बड़ोदरा में गिरा पुल

वडोदरा में पुल गिरा, हुआ बड़ा हादसा: गुजरात सरकार द्वारा लगातार तीसरे दिन भी बचाव अभियान जारी रहा, दो लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं; अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी। Always Right or Wrong.

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गुजरात के बड़ोदरा में गिरा 40 साल पुराना पुल: 18 लोगो की गयी जान, देश में क्यों फिर रहे बार-बार पुल; वजहें और समाधान; जाने विस्तार से:- 

इसका परिचय:- 

हाल ही में गुजरात राज्य के बड़ोदरा जिले में एक 40 साल पुराना पुल पानी के दबाव के कारण अचानक गिर गया, जिससे 18 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। साथ ही 3 लोग अभी भी लापता हैं। वडोदरा का यह हादसा न केवल स्थानीय प्रशासन की विफलता को उजागर करता है, बल्कि पूरे देश में बन रहे बुनियादी ढांचे की बदहाल स्थिति को भी गंभीरता से दिखाता है। भारत में बीते कुछ सालों से पुलों के गिरने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे जान-माल का भी काफी नुकसान होता है।

वडोदरा में गिरा पुल।

वडोदरा की इस घटना का संक्षिप्त विवरण साथ ही बड़ोदरा पुल हादसा:- 

बड़ोदरा जिले के करजन तालुका में स्थित यह पुल माही नदी पर था और लगभग 40 साल पहले बना था। यह पुल क्षेत्रीय संपर्क का एक महत्वपूर्ण और कम दूरी का माध्यम था, जो गांवों और कस्बों को एक दूसरे से जोड़ता था। जब यह हादसा हुआ उस समय इस पुल पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार ग्रामीण नदी को पार कर रहे थे कि तभी अचानक पुल का एक हिस्सा ढह गया और ऊपर चल रहे सभी वाहन नदी में गिर गए। मौके पर बचाव दल भी पहुंचा, लेकिन जब तक राहत कार्य शुरू हुआ तब तक 18 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी।

भारत में क्यों बढ़ रही पुल गिरने की घटनाएं: एक चिंताजनक आँकड़ा:- 

भारत में हर साल बहुत से पुल गिरने की घटनाएं होती हैं। कुछ प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:-

  • साल 2022, गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर बना झूला पुल के गिर जाने से 140 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।
  • साल 2023, बिहार के भागलपुर और सहरसा में तीन-चार पुल गिर गए थे, जिनमें से दो निर्माणाधीन ही थे।
  • साल 2016, कोलकाता में निर्माणाधीन विवेकानंद फ्लाईओवर गिर गया, जिसमें 27 से अधिक लोग मारे गए।

भारत में हुई इन सभी घटनाओं में एक बात समान है या तो पुल बहुत अधिक पुराने थे या उनका रखरखाव ही ठीक से नहीं हुआ था या निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही बर्ती गयी थी।

वडोदरा में गिरा पुल।

इसके मुख्य कारण कि देश में इतने पुल क्यों गिरते हैं ?

1. पुरानी संरचनाएँ होना और रखरखाव की बहुत ज्यादा कमी:- 

भारत में हजारों ब्रिज ब्रिटिश काल या वर्ष 1960 से 80 के दशक के दौरान बने हुए हैं। इनकी उम्र 30 से 50 साल हो चुकी है और इनके रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान ही नहीं दिया जाता है। अधिकांश राज्यों में ब्रिज की अच्छी प्रणाली मौजूद ही नहीं है।

2. ब्रिज पर बढ़ता अत्यधिक लोड और ओवरलोडिंग की समस्या:- 

देश में ज़्यादातर ब्रिज को आमतौर पर 10 से 15 टन लोड वहन करने की क्षमता के अनुसार ही डिजाइन किया जाता है। लेकिन वर्तमान में भारी ट्रक और ओवरलोड वाहन करने के कारण इन ब्रिज पर दुर्घटनाएँ बढ़ रही हैं, जिससे संरचना पर भारी वाहन का अत्यधिक दबाव पड़ता है और समय से पहले उसका क्षरण हो जाता है।

वडोदरा में गिरा पुल।

बार-बार ब्रिज गिरने के क्या परिणाम:-

  1. देश में बढ़ता मानव जीवन का नुकसान – हर घटना में दर्जनों लोगों की मौत हो जाती है और बहुत से लोग घायल होते हैं।
  2. देश का बढ़ता आर्थिक नुकसान – लाखों-करोड़ों की संपत्ति का नुकसान भी होता है और यातायात भी लंबे समय के लिए बाधित होता है।
  3. जनता के विश्वास में गिरावट – जनता का जो विश्वास सरकार और प्रशासन के लिए बनता है वह कमजोर होता है।
  4. देश के विकास पर असर – जब संपर्क मार्ग लंबे समय के लिए बाधित होते हैं, तो व्यापार, स्कूल, अस्पताल आदि सभी तरह पर विशेष प्रभाव पड़ता है।
वडोदरा में गिरा पुल।

इसका समाधान क्या होना चाहिए ?

1. सरकार द्वारा ब्रिज का नियमित निरीक्षण और ऑडिट होना चाहिए:- 

देश की हर राज्य सरकार को अपने क्षेत्र के ब्रिज की साल में कम से कम एक बार संरचनात्मक जांच अवश्य करानी चाहिए। पुराने ब्रिज की संख्या, हालत, लोड क्षमता आदि का डेटा डिजिटल रूप से सरकार के पास उपलब्ध होना चाहिए।

2. पुराने ब्रिज का पुनर्निर्माण होना चाहिए:- 

देश के जिन ब्रिज की उम्र 30 साल से अधिक हो चुकी है, उन्हें समय रहते मरम्मत या फिर से बनाने की योजना पर सरकार को काम करना चाहिए। इसके लिए केंद्र सरकार एक राष्ट्रीय पुल नवीनीकरण मिशन चलाना चाहिए।

वडोदरा में गिरा पुल।

इसका निष्कर्ष:- एक नजर में 

गुजरात के बड़ोदरा में हुआ ब्रिज हादसा सरकार के लिए एक और चेतावनी है कि भारत को अपने बुनियादी ढांचे को गंभीरता से सुधारने की आवश्यकता है। ब्रिज सिर्फ कंक्रीट की संरचना मात्र नहीं होते, वे गांव-शहरों को भी जोड़ते हैं साथ ही विकास की नींव होते हैं और आम जनता की सुरक्षा से भी जुड़े होते हैं। जब-जब कोई ब्रिज गिर जाता है, वह सिर्फ एक हादसा मात्र नहीं होता, बल्कि हमारी व्यवस्था की कमजोरियों को भी दिखाता है।

सुनीता विलियम्स की सुरक्षति वापसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की तारीफ।

https://www.thehindu.com/opinion/editorial/bridge-too-far-on-the-bridge-collapse-in-vadodara/article69796587.ece

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