोड़ हुआ:-
भारत सरकार द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 में वस्तु एवं सेवा कर GST द्वारा कुल 1.85 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले वर्ष यानि जून, 2024 की तुलना में 6 प्रतिशत अधिक है। GST में यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा सकती है, विशेष रूप से तब जब वैश्विक मंदी की आंशका और घरेलू चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।
वस्तु और सेवा कर यानि GST क्या है ?
वस्तु एवं सेवा कर यानि GST भारत में 1 जुलाई, 2017 से लागू किया गया एक अप्रत्यक्ष और महत्वपूर्ण कर है, जो केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लगाए गए विभिन्न करों को एकसाथ मिलाकर एक साथ कर प्रणाली में लाया गया। यह भारत सरकार की एक राष्ट्र, एक कर की अवधारणा पर मुख्य रूप से आधारित है और इसे भारत के सबसे बड़े कर सुधारों में से एक माना गया है।
GST के तहत मुख्य रूप से चार प्रकार के कर होते हैं:
- CGST कर, यह केंद्र सरकार द्वारा वसूला गया कर है।
- SGST कर, जो राज्य सरकार द्वारा वसूला गया कर है।
- IGST कर, जो अंतर-राज्यीय लेन-देन पर केंद्र द्वारा वसूला गया कर है।
- UTGST कर, जो केंद्र शासित प्रदेशों के लिए विशेष रूप से लगाया गया कर है।
जून 2025 का संग्रहण किए गए आंकड़ों पर नजर:-
- जून 2025 का कुल संग्रहण लगभग ₹1.84 लाख करोड़ रहा है।
- इस माह की वृद्धि दर पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6% अधिक है।
- इनकम डिवीजन पर एक नजर:
CGST कर ₹33,400 करोड़ रहा SGST कर ₹41,500 करोड़ रहा IGST कर ₹99,000 करोड़ (जिसमें ₹42,000 करोड़ आयात पर) रहा Cess कर ₹10,100 करोड़ रहा।
जीएसटी में हुई इस वृद्धि के प्रमुख कारण:-
1. देश की व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आना:-
जून, 2025 में व्यापार और उपभोक्ता मांग में तेजी से वृद्धि देखी गई। खास तौर पर ई-कॉमर्स, मैन्युफैक्चरिंग, FMCG और ऑटोमोबाइल सेक्टर में व्यापार में बढ़ोतरी ने जीएसटी संग्रह में बहुत बड़ा योगदान दिया।
2. सरकार के कड़े अनुपालन नियम:-
देश की जीएसटी परिषद और वित्त मंत्रालय ने ITC यानि Input Tax Credit के दुरुपयोग को रोकने के लिए, फर्जी बिलिंग पर कार्रवाई के साथ-साथ जीएसटी रिटर्न फाइलिंग की निगरानी को भी काफी सख्त बना दिया है। इससे राजस्व में पारदर्शिता और बढ़ोतरी दोनों हुई हैं।
3. देश के आयात में वृद्धि हुई:-
जून, 2025 में आयातित वस्तुओं की मात्रा और मूल्य में तेज वृद्धि दर्ज की गई थी। क्योंकि आयात पर IGST शुल्क लगा होता है, इसलिए इसका प्रभाव संग्रहण पर सीधे तौर पर पड़ता है।
4. देश के सेवा क्षेत्र में बड़ा सुधार:-
IT सैक्टर, टेलीकॉम विभाग, वित्तीय सेवाओं जैसे सेवा क्षेत्रों में वृद्धि से भी जीएसटी संग्रह में तेजी से इजाफा हुआ है।
5. फेस्टिवल सीजन की विशेष तैयारियाँ:-
जुलाई और अगस्त के आने वाले त्योहारों के लिए व्यापारिक तैयारियाँ जून में ही शुरू होने लगती हैं, जिससे मांग और आपूर्ति श्रृंखला में काफी तेजी आती है। यह भी संग्रहण को काफी हद तक बढ़ाता है।
जीएसटी में इस वृद्धि का क्या अर्थ है ?
1. देश की आर्थिक मजबूती का संकेत:-
देश में लगातार ऊँचा जीएसटी संग्रह यह दिखाता है कि अर्थव्यवस्था पुनः पटरी पर तेजी से लौट रही है। यह सरकार और नीति निर्माताओं के लिए आत्मविश्वास का विषय भी है।
2. सरकारी राजस्व में हुई तेज वृद्धि:-
उच्च कर संग्रह से सरकार को अधिक सार्वजनिक व्यय करने की क्षमता बढ़ती है; जैसे कि इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य और रक्षा क्षेत्र आदि में।
क्या जीएसटी के क्षेत्र में चुनौतियाँ अभी भी बाकी हैं ?
1. जीएसटी में फर्जी बिलिंग और धोखाधड़ी होना:-
अब भी बहुत से व्यापारी फर्जी बिल बनाकर ITC का दुरुपयोग कर रहे हैं। हालांकि इसमें काफी कमी आई है, फिर भी यह पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।
2. लगातार छोटे व्यवसायों की शिकायतें होना:-
इस MSME सेक्टर में अभी भी जटिल जीएसटी नियमों और अनुपालन प्रक्रिया से काफी हद तक जूझ रहा है। बार-बार नियम बदलने से भ्रम की स्थिति बनती रहती है।
भविष्य में क्या हो सकता है?
1. देश में जीएसटी दरों की समीक्षा:-
देश में जीएसटी परिषद भविष्य में कर दरों को तर्कसंगत बनाने की दिशा में कठोर कदम उठा सकती है। जिस कारण दरें सरल और व्यापार के अनुकूल होगी।
2. देश में छोटे व्यापारियों के लिए राहत होना:-
केंद्र सरकार छोटे व्यापारियों के लिए सरल अनुपालन मॉडल और छूट योजनाएँ ज्यादा ला सकती है जिससे उनकी कर भागीदारी में काफी badhottबढ़े।
इसका निष्कर्ष:-
जून 2025 में 1.85 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार की स्पष्ट झलक दिख रही है। यह वृद्धि केवल संख्याओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे नीतिगत सुधार, प्रशासनिक सख्ती और व्यापारिक विश्वास की बहुत बड़ी भूमिका दिखती है। जीएसटी संग्रह में लगातार सुधार यह सोचने पर विवश करता है कि भारत का कर ढाँचा स्थिरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
हालांकि चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन यदि सरकार और व्यापार जगत मिलकर अच्छे से काम करें, तो भारत एक अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी कर व्यवस्था की दिशा में अपने क्षेत्र में अग्रसर हो सकता है। यह न केवल सरकारी राजस्व को काफी सशक्त करेगा, बल्कि देश की आर्थिक नींव को भी तेजी से मजबूत बनाएगा।
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