अमेरिका ने जापान पर गिराया था परमाणु बम। 6 अगस्त को हिरोशिमा और 9 अगस्त को नागासाकी पर गिरा था बम। जाने विस्तार से। Always Right or Wrong.
जापान पर 6 और 9 अगस्त 1945 को गिरा था परमाणु बम:-
6 अगस्त 1945 को मानव इतिहास में जापान के लिए एक काला दिन था, जब पहली बार किसी देश पर परमाणु बम का प्रयोग युद्ध के हथियार के तौर पर किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के समय में इस दिन अमेरिका ने जापान के शहर हिरोशिमा पर लिटिल बॉय नाम का परमाणु बम गिराया था। इसके तीन दिन बाद ही यानि 9 अगस्त को नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिराया गया। इस घटना ने न केवल द्वितीय विश्व युद्ध को रोक दिया, बल्कि दुनिया को परमाणु युग में भी प्रवेश करा दिया था।
1939 से 1945 तक चला द्वितीय विश्व युद्ध और अमेरिका और जापान के बीच संघर्ष:-
द्वितीय विश्व युद्ध वर्ष 1939 से 1945 तक चला। इसके अंतिम चरण में अमेरिका और जापान के बीच प्रशांत क्षेत्र में भयंकर युद्ध चल रहा था। पहले जापान ने 7 दिसंबर 1941 को अमेरिका के पर्ल हार्बर नौसैनिक अड्डे पर हमला कर उसपर कब्जा कर लिया था, जिससे अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल होने को मजबूर हो गया।
अमेरिका ने इसका जवाब देने के लिए जापान के खिलाफ सघन सैन्य अभियान चलाया और धीरे-धीरे प्रशांत द्वीपों पर अपना कब्जा जमाने लगा। लेकिन जापानी सेना ने हर मोर्चे पर आत्मघाती शैली में अपना युद्ध लड़ा, जिससे अमेरिका को भारी नुकसान हुआ। जापान किसी के भी दबाव में आत्मसमर्पण के लिए तैयार नहीं था और अमेरिका को धीरे-धीरे डर होने लगा था कि मुख्य भूमि जापान पर हमला करने में लाखों अमेरिकी सैनिक मारे जा सकते हैं।
मैनहट्टन प्रोजेक्ट द्वारा कैसे हुआ परमाणु बम का विकास:-
अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा तीनों देशों ने मिलकर एक गुप्त परमाणु कार्यक्रम शुरू किया जिसे मैनहट्टन प्रोजेक्ट नाम दिया गया । इसका मुख्य उद्देश्य था यूएसएसआर से पहले परमाणु बम का निर्माण करना, क्योंकि तीनों देशों को डर था कि नाजी जर्मनी पहले ऐसा कर लेगा। इस परियोजना में जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर, एनरिको फर्मी और अन्य वैज्ञानिकों ने मिलकर इस कार्य को अंजाम दिया था।
वर्ष 1945 तक अमेरिका के पास दो तरह के परमाणु बम तैयार हो गए थे; पहला लिटिल बॉय (यूरेनियम आधारित) और दूसरा फैट मैन (प्लूटोनियम आधारित)। इन बमों का परीक्षण 16 जुलाई 1945 को न्यू मैक्सिको में सफलतापूर्वक किया गया था जिसे ट्रिनिटी टेस्ट नाम दिया गया था।
अमेरिका द्वारा 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर बम गिराने की घटना:-
जापान में सुबह लगभग 8:15 बजे, अमेरिकी बी-29 बमवर्षक विमान एनोला गे ने हिरोशिमा पर लिटिल बॉय नाम से परमाणु बम गिराया था। बम गिरने के लगभग 43 सेकंड बाद ही उसमें भयंकर विस्फोट हुआ था।
- परमाणु विस्फोट की तीव्रता लगभग 15 किलो टन टीएनटी के बराबर मानी गयी थी।
- बम के प्रभाव से लगभग 70,000 से 80,000 लोग मारे गए थे।
- जापान में आग की लपटों, रेडिएशन और मलबों में दबकर हजारों और लोग बाद में मारे गए थे।
- जापान के शहर का लगभग 70% हिस्सा बुरी तरह से नष्ट हो गया था।
अमेरिका द्वारा 9 अगस्त 1945 को नागासाकी पर गिराया दूसरा बम:-
6 अगस्त के तीन दिन बाद यानि 9 अगस्त को फैट मैन नाम का बम नागासाकी पर गिराया गया।
- यहां भी अनुमानतः 40,000 से 75,000 हजार लोग मारे गए थे।
- जापान के दोनों शहरों में बाद के महीनों और वर्षों में रेडिएशन के कारण कैंसर, जन्म दोष, त्वचा रोग और मानसिक बीमारियों का कहर बरपा रहा।
जापान ने किया आत्मसमर्पण:-
इन दो भयानक घटनाओं के बाद, जापान पर बहुत बड़ा दबाव पड़ा। अंततः 15 अगस्त 1945 को जापान के सम्राट हिरोहितो ने रेडियो पर अपने आत्मसमर्पण की घोषणा की और औपचारिक रूप से 2 सितंबर 1945 को दस्तावेजों पर आत्मसमर्पण के हस्ताक्षर किए गए, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हो गया।
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जापान पर बम के प्रभाव और दीर्घकालिक परिणाम:-
1. मानवता पर हुआ गंभीर असर:-
- जापान के हज़ारों लोग वर्षों तक कैंसर, जनन दोष और मानसिक पीड़ा से गंभीर रूप से जूझते रहे।
- हिबाकुशा यानि बम पीड़ितों की पीढ़ियाँ इस त्रासदी की गवाह आज भी बनी हुई हैं।
2. इस त्रासदी का अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर असर:-
- अमेरिका ने परमाणु बम के बाद स्वयं को विश्व की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित कर लिया था।
- अमेरिका बनाम सोवियत संघ के रूप में शीत युद्ध की शुरुआत हुई।
- परमाणु हथियारों की होड़ तेजी से शुरू हुई, जिससे आज तक दुनिया खतरे में जी रही है।
अमेरिका ने किया था जापान पर परमाणु हमला।
जापान के हिरोशिमा और नागासाकी की विरासत:-
आज हिरोशिमा और नागासाकी में शांति स्मारक, संग्रहालय और पार्क बने हुए हैं, जो दुनिया को इस त्रासदी की याद आज भी दिलाते हैं। हर साल 6 और 9 अगस्त को पीड़ितों की याद में जापान में कार्यक्रम होते हैं। जापान ने युद्ध के बाद पूर्णतः शांतिवादी संविधान को अपना लिया था। कभी भी परमाणु हथियारों के निर्माण या उपयोग की दिशा में अपना कदम नहीं उठाया।
इसका निष्कर्ष:-
6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर गिरा परमाणु बम मानव इतिहास की सबसे भीषण घटनाओं में से एक माना जाता है। इसने न केवल लाखों लोगों की जान ले ली थी, बल्कि पूरी दुनिया को यह भी संदेश दिया कि विज्ञान का गलत प्रयोग किस हद तक विनाशकारी और जनहानी का रूप हो सकता है। यह घटना आज भी दुनिया को शांति, सहअस्तित्व और निरस्त्रीकरण की राह पर चलने की प्रेरणा का मार्ग दिखाती है।