2025 में रूस और अमेरिका में भारत के लिए कौन ज्यादा फायदेमंद ? जाने विस्तार से …. Always Right or Wrong.
भारत के लिए रूस और अमेरिका में किसका साथ होगा ज्यादा फायदेमंद ?
भारत आज एक ऐसी वैश्विक शक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है, जो न सिर्फ़ एशिया बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को तेजी से प्रभावित कर रहा है। बदलते भू-राजनीतिक हालात में भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल तो यह उठता है कि उसे किसके साथ सम्बन्धों को अधिक मज़बूत करना चाहिए; रूस के साथ या अमेरिका के साथ? दोनों ही देश भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण बने हुए हैं, लेकिन परिस्थितियाँ, हित और समय के अनुसार देखा जाये तो भारत को संतुलन साधते हुए अपनी विदेश नीति को सही प्रकार से चलाये रखने की आवश्यकता है।
भारत और रूस संबंध: परंपरा और रक्षा का एक मजबूत आधार
भारत और रूस जो पहले सोवियत संघ था, के संबंध दशकों पुराने रहे हैं। शीत युद्ध के दौर से ही, रूस ने भारत को रणनीतिक और सैन्य सहयोग भरपूर मात्रा में दिया।
भारत के रक्षा क्षेत्र में रूस की अहम भूमिका:-
- भारत के 60 से 70% हथियार और सैन्य तकनीक रूस से आयात होती है।
- ब्रह्मोस मिसाइल, सुखोई-30, मिग-29, टी-90 टैंक जैसे महत्वपूर्ण हथियार रूस से ही मिले हैं।
- रूस ने भारत को न सिर्फ हथियार बेचे बल्कि भारत को रक्षा उत्पादन में भी अहम साझेदारी की।
भारत और russia का ऊर्जा और अंतरिक्ष सहयोग:-
- रूस, भारत को परमाणु ऊर्जा संयंत्र और तकनीक बड़े स्तर पर उपलब्ध कराता है; जैसे: कुडनकुलम परमाणु संयंत्र इसका मुख्य उदाहरण है।
- भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में भी रूस ने हमारी बहुत मदद की, जैसे इसरो के प्रारंभिक उपग्रहों का प्रक्षेपण करना।
भारत और अमेरिका संबंध: अर्थव्यवस्था और तकनीक के नए युग का आरंभ:-
वर्ष 1990 के दशक के बाद से ही भारत और अमेरिका के रिश्तों में तेजी से सुधार हुआ। शीत युद्ध के बाद जब वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदला, तब भारत ने अमेरिका के साथ रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को काफी गहरा किया।
अमेरिका के साथ व्यापार और निवेश:-
- अमेरिका वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है।
- भारत आईटी, दवा और सेवाओं के क्षेत्र में अमेरिका को निर्यात कर अरबों डॉलर का लाभ कमाता है।
- अमेरिकी कंपनियाँ भारत में निवेश करती हैं, जिससे रोजगार और तकनीक दोनों का लाभ भारत को मिलता है।
दोनों देशों का रक्षा और रणनीतिक संबंध:-
- हाल के वर्षों में अमेरिका और भारत के बीच कई रक्षा समझौते हुए हैं; जिनमें COMCASA, BECA, LEMOA उनमें से एक हैं।
- अमेरिका से भारत को हाई-टेक हथियार भी मिल रहे हैं – जैसे प्रीडेटर ड्रोन, अपाचे और चिनूक हेलिकॉप्टर आदि हैं।
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए अमेरिका और भारत की साझेदारी भी काफी अहम है।
रूस बनाम अमेरिका के साथ भारत के फायदे और नुकसान:-
रूस के फायदे: संक्षिप्त में
- सस्ता और भरोसेमंद हथियार व ऊर्जा आपूर्ति का होना।
- संयुक्त राष्ट्र में राजनीतिक समर्थन प्राप्त होना।
- भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता में तेजी से मदद का होना।
Russia की सीमाओं पर एक नजर:-
- Russia की अर्थव्यवस्था अमेरिका से कमजोर है और वह चीन पर भी निर्भर होता जा रहा है।
- पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से भारत को Russia से व्यापार और तकनीक में कठिनाई भी हो सकती है।
अमेरिका के फायदे: एक नजर में
- विशाल बाजार और निवेश से भारत की अर्थव्यवस्था को तेजी से लाभ।
- आधुनिक तकनीक, शिक्षा और नवाचार में भी बहुत सहयोग।
- चीन के खिलाफ भारत को मजबूत साझेदारी अमेरिका से ही मिल सकती है।
किसका साथ ज्यादा फायदेमंद होगा ?
यदि सवाल भविष्य के हिसाब से देखा जाए, तो अमेरिका का साथ रूस की तुलना में भारत के लिए ज्यादा फायदेमंद होगा। जैसे:
- भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को पूंजी, तकनीक और बाजार की बहुत ज़रूरत है, जो अमेरिका ही दे सकता है।
- सेमीकंडक्टर, एआई, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा आदि क्षेत्रों में अमेरिका ही अग्रणी है।
- भारत के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती वर्तमान में चीन है। अमेरिका भी चीन को रोकना चाहता है, इसलिए दोनों का हित एक जैसा ही है।
- वैश्विक प्रतिष्ठा – अमेरिका के साथ साझेदारी से भारत G20, क्वाड, और अन्य मंचों पर मजबूत स्थिति में आता है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भारत Russia से इन हितों को सोचकर दूर हो जाए। Russia भारत की रक्षा ज़रूरतों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए आज भी बहुत अहम है।
इसका निष्कर्ष: संक्षिप्त रूप में
भारत के लिए Russia और अमेरिका दोनों ही बेहद ज़रूरी हैं, लेकिन दीर्घकालिक लाभ और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए अमेरिका का साथ भारत के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। अमेरिका भारत को न सिर्फ़ आर्थिक और तकनीकी शक्ति लगातार दे रहा है बल्कि चीन जैसी चुनौती का सामना करने में भी भारत की मदद करेगा। वहीं Russia भारत का पुराना दोस्त बना हुआ है और रहेगा, खासकर रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में अहम।
इसलिए भारत को दोनों का दोस्त, किसी का दुश्मन नहीं की नीति अपनाते हुए अमेरिका के साथ गहरी साझेदारी और Russia के साथ पारंपरिक रिश्ते बनाए रखने की आवश्यकता होगी। यही भारत की ताकत और वास्तविक लाभ का प्रसस्त मार्ग है।