पाकिस्तान में 100 साल पुराने हिंदू मंदिर की जमीन पर हुआ कब्जा, दरावर इत्तेहाद संगठन ने किया विरोध। कौन है दरावर इत्तेहाद ?
दरावर इत्तेहाद संगठन :-
पाकिस्तान में हिंदू समुदाय के अधिकारों के लिए सक्रिय एक संगठन काम कर रहा है जिसका नाम दरावर इत्तेहाद संगठन है। यह संगठन मुख्य रूप से पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू अल्पसंख्यकों के धार्मिक, सामाजिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा करता है। दरावर इत्तेहाद पाकिस्तान संगठन का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचारों को रोकना तथा उनके अधिकारों की रक्षा करना है। यह संगठन जबरन धर्म परिवर्तन, धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण और हिंदू लड़कियों के अपहरण व जबरन विवाह आदि जैसे मुख्य घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाता रहा है। इस संगठन का मानना है कि पाकिस्तान के संविधान में अल्पसंख्यकों को मिले अधिकारों का पालन सही से होना चाहिए और उन्हें समान नागरिक अधिकार मिलने ही चाहिए ताकि वे अपना जीवन सही से यापन कर सकें।
इसकी प्रमुख गतिविधियाँ:-
इस संस्था ने कई बार कराची प्रेस क्लब और सिंध विधानसभा के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी किए हैं। इन प्रदर्शनों का मुख्य उद्देश्य जबरन धर्म परिवर्तन और हिंदू लड़कियों के अपहरण के खिलाफ समाज में जागरूकता फैलाना और सरकार पर कार्रवाई का दबाव बनाना शामिल है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में हर साल लगभग 1,000 से अधिक हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन किया जाता है।
टांडो जामा में शिव मंदिर की जमीन पर हुआ अवैध कब्जा:-
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में टांडो जामा कस्बे में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा करने की घटना सामने आई है। स्थानीय हिंदू समुदाय के लोगों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने मंदिर की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है और प्रशासन इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इस घटना के खिलाफ दरावर इत्तेहाद पाकिस्तान ने देश में विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग भी की।
इस संगठन की प्रमुख चुनौतियाँ:-
PDI संगठन को अपने कार्यों में कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है, जैसे:
- सुरक्षा को खतरे: संगठन के सदस्यों को लगातार धमकियाँ मिलती हैं और उनके खिलाफ हिंसा की घटनाएँ भी होती रहती हैं।
- प्रशासनिक उदासीनता का होना: स्थानीय प्रशासन कई बार अल्पसंख्यकों की शिकायतों को नजरअंदाज कर देता है, जिससे न्याय प्राप्त करना ओर भी कठिन हो जाता है।
- सामाजिक दबाव का होना: पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ मुख्य रूप से सामाजिक भेदभाव और पूर्वाग्रह का होना हैं, जो संगठन के कार्यों में मुख्य रूप से बाधा डालते हैं।
इसके नाम का महत्व:-
दरावर शब्द; दरावर नामक किले से लिया गया है, जो बहावलपुर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रतीक स्थल है और रेगिस्तान के मध्य क्षेत्र में स्थित है। यह किला बहावलपुर की शान और गौरव का प्रतीक भी माना जाता है। इत्तेहाद का अर्थ है एकता का होना, जो इस संगठन के मूल विचार का प्रतीक है—क्षेत्रीय एकता होना, सांस्कृतिक पहचान को दिखाना और जनहित के लिए मिल जुलकर कार्य करना।
इसके उद्देश्य और दृष्टिकोण पर एक नजर:-
दरावर इत्तेहाद पाकिस्तान संगठन के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:
- बहावलपुर प्रांत की पुनर्बहाली होना:
इस संगठन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण लक्ष्य है कि बहावलपुर को एक अलग प्रशासनिक प्रांत का दर्जा प्राप्त होना चाहिए, जैसा कि यह वर्ष 1955 से पहले हुआ करता था। - बहावलपुर का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संरक्षण:
पाकिस्तान के बहावलपुर क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर बनाए रखना, स्थापत्य कला को स्थापित करना, भाषा और परंपराओं को संरक्षित रखना भी इस संगठन का एक अन्य लक्ष्य है। - इसके आर्थिक अधिकारों की पुनर्प्राप्ति होना:
पाकिस्तान के बहावलपुर क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बहुत तेजी से हो रहा है, परंतु क्षेत्रीय विकास के लाभ वहां के स्थानीय लोगों तक नहीं पहुँच पाते। संगठन हो रहे इस अन्याय को समाप्त करना चाहता है।
इस संगठन की संरचना पर एक नजर:-
दरावर इत्तेहाद पाकिस्तान संगठन एक लोकतांत्रिक ढांचे के रूप में काम करता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- केंद्रीय कार्यकारी समिति का गठन:-
यह समिति मुख्य रूप से इस संगठन की नीति निर्धारण, रणनीति और निर्णयों के लिए भी मुख्य रूप से उत्तरदायी होती है। - संगठन का युवा मोर्चा:-
इस संगठन के युवाओं को सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल करने हेतु एक अलग शाखा बनाई गई है। - संगठन की महिला शाखा:
महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए और उनके मुद्दों को उजागर करने के लिए भी एक विशेष इकाई कार्य करती है।
इसका निष्कर्ष:-
पाकिस्तान में दरावर इत्तेहाद पाकिस्तान संगठन वर्तमान में एक प्रभावशाली क्षेत्रीय संगठन बन चुका है, जिसने बहावलपुर क्षेत्र के मुख्य अधिकारों, सांस्कृतिक धरोहर की पहचान और स्वायत्तता के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर भरपूर रूप से उठाया है। हालांकि इसे कई तरह की राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है, फिर भी संगठन ने बहावलपुर को एक अलग पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।
यदि यह संगठन अपनी गतिविधियों को शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और समावेशी बनाए रखता है, तो यह न केवल बहावलपुर के भविष्य को बल्कि पाकिस्तान के संघीय ढांचे को भी सशक्त बनाने में योगदान दे सकता है।